Uttarakhand Geothermal Energy : उत्तराखंड में जियोथर्मल एनर्जी का नया अध्याय
Uttarakhand Geothermal Energy : उत्तराखंड अब जल विद्युत और सौर ऊर्जा के साथ-साथ धरती के भीतर मौजूद गर्मी से बिजली उत्पादन की दिशा में भी आगे बढ़ रहा है। Uttarakhand Geothermal Energy को लेकर राज्य में कई महत्वपूर्ण पहल शुरू की गई हैं। चमोली के तपोवन और उत्तरकाशी के गंगनानी में जियोथर्मल ऊर्जा से बिजली उत्पादन की संभावनाओं पर काम तेजी से आगे बढ़ रहा है।
राज्य सरकार का लक्ष्य है कि प्राकृतिक गर्म पानी के स्रोतों और धरती के भीतर मौजूद तापीय ऊर्जा का वैज्ञानिक तरीके से इस्तेमाल कर स्वच्छ ऊर्जा के नए विकल्प विकसित किए जाएं। इससे उत्तराखंड के ऊर्जा क्षेत्र को भविष्य में एक नई दिशा मिलने की उम्मीद है।
Uttarakhand Geothermal Energy : तपोवन में अध्ययन शुरू
चमोली जिले के तपोवन क्षेत्र में गर्म पानी के प्राकृतिक स्रोतों से बिजली उत्पादन की संभावनाओं का अध्ययन किया जा रहा है। उत्तराखंड जल विद्युत निगम लिमिटेड यानी UJVNL ने इस दिशा में एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है।
ड्रिलिंग का काम शुरू करने से पहले संबंधित क्षेत्र की भूगर्भीय और तकनीकी परिस्थितियों का अध्ययन किया जा रहा है। विशेषज्ञ यह पता लगाने में जुटे हैं कि जमीन के नीचे उपलब्ध तापीय ऊर्जा का व्यावसायिक स्तर पर इस्तेमाल किस तरह किया जा सकता है।
शुरुआती अनुमान के मुताबिक तपोवन क्षेत्र में करीब 3 मेगावाट बिजली उत्पादन की संभावना देखी जा रही है। हालांकि अंतिम क्षमता का निर्धारण विस्तृत तकनीकी अध्ययन और आगे होने वाली ड्रिलिंग के बाद ही स्पष्ट होगा।
Uttarakhand Geothermal Energy : गंगनानी में 10 मेगावाट जियोथर्मल प्रोजेक्ट की संभावना
उत्तरकाशी के गंगनानी में भी जियोथर्मल बिजली परियोजना को लेकर काम आगे बढ़ चुका है। इसे प्रदेश की पहली प्रस्तावित जियोथर्मल विद्युत परियोजनाओं में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
गंगनानी परियोजना के लिए आइसलैंड की कंपनी वर्किस ने UJVNL को इनीशियल प्रोजेक्ट रिपोर्ट सौंप दी है। रिपोर्ट के आधार पर परियोजना की तकनीकी और व्यावहारिक संभावनाओं को आगे परखा जा रहा है।
प्रारंभिक स्तर पर गंगनानी में करीब 10 मेगावाट बिजली उत्पादन की संभावना जताई गई है। परियोजना के आगे बढ़ने के साथ इसकी तकनीकी क्षमता और निर्माण से जुड़े अन्य पहलुओं पर विस्तृत काम किया जाएगा।
Uttarakhand Geothermal Energy Policy : राज्य ने बनाई अलग पहचान
जियोथर्मल एनर्जी के क्षेत्र में उत्तराखंड की पहल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि राज्य ने इस क्षेत्र के लिए अपनी नीति के जरिए आगे बढ़ने का प्रयास किया है। सरकार का जोर ऐसे ऊर्जा स्रोत विकसित करने पर है जो पर्यावरण के लिहाज से अपेक्षाकृत स्वच्छ हों और भविष्य में ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में मदद कर सकें।
जियोथर्मल ऊर्जा में धरती के भीतर मौजूद प्राकृतिक गर्मी का इस्तेमाल किया जाता है। जहां गर्म पानी या भाप के स्रोत पर्याप्त तापमान और दबाव में उपलब्ध होते हैं, वहां तकनीकी प्रक्रिया के जरिए बिजली उत्पादन की संभावनाएं विकसित की जा सकती हैं।
Uttarakhand Geothermal Energy : राज्य में 90 से अधिक जियोथर्मल क्षेत्र चिन्हित
उत्तराखंड में जियोथर्मल ऊर्जा की संभावनाओं वाले 90 से अधिक क्षेत्रों को चिन्हित किए जाने की जानकारी सामने आई है। इन क्षेत्रों में भविष्य में चरणबद्ध तरीके से अध्ययन और परियोजनाओं की संभावनाओं पर काम किया जा सकता है।
पहले चरण में तपोवन और गंगनानी जैसे क्षेत्रों पर फोकस किया जा रहा है। इन शुरुआती परियोजनाओं से मिलने वाले तकनीकी अनुभव के आधार पर राज्य के दूसरे संभावित जियोथर्मल क्षेत्रों को भी विकसित करने की योजना बनाई जा सकती है।
Uttarakhand Geothermal Energy : ड्रिलिंग और DPR के लिए 3 करोड़ रुपये का प्रावधान
जियोथर्मल परियोजनाओं को शुरुआती स्तर से आगे ले जाने के लिए ड्रिलिंग और विस्तृत परियोजना रिपोर्ट यानी DPR तैयार करने पर भी जोर दिया जा रहा है। इसके लिए राज्य सरकार की ओर से करीब 3 करोड़ रुपये आवंटित किए जाने की बात कही गई है।
ड्रिलिंग इस पूरी प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है, क्योंकि इससे जमीन के भीतर तापमान, जल स्रोत और ऊर्जा की उपलब्धता से संबंधित वास्तविक परिस्थितियों की जानकारी मिल सकेगी। इसके बाद ही किसी क्षेत्र में बड़े स्तर पर बिजली उत्पादन की व्यवहारिकता का आकलन किया जा सकेगा।
Uttarakhand Geothermal Energy : स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा
जियोथर्मल एनर्जी को स्वच्छ ऊर्जा के संभावित स्रोतों में गिना जाता है। उत्तराखंड जैसे हिमालयी राज्य के लिए इसके विकास से ऊर्जा के क्षेत्र में विविधता बढ़ सकती है। फिलहाल राज्य की ऊर्जा व्यवस्था में जल विद्युत की महत्वपूर्ण भूमिका है, लेकिन जलवायु और भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए ऊर्जा के अन्य स्रोतों को विकसित करना भी जरूरी माना जा रहा है।
जियोथर्मल ऊर्जा परियोजनाएं सफल होती हैं तो इससे स्थानीय स्तर पर बिजली उत्पादन के नए विकल्प विकसित हो सकते हैं। साथ ही राज्य में उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों के वैज्ञानिक और तकनीकी इस्तेमाल को भी बढ़ावा मिलेगा।
Uttarakhand Geothermal Energy : UJVNL और आइसलैंड की कंपनी के सहयोग से आगे बढ़ेगा काम
उत्तराखंड जल विद्युत निगम लिमिटेड जियोथर्मल ऊर्जा परियोजनाओं को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। गंगनानी परियोजना के लिए आइसलैंड की कंपनी वर्किस के साथ तकनीकी सहयोग की दिशा में काम किया जा रहा है।
आइसलैंड जियोथर्मल ऊर्जा के इस्तेमाल के लिए दुनिया के प्रमुख देशों में शामिल है। ऐसे में वहां की विशेषज्ञता और तकनीकी अनुभव से उत्तराखंड की परियोजनाओं को लाभ मिलने की उम्मीद है।
Uttarakhand Geothermal Energy : भविष्य में ऊर्जा क्षेत्र में मील का पत्थर बन सकती है जियोथर्मल एनर्जी
उत्तराखंड सरकार जियोथर्मल ऊर्जा को भविष्य के वैकल्पिक ऊर्जा स्रोत के रूप में देख रही है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य में स्वच्छ और वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों को बढ़ावा देने की दिशा में कई स्तरों पर प्रयास किए जा रहे हैं।
तपोवन और गंगनानी की शुरुआती परियोजनाओं के परिणाम आने के बाद राज्य के अन्य चिन्हित क्षेत्रों में भी काम का विस्तार किया जा सकता है। यदि तकनीकी और आर्थिक स्तर पर परियोजनाएं सफल रहती हैं, तो Uttarakhand Geothermal Energy उत्तराखंड के ऊर्जा क्षेत्र में महत्वपूर्ण बदलाव का आधार बन सकती है।
धरती के भीतर छिपी गर्मी को बिजली में बदलने की यह पहल हिमालयी राज्य के लिए ऊर्जा के एक नए अध्याय की शुरुआत है। आने वाले वर्षों में इसके परिणाम यह तय करेंगे कि उत्तराखंड जियोथर्मल ऊर्जा के क्षेत्र में देश के लिए कितना बड़ा मॉडल बन पाता है।
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