BY: Yoganand Shrivastva
उज्जैन: स्थित श्री महाकालेश्वर मंदिर में भगवान महाकाल को अर्पित की जाने वाली भारी-भरकम फूल मालाओं पर अब पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया है। मंदिर प्रशासन ने यह फैसला शिवलिंग के संरक्षण को ध्यान में रखते हुए लिया है। मंदिर प्रशासक के आदेश के अनुसार 1 जनवरी 2026 से 10 किलो से अधिक वजनी ‘अजगर माला’ और बड़ी मुण्डमाल भगवान को चढ़ाने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
मंदिर समिति ने इस संबंध में पहले से ही मंदिर परिसर में लगातार उद्घोषणा शुरू कर दी है, ताकि श्रद्धालुओं को नए नियम की जानकारी समय रहते मिल सके। इसके साथ ही मंदिर परिसर और आसपास फूल-प्रसाद की दुकानों को भी निर्देश दे दिए गए हैं कि वे भारी और बड़ी मालाओं का निर्माण और विक्रय न करें।
अब तक श्रद्धालु 500 से लेकर 2100 रुपए तक की कीमत वाली इन भारी अजगर मालाओं को खरीदकर भगवान महाकाल को अर्पित करते थे। यह मालाएं 10 से 15 किलो तक वजन की होती थीं, जिन्हें पुजारी के माध्यम से शिवलिंग पर चढ़ाया जाता था। लेकिन विशेषज्ञों की सलाह के बाद यह निर्णय लिया गया है कि भारी मालाओं से शिवलिंग को नुकसान पहुंच रहा है।
नया नियम लागू होने के बाद मंदिर के सभी प्रमुख द्वारों पर तैनात सुरक्षाकर्मी श्रद्धालुओं की पूजन सामग्री की जांच करेंगे। यदि कोई भक्त भारी फूल माला लेकर पहुंचेगा तो उसे प्रवेश द्वार पर ही रोक दिया जाएगा और वह माला अलग रखवा दी जाएगी।
दरअसल, सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) और भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (जीएसआई) की टीम ने महाकाल ज्योतिर्लिंग के क्षरण की जांच की थी। जांच में यह सामने आया कि अत्यधिक वजन वाली मालाएं और अत्यधिक जलाभिषेक से शिवलिंग की प्राकृतिक संरचना को नुकसान हो रहा है। इसी आधार पर विशेषज्ञों ने हल्की माला और सीमित मात्रा में फूल अर्पित करने की सिफारिश की थी।
मंदिर समिति का कहना है कि यह फैसला आस्था के विरुद्ध नहीं, बल्कि भगवान महाकाल के ज्योतिर्लिंग की दीर्घकालिक सुरक्षा के लिए लिया गया है, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी सुरक्षित रूप से दर्शन कर सकें।





