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SC Slams Pre-Election Freebies ; फ्री खाना मिलेगा तो लोग काम क्यों करेंगे: सुप्रीम कोर्ट

SC Slams Pre-Election Freebies

by: pramod shrivastav

SC Slams Pre-Election Freebies ; देश के राजनीतिक दल मुफ्त की रेवड़ियों से जीत का रास्ता निकालते हैं। भारतीय राजनीति में ‘मुफ्त की रेवड़ी’ या फ्रीबीज का चलन चुनाव जीतने की एक प्रमुख रणनीति बन गया है, जो वर्तमान में देश में एक गंभीर विषय और बहस का मुद्दा बना हुआ है। गुरुवार को सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने इस पर गहरी चिंता जताई है। शीर्ष अदालत ने कहा कि अगर सब कुछ मुफ्त (भोजन, बिजली, नकद) मिलेगा, तो लोग काम क्यों करेंगे ।

कोर्ट ने चेतावनी दी है कि इस तरह की अंधाधुंध घोषणाएं कार्य संस्कृति को खराब कर रही हैं और राष्ट्र के विकास में बाधा डाल रही हैं। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को राज्यों में बढ़ती मुफ्त सुविधाएं बांटने की नीति पर कड़ी नाराजगी जताई। कोर्ट ने कहा कि बिना सोचे-समझे मुफ्त चीजें देना देश के आर्थिक विकास में बाधा बन सकता है। इसके साथ शीर्ष अदालत ने राज्यों को कई सलाह भी दिए हैं।

मुफ्त की रेवड़ियों ने कई राज्यों का बजट बिगाड़ रखा है। यह सभी राजनीतिक दल जानते हैं। बावजूद इसके फ्रीबीज का एलान करना उनके सामने चुनावी मजबूरी है। पंजाब, हिमाचल प्रदेश, महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे राज्यों को राजकोषीय घाटे का सामना करना पड़ रहा है। मगर इन राज्यों में मुफ्त की रेवड़ी वाली योजनाएं धड़ल्ले से जारी हैं।

कल्याणकारी योजनाओं और फ्रीबीज के बीच बारीक अंतर है। हालांकि कई मामलों में यह अंतर स्पष्ट नहीं होता है। कल्याणकारी योजनाओं को एक प्लान के तहत बनाया जाता है। इन योजनाओं का उद्देश्य एक निश्चित आबादी तक लाभ पहुंचाना। उनके जीवन स्तर को सुधारना और संसाधनों तक उनकी पहुंच को बढ़ाना है। मगर अधिकांश समय फ्रीबीज का उद्देश्य राजनीतिक लाभ होता है।
अक्सर राजनीतिक दल चुनाव से ठीक पहले या चुनाव के दौरान अपने घोषणा पत्र में मुफ्त की योजनाओं की घोषणा करते हैं। अब ऐसा कोई चुनाव नहीं है जिसमें मुफ्त की रेवड़ियों का एलान नहीं किया जाता हो। राजनीतिक दलों के बीच अधिक से अधिक मुफ्त की रेवड़ियां बांटने की होड़ मची है।

भारतीय राजनीति में फ्रीबी पॉलिटिक्स अब सिर्फ चुनावी वादा नहीं, बल्कि सीधी रणनीति बन चुकी है। तमाम दल मानते हैं कि जनता को तुरंत फायदा दिखाने वाली योजनाएं वोटों में बदल सकती हैं। यही वजह है कि हर चुनाव से पहले मुफ्त शब्द सबसे ज़्यादा सुनाई देने लगता है। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को फ्रीबीज कल्चर याने मुफ्त की रेवड़ियों पर कहा कि अगर सरकार लोगों को सुबह से शाम तक फ्री खाना, गैस और बिजली देती रहेगी तो लोग काम क्यों करेंगे। ऐसे तो काम करने की आदत खत्म हो जाएगी।

सरकार को रोजगार देने पर फोकस करना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि गरीबों की मदद करना समझ में आता है, लेकिन बिना फर्क किए सबको मुफ्त सुविधा देना सही नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने यह टिप्पणी तमिलनाडु पावर डिस्ट्रीब्यूशन कॉर्पोरेशन लिमिटेड की याचिका पर सुनवाई करते हुए की। इसमें कंज्यूमर्स की फाइनेंशियल हालत की परवाह किए बिना सभी को फ्री बिजली देने का प्रस्ताव था। जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार को कड़ी फटकार लगाई है। दरअसल, राज्य सरकार ने कुछ समुदायों के लिए बिजली टैरिफ में सब्सिडी स्कीम की घोषणा की थी।

इससे पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी पर फाइनेंशियल दबाव पड़ा। राज्य सरकार के फैसले के खिलाफ पावर डिस्ट्रिब्यूशन कंपनियों ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। इस दौरान कोर्ट ने कहा कि राज्यों में अपनाई गई मुफ्त सुविधाओं की संस्कृति आर्थिक विकास में बाधा डालती है। सुप्रीम कोर्ट की बेंच, जिसमें मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत समेत जजों ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि…

SC Slams Pre-Election Freebies ; ‘विकास के कामों के लिए पैसा कहां से आएगा ?’

• ‘कई राज्य सरकारें भारी कर्ज और घाटे के बावजूद मुफ्त योजनाएं बांट रही हैं।
• सरकारें मुफ्त पैसे, बिजली या दूसरी सुविधाएं देती रहेंगी, तो आखिर इनका खर्च कौन उठाएगा ?
• अगर सरकारें मुफ्त खाना, साइकिल और बिजली जैसी सुविधाएं देती रहेंगी
• तो विकास के कामों के लिए पैसा कहां से आएगा ?
• कई राज्य पहले से ही घाटे में हैं, फिर भी वे नई-नई कल्याण योजनाएं शुरू कर रहे हैं।
• कोर्ट ने साफ कहा- जो लोग भुगतान नहीं कर सकते, उन्हें सहायता देना समझ में आता है।
• लेकिन अमीर-गरीब में फर्क किए बिना सबको मुफ्त देना गलत नीति है।

कोर्ट ने कैश ट्रांसफर व मुफ्त सुविधाओं की घोषणा करने की वित्तीय समझदारी पर सवाल उठाया और कहा कि राज्यों को मदद बढ़ाने के बजाय रोजगार पैदा करने को प्राथमिकता देनी चाहिए।

SC Slams Pre-Election Freebies ; कोर्ट का राज्यों को दी सलाह और पूछा सवाल

• अदालत ने राज्यों को सलाह दी कि मुफ्त चीजें बांटने के बजाय
• रोजगार के अवसर पैदा करने पर ध्यान देना चाहिए।
• भारत में हम कैसी संस्कृति बना रहे हैं ?
• क्या यह वोट पाने की नीति नहीं बन जाएगी ?

फिलहाल, सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार और अन्य पक्षों को नोटिस जारी किया है। अब अगली सुनवाई में तय होगा कि ऐसे मुफ्त बिजली योजनाओं पर क्या नियम लागू होंगे।यह मामला इसलिए बड़ा है क्योंकि कई राज्यों में चुनाव से पहले मुफ्त योजनाएं घोषित होती हैं और इससे सरकारी खर्च बढ़ता है, जिससे आर्थिक संतुलन बिगड़ने का खतरा रहता है। मामले में सुप्रीम कोर्ट ने साफ संदेश दिया है कि गरीबों की मदद जरूरी है, लेकिन बिना सोच-समझ सबको मुफ्त सुविधाएं देना देश के विकास के लिए सही नहीं है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कई मंचों से चुनावी मुफ्त योजनाओं को ‘रेवड़ी कल्चर’ करार दे चुके हैं और इसे देश की अर्थव्यवस्था के लिए खतरा बता चुके हैं। लेकिन कई राजनीतिक दल मुफ्त में शिक्षा, स्वास्थ्य और बिजली-पानी को रेवड़ी नहीं बल्कि जनकल्याण में निवेश मानते हैं। अब ‘रेवड़ी कल्चर’ पर सुप्रीम कोर्ट की नसीहत और फटकार पर राजनीतिक दलों के अपने अपने तर्क और आरोप प्रत्यारोप हैं।

बहरहाल अब राजनीतिक आरोप प्रत्यारोप जो भी हों, लेकिन आज की भारतीय राजनीति में यह साफ है कि मुफ्त की रेवड़ियां अब सिर्फ लोकलुभावन नारा नहीं, बल्कि वोट मैनेजमेंट का औज़ार बन चुकी हैं। सवाल यही है कि क्या वाकई मतदाता के लिये ये तात्कालिक फायदे ज्यादा लाभकारी होते हैं या राजनीतिक दलों के दीर्घकालीन विकास के एजेंडे। सवाल ये भी, कि क्या ये मुफ्त की रेवड़ियां राजनीतिक दलों की असल जीत होती हैं।

SC Slams Pre-Election Freebies ; केंद्र सरकार की योजनाएं

पीएम आवास योजना
उज्ज्वला योजना
आयुष्मान भारत योजना
किसान सम्मान निधि
मुफ्त राशन योजना
राज्यों में चल रहीं मुफ्त की योजनाएं

मध्य प्रदेश
लाडली बहना योजना की पात्र महिलाओं को हर महीने 1250 रुपये मिलते हैं।
12वीं पास करने वाली मेधावी लड़कियों को स्कूटी।
100 यूनिट तक बिजली 100 रुपये में।
किसानों को सलाना 12 हजार रुपये देने का वादा।
21 साल की उम्र में पात्र लड़कियों को 1 लाख रुपये का प्रावधान।

पंजाब
300 यूनिट मुफ्त बिजली की सौगात।
महिलाओं को 1000 महीना देने का वादा। अभी अमल नहीं हुआ।

झारखंड
200 यूनिट मुफ्त बिजली की सुविधा।
मइया सम्मान योजना- महिलाओं को हर महीने 2500 रुपये।
हिमाचल
घरेलू कनेक्शन पर 125 यूनिट मुफ्त बिजली।
इंदिरा गांधी प्यारी बहना सुख सम्मान योजना: महिलाओं को हर महीने 1500 रुपये।

राजस्थान
लाडो प्रोत्साहन योजना: बच्ची के जन्म पर 2 लाख रुपये का सेविंग बॉन्ड का वादा।
12वीं पास होने पर मेधावी लड़कियों को स्कूटी।
किसान सम्मान निधि को 6000 रुपये बढ़ाने का वादा।

कर्नाटक
गृह लक्ष्मी योजना: महिलाओं को हर महीने 2000 रुपये देने का प्रावधान।
शक्ति गारंटी योजना: बसों में महिलाओं को मुफ्त सफर की सुविधा।
तमिलनाडु
परिवार के मुखिया को हर महीने एक हजार की सहायता।
बसों में महिलाओं को मुफ्त सफर की व्यवस्था।

छत्तीसगढ़
गरीब महिलाओं को 500 रुपये में गैस सिलिंडर।
महतारी वंदन स्कीम: शादीशुदा महिलाओं को 12000 रुपये की सलाना मदद।
दीनदयाल उपाध्याय कृषि मजदूर योजना: भूमिहीन किसानों और मजदूरों को सलाना 10000 रुपये की मदद।

तेलंगाना
पात्र महिलाओं को हर महीने 2500 रुपये।
200 यूनिट तक बिजली मुफ्त।
500 रुपये में गैस सिलिंडर।
बसों में महिलाओं को मुफ्त सफर की सुविधा।
18,000 करोड़ रुपये के लोन माफी की घोषणा।

महाराष्ट्र
हर गरीब को भोजन और आश्रय की सुविधा।
किसान सम्मान योजना के तहत 15000 रुपये।
किसानों का कर्ज माफ का वादा।
महिलाओं और वृद्धों को हर महीने 2100 का एलान।

दिल्ली
आप की सरकार में
हर महीने 20 हजार लीटर मुफ्त पानी।
हर महीने 200 यूनिट तक बिजली मुफ्त।
महिलाओं को मुफ्त बस में यात्रा।
फ्री वाई-फाई की व्यवस्था।
बुजुर्गों को मुफ्त तीर्थयात्रा।
भाजपा के वादे
आयुष्मान भारत के तहत 10 लाख तक मुफ्त इलाज का वादा।
महिलाओं को हर महीने 2500 रुपये देने का वादा।

गुजरात
गुजरात सरकार गंगा स्वरूपा योजना के तहत विधवा महिलाओं को हर महीने 1250 रुपये की आर्थिक सहायता देती है।
इंदिरा गांधी वृद्धा पेंशन के तहत एक हजार रुपये तक की आर्थिक सहायता दी जाती है।

हरियाणा
मातृभाषा सत्याग्रहियों की पेंशन को 15 हजार से 20 हजार करने का वादा।
सफाई कर्मियों की सैलरी 27 हजार तक करने का वादा।
स्ट्रीट वेंडर्स और फेरीवालों को 10 हजार रुपये सालाना मदद की बात।
अंत्योदय और बीपीएल परिवार को 500 में गैस सिलिंडर।
पांच लाख आवास देने का वादा।
पांच लाख घरों में मुफ्त बिजली।
धान की जगह दूसरी फसल पर प्रति एकड़ 10 हजार देने का वादा।

उत्तर प्रदेश
छात्र छात्राओं को मुफ्त मोबाइल और टैबलट।
किसानों को मुफ्त बिजली की घोषणा।

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