BY: Yoganand Shrivastva
भोपाल। आईएएस अधिकारी और अजाक्स से जुड़े संतोष वर्मा का एक नया वीडियो सामने आने के बाद विवाद फिर गहरा गया है। इस वीडियो में वे कहते हुए दिखाई दे रहे हैं कि “तुम कितने संतोष वर्मा को मारोगे, जलाओगे, निगल जाओगे, अब हर घर से एक संतोष वर्मा निकलेगा।” हालांकि वीडियो का पूरा संदर्भ स्पष्ट नहीं हो सका है और यह भी पता नहीं चल पाया है कि यह कहां और कब रिकॉर्ड किया गया था।
इस पर प्रतिक्रिया देते हुए संतोष वर्मा ने सफाई दी है कि यह कथन उनका नहीं, बल्कि नगीना से सांसद चंद्रशेखर आज़ाद रावण का है, जिसे वे एक निजी बैठक के दौरान अपने साथियों को समझा रहे थे। वर्मा का कहना है कि यह वीडियो संघ की आंतरिक बैठक का है और इसमें कुछ भी आपत्तिजनक नहीं कहा गया है।
ब्राह्मण समाज का आक्रोश, आंदोलन की चेतावनी
वर्मा के पुराने विवादित बयान और अब नए वीडियो के सामने आने के बाद ब्राह्मण संगठनों में नाराजगी और बढ़ गई है। अखिल भारतीय ब्राह्मण समाज के नेता पुष्पेंद्र मिश्रा ने सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि ब्राह्मण बेटियों को लेकर दिए गए बयान के बावजूद अब तक कोई सख्त कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द एफआईआर और कठोर कदम नहीं उठाए गए, तो ब्राह्मण समाज सड़कों पर उतरने को मजबूर होगा।

सरकार ने अजाक्स अध्यक्ष मानने से किया इनकार
इस विवाद के बीच मध्य प्रदेश सरकार ने स्पष्ट किया है कि वह संतोष वर्मा को अजाक्स का प्रांताध्यक्ष नहीं मानती। विधानसभा के शीतकालीन सत्र में सामान्य प्रशासन विभाग ने बताया कि अजाक्स के वर्तमान प्रांताध्यक्ष मुकेश मौर्य हैं। रजिस्ट्रार फर्म्स एंड सोसायटी के अनुसार, अजाक्स का पंजीकरण वर्ष 1993 में हुआ था और धारा-27 के तहत नवंबर 2025 में दी गई जानकारी में अध्यक्ष के रूप में मुकेश मौर्य का नाम दर्ज है।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि अधिकारी-कर्मचारी संघों की कार्यकारिणी की वैधानिकता का कोई औपचारिक परीक्षण अधिनियम में निर्धारित नहीं है।
मुकेश मौर्य पर वर्मा का पलटवार
सरकार द्वारा मुकेश मौर्य को अध्यक्ष बताए जाने पर संतोष वर्मा ने उन्हें “फर्जी” करार दिया और पूरे मामले की जांच की मांग की है। उनका कहना है कि अध्यक्ष पद से जुड़े दस्तावेजों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
विवाद की जड़: 23 नवंबर का बयान
दरअसल, 23 नवंबर को भोपाल के अंबेडकर मैदान में हुए अजाक्स के प्रांतीय अधिवेशन में संतोष वर्मा को अध्यक्ष चुने जाने का दावा किया गया था। इसी मंच से उन्होंने ब्राह्मण बेटियों को लेकर एक बेहद विवादित बयान दिया था, जिसके बाद पूरे प्रदेश में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली थी।
सरकार का नोटिस और कार्रवाई की तैयारी
विवादित बयान के बाद राज्य सरकार ने 26 नवंबर को संतोष वर्मा को नोटिस जारी कर सात दिन में जवाब मांगा था। नोटिस में कहा गया कि उनका बयान अखिल भारतीय सेवा आचरण नियम 1967 का उल्लंघन है और इसे गंभीर कदाचार की श्रेणी में माना गया है। जवाब संतोषजनक न होने की स्थिति में एकपक्षीय अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।
कुल मिलाकर, संतोष वर्मा का नया वीडियो सामने आने के बाद मामला एक बार फिर राजनीतिक और सामाजिक रूप से गर्मा गया है, वहीं अब सबकी नजर सरकार की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है।





