by: vijay nandan
बालाघाट: मध्य प्रदेश के बालाघाट ज़िले में नक्सल विरोधी अभियान को बड़ी सफलता मिली है। जिले के इतिहास में पहली बार 10 नक्सलियों ने सामूहिक आत्मसमर्पण किया है। इनमें 77 लाख रुपए के इनामी हार्डकोर नक्सली कबीर उर्फ महेंद्र का नाम भी शामिल है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मंगलवार दोपहर 3 बजे बालाघाट पहुंचेंगे, जहां ये सभी नक्सली उनके सामने औपचारिक रूप से अपने हथियार सौंपेंगे।
कबीर सहित 10 नक्सली मुख्यधारा में लौटेंगे
आत्मसमर्पण करने वालों में केबी (कान्हा-भोरमदेव) डिवीजन के लीडर कबीर और उसके नौ साथी शामिल हैं। इनमें 6 पुरुष और 4 महिला नक्सली हैं। कबीर एमएमसी जोन में सबसे सक्रिय और वांटेड नक्सली माना जाता था। पुलिस सूत्रों के अनुसार, सभी आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को पुलिस लाइन में सुरक्षित रखा गया है। पुलिस ने बताया कि नक्सलियों ने यह कदम राज्य की आत्मसमर्पण और पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर उठाया है। प्रदेश सरकार की रणनीति के तहत मार्च 2026 तक नक्सलवाद खत्म करने का लक्ष्य रखा गया है।

हाल के महीनों में जंगलों में सुरक्षा बलों की मजबूत उपस्थिति, बढ़ती दबिश और लगातार चल रहे ऑपरेशनों के कारण नक्सली कमजोर पड़ रहे हैं। इसी दबाव और बातचीत की पहल के चलते इन 10 नक्सलियों ने हिंसा छोड़ने का फैसला किया।
छत्तीसगढ़ सीमा पर मुठभेड़ के बाद लिया फैसला
शनिवार को लांजी के माहिरखुदरा इलाके, जो छत्तीसगढ़ की सीमा से लगता है, में पुलिस-नक्सली मुठभेड़ हुई थी। इसके कुछ ही घंटों बाद, रात करीब 10 बजे, इन नक्सलियों ने बालाघाट में आत्मसमर्पण कर दिया। इससे पहले 1 नवंबर को भी एक महिला नक्सली सुनीता ने मध्य प्रदेश की नीति से प्रभावित होकर हथियार डाले थे।
महिला नक्सलियों में भी बढ़ रही आत्मसमर्पण की प्रवृत्ति
बालाघाट और मंडला में पिछले महीनों में कई अभियानों के बाद पुलिस का मनोबल बढ़ा है। सुनीता के आत्मसमर्पण के बाद पुलिस ने नक्सल प्रभावित इलाकों में जनजागरण अभियान और तेज कर दिया था, जिसके अच्छे परिणाम सामने आए हैं।





