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जोमैटो बनाम जेप्टो: 5 साल के बच्चे ने दीपिंदर गोयल को कैसे दी चुनौती? सच्चाई चौंकाने वाली!

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जोमैटो बनाम जेप्टो

मुख्य बिंदु:

  • जेप्टो के सीईओ का जवाब: जेप्टो के सह-संस्थापक और सीईओ आदित पालिचा ने जोमैटो के संस्थापक दीपिंदर गोयल के उस दावे का खंडन किया, जिसमें कहा गया था कि जेप्टो हर तिमाही में 2,500 करोड़ रुपये से अधिक खर्च कर रहा है।
  • लिंक्डइन पोस्ट में खुलासा: पालिचा ने अपनी लिंक्डइन पोस्ट में लिखा कि यह दावा पूरी तरह गलत है और कंपनी के वित्तीय विवरण सार्वजनिक होने पर सच्चाई सामने आ जाएगी।
  • दीपिंदर गोयल के प्रति सम्मान: पालिचा ने कहा कि वह दीपिंदर गोयल को एक उद्यमी के रूप में सम्मान करते हैं और मानते हैं कि यह बयान गलत संदर्भ में लिया गया हो या अनजाने में गलती से कहा गया हो।
  • उम्र का अंतर: पालिचा ने यह भी बताया कि जब दीपिंदर ने 2008 में जोमैटो शुरू किया था, तब वह केवल 5 साल के थे।

विवाद की शुरुआत:

  • दीपिंदर गोयल का बयान: इकोनॉमिक टाइम्स को दिए एक साक्षात्कार में गोयल ने कहा था कि भारत में क्विक कॉमर्स सेक्टर हर तिमाही में 5,000 करोड़ रुपये खर्च कर रहा है, जिसमें से आधे से अधिक जेप्टो की हिस्सेदारी है।
  • जोमैटो की स्थिति: गोयल ने यह भी दावा किया कि उनकी कंपनी ब्लिंकिट इस राशि का केवल 2-3% ही खर्च कर रही है।

पालिचा का स्पष्टीकरण:

  • गलत दावे पर आपत्ति: पालिचा ने लिखा, “दीपिंदर ने कहा कि क्विक कॉमर्स में 5,000 करोड़ रुपये की बर्बादी हो रही है, जिसमें जेप्टो का हिस्सा आधे से ज्यादा है। यह दावा सत्य नहीं है।”
  • सम्मान और सहयोग की भावना: उन्होंने आगे कहा कि वह गोयल को एक प्रेरणास्रोत मानते हैं और भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम को मिलकर बेहतर बनाने की इच्छा रखते हैं।

दोनों कंपनियों का सफर:

  • जोमैटो की स्थापना: दीपिंदर गोयल और पंकज चड्ढा ने 2008 में जोमैटो की शुरुआत की, जिसे शुरू में ‘फूडीबे’ नाम से जाना जाता था। 2010 में इसका नाम बदलकर जोमैटो कर दिया गया।
  • जेप्टो की शुरुआत: आदित पालिचा और कैवल्य वोहरा ने 2021 में जेप्टो की स्थापना की। दोनों ने स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी से पढ़ाई छोड़कर इस स्टार्टअप पर ध्यान केंद्रित किया।

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