BY: Yoganand Shrivastva
Xi Jinping India Visit भारत की मेजबानी में होने वाले 18वें ब्रिक्स लीडर्स समिट में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के शामिल होने की पुष्टि आखिरी समय में हुई। गुरुवार को दिनभर चली अटकलों के बाद चीन ने आधिकारिक तौर पर बताया कि जिनपिंग नई दिल्ली में होने वाले सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। यह घोषणा मुख्य कार्यक्रम शुरू होने से करीब 48 घंटे पहले की गई। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि चीन ने जिनपिंग की भारत यात्रा को इतनी देर तक सार्वजनिक क्यों नहीं किया।
आखिरी समय तक जानकारी रोकना चीन की कूटनीतिक रणनीति
Xi Jinping India Visit शी जिनपिंग करीब सात साल बाद भारत दौरे पर आ रहे हैं। इससे पहले 2019 में महाबलीपुरम में दोनों देशों के बीच अनौपचारिक शिखर वार्ता हुई थी। विशेषज्ञों के मुताबिक, इस बार यात्रा की पुष्टि में देरी केवल यात्रा या प्रशासनिक तैयारियों से जुड़ी नहीं थी, बल्कि इसके पीछे कूटनीतिक रणनीति भी हो सकती है।
Xi Jinping India Visit चीन मामलों के विशेषज्ञ और डिफेंस एनालिस्ट लेफ्टिनेंट कर्नल (रि.) जेएस सोढ़ी के अनुसार, बीजिंग महत्वपूर्ण कूटनीतिक कदमों को लेकर अपने विकल्प खुले रखना पसंद करता है। उनका कहना है कि देर से घोषणा करना चीन की बहुपक्षीय कूटनीति का हिस्सा हो सकता है, जिससे वह बातचीत के दौरान अपनी स्थिति मजबूत रखने और परिस्थितियों के अनुसार फैसले लेने की गुंजाइश बनाए रखता है।
भारत और चीन के रिश्ते लंबे समय से जटिल रहे हैं। ऐसे में जिनपिंग की यात्रा को लेकर बीजिंग का सतर्क रुख भी इसी संवेदनशीलता से जुड़ा माना जा रहा है।
मोदी-जिनपिंग बातचीत और साइडलाइन बैठक पर नजर
Xi Jinping India Visit विशेषज्ञों के मुताबिक, यात्रा की घोषणा को अंतिम समय तक रोकने से चीन को ब्रिक्स सम्मेलन से पहले होने वाली कूटनीतिक बातचीत में कुछ अतिरिक्त गुंजाइश मिल सकती थी। खास तौर पर नई दिल्ली घोषणापत्र से जुड़े मसौदे और शिखर सम्मेलन से पहले की चर्चाओं में बीजिंग अपने रुख को परिस्थितियों के अनुसार आगे बढ़ा सकता था।
Xi Jinping India Visit प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शी जिनपिंग के बीच संभावित साइडलाइन बैठक को लेकर भी इस देरी को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि इससे चीन को बातचीत के मुद्दों और संभावित शर्तों को लेकर अपनी रणनीति तैयार करने का अतिरिक्त समय मिला होगा। हालांकि, भारत किसी दबाव वाली शर्त को स्वीकार करेगा, इसकी संभावना बेहद कम मानी जा रही है।
दौरे की आधिकारिक पुष्टि देर से करने का एक फायदा यह भी हो सकता है कि ब्रिक्स की मुख्य चर्चा आर्थिक और वैश्विक शासन जैसे बहुपक्षीय मुद्दों पर केंद्रित रहे और भारत-चीन संबंधों से जुड़े किसी संवेदनशील मुद्दे की वजह से सम्मेलन का एजेंडा प्रभावित न हो।
सुरक्षा प्रोटोकॉल और ग्लोबल साउथ में चीन की भूमिका
Xi Jinping India Visit चीन अपने शीर्ष नेताओं की विदेश यात्राओं की जानकारी कई पश्चिमी देशों की तुलना में अलग तरीके से सार्वजनिक करता है। जहां कुछ देशों में राष्ट्राध्यक्षों के विदेश दौरे का कार्यक्रम काफी पहले जारी कर दिया जाता है, वहीं बीजिंग अक्सर यात्रा से कुछ समय पहले ही आधिकारिक जानकारी देता है। इसके पीछे सुरक्षा, लॉजिस्टिक्स, एयरस्पेस और अन्य प्रोटोकॉल की तैयारियां भी एक कारण हो सकती हैं।
चीन के बड़े कूटनीतिक कार्यक्रमों को भी इस देरी से जोड़कर देखा जा रहा है। अंतिम समय तक आधिकारिक घोषणा रोकने से बीजिंग को अलग-अलग वैश्विक मंचों पर अपने रुख को लेकर अधिक विकल्प मिलते हैं और वह जल्दबाजी में किसी प्रतिबद्धता से बच सकता है।
वहीं, विस्तारित ब्रिक्स में पश्चिमी एशिया और अफ्रीका की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं की भागीदारी के बीच जिनपिंग की मौजूदगी चीन के लिए ‘ग्लोबल साउथ’ के साथ अपनी भूमिका को मजबूत तरीके से पेश करने का अवसर भी है। रूस, ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका और अन्य आमंत्रित देशों के नेताओं के साथ मंच साझा करके चीन नई दिल्ली में अपनी बहुपक्षीय सक्रियता का संदेश देना चाहता है।
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