BY
Yoganand Shrivastava
Maharashtra : महाराष्ट्र के कल्याण से एक विचलित कर देने वाली खबर सामने आई है, जहाँ एक निजी बैंक में वरिष्ठ पद पर कार्यरत युवक ने आवारा कुत्ते के काटने के बाद फांसी लगाकर अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली। मृतक की पहचान ऐस विश्वनाथ अमीन के रूप में हुई है, जो कल्याण ईस्ट के तिसगांव नाका स्थित सहजीवन सोसायटी में रहते थे। इस घटना ने एक बार फिर रेबीज जैसी घातक बीमारी के प्रति जागरूकता और आवारा कुत्तों की समस्या पर बहस छेड़ दी है।
अधूरा इलाज और रेबीज का डर: मौत की वजह
Maharashtra प्राप्त जानकारी के अनुसार, कुछ दिन पहले ऐस को एक आवारा कुत्ते ने काट लिया था। उन्होंने शुरुआती तौर पर रेबीज के इंजेक्शन भी लगवाए थे, लेकिन चिकित्सकीय सलाह के बावजूद दवाई का कोर्स पूरा नहीं किया। डॉक्टरों के मुताबिक, समय पर इलाज पूरा न होने के कारण उनके शरीर में रेबीज के प्रारंभिक लक्षण उभरने लगे थे। रेबीज होने के डर और अपने परिवार को इस असहनीय पीड़ा से बचाने की चिंता में उन्होंने घर पर ही घातक कदम उठा लिया।
रेबीज: लक्षण दिखने के बाद 100% जानलेवा
Maharashtra रेबीज को दुनिया की सबसे खतरनाक बीमारियों में से एक माना जाता है क्योंकि एक बार लक्षण सामने आने के बाद यह लगभग 100% घातक सिद्ध होती है।
- प्रभाव: यह वायरस नसों के माध्यम से मस्तिष्क तक पहुँचता है और वहां सूजन पैदा करता है।
- व्यवहार: इससे व्यक्ति की सोचने की क्षमता, व्यवहार और सांस लेने की प्रक्रिया बुरी तरह प्रभावित होती है।
- धोखा: वायरस शरीर में महीनों तक बिना किसी लक्षण के छिपा रह सकता है, जिससे लोग गंभीरता नहीं समझते। ऐस के मामले में भी लक्षण दिखने तक वायरस उनके तंत्रिका तंत्र पर गहरा असर डाल चुका था।
प्रशासन से मांग: आवारा कुत्तों पर सख्त कार्रवाई की अपील
Maharashtra इस घटना के बाद इलाके में भारी आक्रोश और हड़कंप व्याप्त है। शिवसेना (शिंदे गुट) के पार्षद महेश गायकवाड़ ने नगर निगम के एडिशनल कमिश्नर हर्षल गायकवाड़ से मुलाकात कर इस मुद्दे को गंभीरता से उठाया है। उन्होंने मांग की है कि शहर में बढ़ती आवारा कुत्तों की संख्या पर लगाम लगाने के लिए नगर निगम को तुरंत सख्त कदम उठाने चाहिए, ताकि भविष्य में किसी अन्य परिवार को इस तरह का दुख न झेलना पड़े।
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