Report: Amit mishra
Hamirpur : जनपद के मौदहा विकासखंड में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) अपनी साख खोती नजर आ रही है। यहां के जिम्मेदार अधिकारियों और पंचायत प्रतिनिधियों ने मिलकर मनरेगा को सरकारी धन लूटने का माध्यम बना लिया है। आरोप है कि डीसी मनरेगा, ग्राम सचिव और प्रधान की त्रिमूर्ति ने मिलीभगत कर कागजों पर फर्जी हाजिरी के जरिए लाखों रुपये का गबन किया है।

कागजों पर ‘मजदूरों का रेला’, धरातल पर सन्नाटा
Hamirpur भ्रष्टाचार की यह कहानी आंकड़ों के खेल से बुनी गई है। शिकायत के अनुसार, ब्लॉक के विभिन्न कार्यों में 169 मजदूरों की फर्जी हाजिरी दर्ज की गई, जबकि मौके पर केवल गिने-चुने मजदूर ही काम करते पाए गए। सरकारी धन को हड़पने के लिए सचिव और प्रधान ने उन मजदूरों के नाम का भी उपयोग किया जो कभी कार्यस्थल पर मौजूद ही नहीं थे। सालों से एक ही ब्लॉक में जमे कर्मचारी इस पूरे खेल को खुला संरक्षण दे रहे हैं।
ऐप की चेतावनी को दरकिनार कर किया भुगतान
Hamirpur मनरेगा में पारदर्शिता के लिए बनाए गए NMMS (National Mobile Monitoring System) ऐप के नियमों की भी जमकर धज्जियां उड़ाई गईं। ऐप में “Second Photo Not Uploaded” (दूसरी फोटो अपलोड नहीं हुई) की चेतावनी आने के बावजूद, जिम्मेदार अधिकारियों ने नियमों को ताक पर रखकर भुगतान की प्रक्रिया को हरी झंडी दे दी। तकनीकी बाधाओं और नियमों को दरकिनार कर किया गया यह भुगतान सीधे तौर पर भ्रष्टाचार की पुष्टि करता है।
मिलीभगत से चल रहा सरकारी खजाने पर डाका
Hamirpur क्षेत्रीय ग्रामीणों का आरोप है कि डीसी मनरेगा से लेकर ब्लॉक स्तर के कर्मचारियों तक इस लूट में शामिल हैं। बिना काम किए मजदूरी का पैसा निकालना और फर्जी मस्टररोल भरना यहां की कार्यप्रणाली बन चुका है। नियमों के उल्लंघन और सरकारी धन की इस बेखौफ लूट ने जिले के प्रशासनिक तंत्र पर बड़े सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। अब देखना यह है कि उच्चाधिकारी इन ‘सफेदपोश’ भ्रष्टाचारियों पर क्या कार्रवाई करते हैं।
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