by: digital desk
Khabar Zara Hatke : वो कहते हैं ना जाको राखे साइयां मार सके न कोय, यह मात्र एक कहावत नहीं, बल्कि उस अटूट विश्वास का प्रतीक है जो हमें सिखाता है कि अगर ऊपर वाले की मर्जी है, तो दुनिया की कोई भी ताकत आपका बाल भी बांका नहीं कर सकती। जीवन में कई बार ऐसे मोड़ आते हैं जब चारों तरफ अंधेरा दिखता है और मुश्किलें पहाड़ जैसी लगने लगती हैं। ऐसे समय में यह पंक्ति एक ढाल का काम करती है। यह हमें याद दिलाती है कि हमारी सुरक्षा किसी इंसान के हाथ में नहीं, बल्कि उस ‘सांई’ (ईश्वर) के हाथ में है जिसने हमें जन्म दिया है।

ऐसी ही एक हैरान करने देने वाली घटना रूस के बेहद ठंडे इलाके साइबेरिया में सामने आई है। यहां एक व्यक्ति, जिसे डॉक्टरों ने क्लीनिकली मृत घोषित कर दिया था, करीब पांच घंटे बाद फिर से जीवित हो गया। इस मामले ने आम लोगों के साथ-साथ मेडिकल विशेषज्ञों को भी चौंका दिया है।
Khabar Zara Hatke : कैसे हुआ पूरा मामला?
बताया जा रहा है कि यह घटना साइबेरिया के मिरनी इलाके की है, जहां तापमान लगभग -20 डिग्री सेल्सियस था। व्यक्ति नशे की हालत में एक बेंच पर गिर गया और कई घंटों तक उसी हालत में पड़ा रहा। जब राहगीरों की नजर उस पर पड़ी, तो उसकी सांसें और धड़कन बंद थीं।
Khabar Zara Hatke : डॉक्टरों ने क्या पाया?
जब मेडिकल टीम मौके पर पहुंची, तो न तो उसकी नाड़ी चल रही थी और न ही ब्लड प्रेशर दर्ज हो रहा था। यहां तक कि ईसीजी मशीन पर भी दिल की धड़कन का कोई संकेत नहीं मिला। सामान्य परिस्थितियों में ऐसे मामलों को क्लीनिकल डेथ माना जाता है।
Khabar Zara Hatke : इलाज के दौरान क्या हुआ?
हालांकि डॉक्टरों ने उम्मीद नहीं छोड़ी और उसे अस्पताल ले जाकर इलाज शुरू किया। विशेषज्ञों की टीम ने शरीर को धीरे-धीरे गर्म करने की प्रक्रिया अपनाई। शरीर का तापमान करीब 25 डिग्री से बढ़ाकर 34 डिग्री सेल्सियस तक लाया गया। इसके बाद सीपीआर और दवाओं की मदद से जीवन के संकेत वापस लाने की कोशिश की गई।
करीब 25 मिनट की कोशिश के बाद मॉनिटर पर हल्की धड़कन दिखाई दी और धीरे-धीरे व्यक्ति की हालत सुधरने लगी।
Khabar Zara Hatke : विशेषज्ञों की राय
डॉक्टरों के अनुसार, अत्यधिक ठंड इस व्यक्ति के लिए फायदेमंद साबित हुई। कम तापमान में शरीर के अंगों को ऑक्सीजन की जरूरत कम हो जाती है, जिससे दिमाग और अन्य महत्वपूर्ण अंग सुरक्षित रह सकते हैं। इसी वजह से इतनी देर तक बिना धड़कन के रहने के बावजूद उसके अंगों को नुकसान नहीं हुआ।
Khabar Zara Hatke : अब कैसी है हालत?
अस्पताल में कुछ दिनों तक इलाज के बाद व्यक्ति पूरी तरह ठीक हो गया और उसे घर भेज दिया गया। ‘जाको राखे साइयां मार सके न कोय’ यह पंक्ति हमें धैर्य और समर्पण सिखाती है। यह अहंकार को कम करती है क्योंकि हम समझ जाते हैं कि हम अपनी ताकत से नहीं, बल्कि उसकी कृपा से सुरक्षित हैं। इसलिए, अपना कर्म करते रहें और सुरक्षा की चिंता उस पर छोड़ दें।

