India Inflation Crisis : गैस, पेट्रोल-डीजल महंगा, महंगाई का डबल अटैक,खाद्य वस्तुओं की बढ़ती कीमतों ने बिगाड़ा बजट
India Inflation Crisis : मिडिल ईस्ट का तनाव केवल तेल बाजार तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर आम आदमी की रसोई, परिवहन खर्च और घरेलू बजट तक पहुंच चुका है। रसोई गैस और पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतें महंगाई को नई रफ्तार दे रही हैं और जनता पर आर्थिक बोझ बढ़ा रही हैं। कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के चलते पेट्रोल-डीजल रसोई गैस महंगे हुए हैं, जिससे परिवहन लागत बढ़ रही है। और रोजमर्रा की वस्तुओं के दाम भी ऊपर जा रहे हैं। हाल के सप्ताहों में तेल विपणन कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल के दामों में कई बार बढ़ोतरी की है। तो वहीं कमर्शियल व रसोई गैस के बढ़े दामों ने भी आम लोगों की जेब पर सीधा डाका डाला है। दूसरी ओर महंगाई के डबल अटैक से GST व्यवस्था में छूट के दायरे के सीमित होने के बाद भी सस्ते दिनों की उम्मीद दूर होती नजर आ रही है। सरकार की निगरानी सूची में शामिल 54 वस्तुओं में से 41 अब सिंतबर 2025 को हुई जीएसटी कटौती से पहले की कीमतों से भी ज्यादा महंगी हो चुकी हैं। इन दैनिक उपयोगी वस्तुओं के दाम 10 से 15 फीसदी तक बढ़ गए हैं। अब बढ़ती महंगाई और टैक्स के बोझ ने आम आदमी की आर्थिक चुनौतियां बढ़ा दी हैं। ऐसे में घरेलू बजट संभालना पहले की तुलना में ज्यादा मुश्किल होता जा रहा है। अमेरिका-ईरान जंग का असर, क्रूड में उछाल से बढ़ी महंगाई की मार, तेल संकट से बढ़ी टेंशन, पेट्रोल-डीजल महंगा तो रसोई का बजट बिगड़ा, क्रूड की आग में झुलसी जेब और ईंधन महंगा होने से बढ़ीं रोजमर्रा की कीमतें, इसी विषय पर चर्चा करेंगे…लेकिन पहले देखिये ये रिपोर्ट।।।।
India Inflation Crisis : अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव और युद्ध जैसे हालात का असर दुनिया के साथ साथ, भारत में भी आम लोगों की जेब पर दिखने लगा है। पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है, जिससे भारत समेत कई देशों में ईंधन महंगा हुआ है। दरअसल भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयातित तेल से पूरा करता है। ऐसे में क्रूड ऑयल महंगा होने का सीधा असर पेट्रोल-डीजल और रसोई गैस की कीमतों पर पड़ा है। बीते दो से तीन महीनों में ईंधन की कीमतों में कई बार बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिससे परिवहन लागत बढ़ी और इसका सीधा असर खाद्य पदार्थों और रोजमर्रा के सामानों की कीमतों पर पड़ा । ऐसे में देश में खाद्य वस्तुओं की लगातार बढ़ती कीमतों ने आम लोगों की रसोई का बजट बिगाड़ दिया है। पेट्रोल-डीजल, रसोई गैस के साथ ही सब्जियों, दालों, खाद्य तेल, मसालों और अन्य जरूरी खाद्य सामग्री के दाम बढ़ने से घरेलू खर्च में लगातार इजाफा हो रहा है। एक ओर आमदनी की रफ्तार सीमित है, तो दूसरी ओर खर्च लगातार बढ़ रहे हैं। महंगाई का सबसे अधिक असर मध्यम वर्ग और निम्न आय वर्ग के परिवारों पर पड़ रहा है, जिन्हें रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने के लिए अतिरिक्त आर्थिक दबाव का सामना करना पड़ रहा है।
India Inflation Crisis : अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में डॉलर की मजबूती और ग्लोबल सप्लाई चेन में आ रही दिक्कतों की वजह से आयात भी महंगा हो गया है जिससे रोजमर्रा की खाद्य सामग्री के दामों में इजाफा हुआ है। हालांकि महंगाई की मार से राहत दिलाने के लिए सरकार सप्लाई बढ़ाने, जमाखोरों पर शिकंजा कसने और गरीबों को सब्सिडी का सहारा देने जैसे कई मोर्चों पर एक साथ काम कर रही है। खासतौर पर खाद्य वस्तुओं, ईंधन और रोजमर्रा की जरूरतों की कीमतों को काबू में रखने पर सरकार का फोकस है। सरकार के बयान में कहा गया कि भारत उन कुछ देशों में से एक रहा, जिसने अमेरिका-ईरान की बाच युद्ध के चलते होर्मुज स्ट्रेट बंद होने के बाद भी इस जरूरी समुद्री रूट से अपने एनर्जी कार्गो की आवाजाही जारी रखी और देश में किसी भी पेट्रोलियम प्रोडक्ट की कमी को कंट्रोल रखा है। लेकिन विपक्षी दल महंगाई के मुद्दे पर सरकार को नाकाम बता रहे हैं।
India Inflation Crisis : बहरहाल अब सियासत जो भी हो लेकिन ईंधन की कीमतों में लगी इस आग का सीधा असर आम नागरिकों की जेब और देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। खाड़ी देशों में तनाव भारत के लिए केवल विदेश नीति का मुद्दा नहीं, बल्कि आम लोगों की जेब से जुड़ा आर्थिक सवाल भी बना है। ऐसे में यदि तनाव लंबा खिंचता है और कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आता है, तो पेट्रोल-डीजल, एलपीजी, खाद्य वस्तुओं और रोजमर्रा के सामान की कीमतों में बढ़ोतरी के जरिए महंगाई का दबाव और बढ़ सकता है। हालांकि भारत के रणनीतिक तेल भंडार और वैकल्पिक आपूर्ति स्रोत ऐसे झटकों के असर को कुछ हद तक कम करने में मदद कर सकते हैं। लेकिन महंगाई पर प्रभावी नियंत्रण और आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में स्थिरता लाना सरकार के लिये बड़ी चुनौती बना हुआ है।
READ MORE : MP Government Job Rules : दो से ज्यादा बच्चों पर नहीं मिलेगी सरकारी नौकरी ,एमपी में नया नियम हो रहा तैयार

