Report: Rupesh kumar daas
हजारीबाग: जिले का इचाक प्रखंड कृषि प्रधान क्षेत्र है. यह क्षेत्र आलू की खेती के लिए मशहूर है. पिछले साल लगभग 200 करोड़ रुपए का व्यापार इस प्रखंड से हुआ था, लेकिन इस बार मौसम ने साथ नहीं दिया है फिर भी किसान 100 करोड़ रुपए से ज्यादा का व्यापार होने का अनुमान लगा रहे हैं. यह प्रारंभिक समय का अनुमान है. आलू एक ऐसी सब्जी है, जिसकी मांग सालभर रहती है. क्योंकि बिना आलू के सब्जी अधूरी मानी जाती है. शायद यही वजह है कि आलू की मांग हमेशा बनी रहती है.
आलू खरीदी के लिए दूसरे राज्यों से आते हैं व्यापारी
हजारीबाग के इचाक प्रखंड के आलू का स्वाद पूरे देश में अपनी अलग पहचान रखता है. यहां आलू की मांग ऐसी है कि दूर दराज से व्यापारी पहुंचते हैं और किसान से उत्पाद खरीदते हैं. इस बार भी आलू, खेत में तैयार है. किसान, आलू निकालने के काम में जुटे हैं. किसान इसके लिए मजदूरों की भी मदद ले रहे हैं क्योंकि आने वाले 15 दिनों तक व्यापारी गांव पहुंचेंगे. आलू खरीदने के लिए व्यापारी मुख्य रूप से बिहार, पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश से यहां पहुंचते हैं.
5 हजार एकड़ में आलू की खेती
यहां के किसान बताते हैं कि इचाक प्रखंड में 98 रेवेन्यू विलेज है. हर गांव में 100 एकड़ से अधिक आलू की खेती होती है. इस बार उम्मीद जताई जा रही है कि 5000 एकड़ से अधिक जमीन में यहां आलू की खेती की गई है. यहां किसान कम जमीन पर भी आलू की खेती कर लेते हैं. आलू की फसल भी यहां अच्छी होती है. यही वजह है कि 100 करोड़ से अधिक का व्यापार यहां के किसान कर लेते हैं.
जमीन से आलू निकालने में जुटे किसान
इस बार मौसम की मार के चलते आलू की फसल प्रभावित हुई है. फिर भी किसान अपनी कड़ी मेहनत से आलू की खेती खूब कर रहे हैं. जिसके चलते किसानों के खेत आलू की फसल से भरी हुई है. सुबह से लेकर देर शाम तक किसान आलू निकालकर बोरे में डालते हैं. दिनभर व्यापारियों का आने-जाने का सिलसिला रहता है. कई ऐसे व्यापारी हैं, जो फोन से ही अपना काम पूरा कर लेते हैं. इचाक को आलू का ‘मिनी कटोरा’ कहा जाए तो यह गलत भी नहीं होगा. दरअसल, इचाक के आलू का स्वाद ही ऐसा होता है कि इसकी मांग सबसे अधिक होती है. यही कारण है कि खरीदार मुंह मांगे पैसे देते हैं. यह पूरे देश में बिकता है. इचाक के आलू की मांग सालभर रहती है.





