Sehore: शिक्षा व्यवस्था की बड़ी लापरवाही, शासकीय स्कूल में फर्जी हाजिरी कांड उजागर

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रिपोर्ट: प्रेम राय

Sehore: जिले की शिक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर देने वाला बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। शासकीय प्राथमिक विद्यालय भंडेली में पदस्थ शाला प्रभारी राजेंद्र सिंह पर आरोप है कि वे लंबे समय से स्कूल में मौजूद हुए बिना ही रजिस्टर में अपनी हाजिरी लगा रहे थे। एडवांस में उपस्थिति दर्ज करने का यह मामला न केवल गंभीर अनियमितता है, बल्कि बच्चों की पढ़ाई और सरकारी तंत्र की विश्वसनीयता पर भी गहरा प्रहार है।

9 दिसंबर को फैली सच की परतें

9 दिसंबर को जब टीम विद्यालय भंडेली पहुंची तो स्थिति हैरान करने वाली थी। उस दिन शाला प्रभारी राजेंद्र सिंह स्कूल में मौजूद ही नहीं थे, जबकि उपस्थिति रजिस्टर में न केवल 9 दिसंबर, बल्कि अगले दिन 10 दिसंबर की भी हाजिरी पहले से दर्ज पाई गई। इससे साफ हो गया कि फर्जी तरीके से उपस्थिति दर्ज करने का खेल नियमित रूप से चल रहा था।

शाला में मौजूद शिक्षक ने खोली पोल

शाला में उपस्थित शिक्षक चंदर सिंह परमार ने बताया कि यह कोई पहली बार नहीं हुआ है। राजेंद्र सिंह अक्सर रजिस्टर में फर्जी हाजिरी लगाकर स्कूल से गायब रहते हैं। इससे बच्चों की पढ़ाई लगातार प्रभावित हो रही है और स्कूल में शैक्षणिक वातावरण पूरी तरह कमजोर पड़ गया है। परमार ने स्पष्ट कहा कि जब प्रभारी शिक्षक ही स्कूल में उपस्थित नहीं होंगे तो बाकी शिक्षक और छात्रों में अनुशासन कैसे कायम रहेगा? यह सीधे-सीधे शिक्षा की गुणवत्ता पर चोट है।

DEO को दी गई तत्काल शिकायत

जब स्कूल में यह अनियमितता पकड़ी गई तो मौके पर मौजूद शिक्षक ने तत्काल जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) को फोन पर पूरी घटना की जानकारी दी। शिकायत सुनने के बाद DEO ने तुरंत निर्देश दिए कि विद्यालय का पूरा उपस्थिति रजिस्टर संकुल केंद्र में जमा कराया जाए, ताकि मामले की विस्तृत जांच की जा सके। अब यह मामला शिक्षा विभाग की निगरानी में आ चुका है और प्रारंभिक स्तर पर कार्रवाई की तैयारी भी चल रही है।

जिले की शिक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल

यह पूरा प्रकरण कई गंभीर सवाल खड़े करता है—

  • जब एक स्कूल का प्रभारी ही सिस्टम से खिलवाड़ करेगा तो बच्चों की पढ़ाई कौन संभालेगा?
  • शिक्षा विभाग की मॉनिटरिंग व्यवस्था इतनी कमजोर कैसे हो गई कि महीनों तक एडवांस हाजिरी का खेल चलता रहा?
  • सरकारी विद्यालयों की उपस्थिति एवं अनुशासन व्यवस्था आखिर कहां फेल हो रही है?

स्थानीय लोगों का कहना है कि यह मामला भंडेली शाला तक सीमित नहीं है; कई स्कूलों में इसी तरह की लापरवाही देखने को मिलती है। यदि समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह अव्यवस्थित हो जाएगी।

1724 शिक्षकों की सैलरी रोकी गई—DEO की बड़ी कार्रवाई

इसी बीच एक अन्य अहम जानकारी भी सामने आई है। जिला शिक्षा अधिकारी संजय सिंह तोमर ने बताया कि जिले में 1724 शिक्षकों की सैलरी रोकी गई है। इसका कारण यह है कि इन शिक्षकों ने समय पर ई-अटेंडेंस दर्ज नहीं की थी।

यह दर्शाता है कि शिक्षा विभाग अब उपस्थिति को लेकर सख्त रुख अपना रहा है, ताकि स्कूलों में फर्जी हाजिरी और अनुपस्थित रहने की आदत पर अंकुश लगाया जा सके।

प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी निगाहें

भंडेली स्कूल में सामने आए इस मामले ने पूरे जिले में शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता पर गहरा सवाल खड़ा कर दिया है। अब सभी की निगाहें प्रशासन और शिक्षा विभाग की कार्रवाई पर टिकी हैं। यदि इस मामले में कठोर कदम उठाए जाते हैं, तो यह प्रदेश भर के शिक्षकों के लिए एक कड़ा संदेश साबित होगा। फिलहाल जांच जारी है और उम्मीद की जा रही है कि दोषी के खिलाफ जल्द ही विभागीय कार्रवाई की जाएगी, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

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