BY
Yoganand Shrivastava
Tamil Nadu तमिलनाडु की राजनीति में चुनावी बिसात बिछ चुकी है। मुख्यमंत्री निवास पर पी. चिदंबरम और एम.के. स्टालिन के बीच लगभग एक घंटे तक चली बैठक ने राज्य में ‘इंडिया’ गठबंधन के भविष्य पर चर्चाओं का बाजार गर्म कर दिया है। जहाँ कांग्रेस अपनी सीटों की संख्या बढ़ाने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रही है, वहीं मुख्यमंत्री स्टालिन ने गठबंधन की मर्यादा और क्षेत्रीय समीकरणों का हवाला देते हुए कड़ा रुख अख्तियार कर रखा है।
Tamil Nadu रणनीतिक बदलाव: गिरीश चोडांकर की जगह चिदंबरम को क्यों मिली कमान?
Tamil Nadu इससे पहले तमिलनाडु के कांग्रेस प्रभारी गिरीश चोडांकर बातचीत का नेतृत्व कर रहे थे। सूत्रों के अनुसार, चोडांकर के सख्त लहजे और बातचीत के तरीके पर एम.के. स्टालिन ने असंतोष जताया था। गठबंधन में दरार न आए, इसलिए कांग्रेस हाईकमान ने चतुर राजनीतिज्ञ और राज्य के वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम को मध्यस्थ बनाकर भेजा है। कांग्रेस को उम्मीद है कि चिदंबरम का व्यक्तिगत प्रभाव और स्टालिन के साथ उनके पुराने संबंध इस गतिरोध को तोड़ने में मददगार साबित होंगे।
सीटों का गणित: कांग्रेस की मांग और DMK का ‘फाइनल ऑफर’
Tamil Nadu सीटों की संख्या को लेकर दोनों दलों के बीच अब भी बड़ी खाई नजर आ रही है। शुरुआत में 41 सीटों की मांग करने वाली कांग्रेस अब 36 सीटों पर समझौता करने को तैयार है। हालांकि, DMK पिछले चुनाव में दी गई 25 सीटों से आगे बढ़ने को राजी नहीं थी। ताजा अपडेट के मुताबिक, DMK ने कांग्रेस को 29 विधानसभा सीटें और 2 राज्यसभा सीटों का अंतिम प्रस्ताव दिया है। DMK नेतृत्व ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि यदि कांग्रेस इन शर्तों पर सहमत नहीं होती है, तो वह गठबंधन से अलग राह चुनने के लिए स्वतंत्र है।
सत्ता में भागीदारी या अधिक सीटें? कांग्रेस की दुविधा
Tamil Nadu कभी तमिलनाडु सरकार में कैबिनेट हिस्सेदारी की मांग करने वाली कांग्रेस अब केवल अपनी चुनावी सीटों को बचाने की लड़ाई लड़ रही है। DMK के सख्त तेवरों ने कांग्रेस को रक्षात्मक स्थिति में ला दिया है। अब गेंद कांग्रेस आलाकमान के पाले में है—क्या वह DMK के इस ‘टेक इट या लीव इट’ (स्वीकार करें या छोड़ दें) प्रस्ताव पर मुहर लगाएगी या फिर अकेले चुनावी मैदान में उतरने का साहस जुटाएगी? पी. चिदंबरम की इस रिपोर्ट के बाद दिल्ली में होने वाली बैठक काफी निर्णायक साबित हो सकती है।





