Report: Prem Shrivastva
Sarna Religion दिसोम जाहेरथान, करनडीह में माझी पारगना माहाल पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था धाड़ दिशोम की महत्वपूर्ण बैठक देश परगना बाबा बैजू मुर्मू की अध्यक्षता में आयोजित हुई। बैठक में एनआईटी जमशेदपुर के एक कार्यक्रम में राष्ट्रीय जनजाति आयोग की सदस्य डॉ. आशा लकड़ा द्वारा सरना को धर्म के बजाय पूजा स्थल बताए जाने के कथित बयान पर समाज के लोगों ने कड़ी आपत्ति जताई।

सरना धर्म को लेकर बयान पर समाज ने जताया विरोध
Sarna Religion बैठक में मौजूद लोगों ने कहा कि सरना धर्म को लेकर इस तरह की टिप्पणी आदिवासी समाज की धार्मिक और सांस्कृतिक मान्यताओं के विपरीत है। समाज के लोगों का कहना था कि शिक्षण संस्थानों में भी किसी समुदाय की धार्मिक पहचान को लेकर इस तरह की व्याख्या किया जाना उचित नहीं है।
Sarna Religion माझी पारगना माहाल के सदस्यों ने कहा कि देश के अलग-अलग हिस्सों में रहने वाले आदिवासी समुदायों की अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराएं हैं। समुदाय लंबे समय से अपनी मान्यताओं और परंपराओं का पालन करते आ रहे हैं। इनमें सरना धर्म को मानने वाले आदिवासियों की संख्या भी बड़ी है। बैठक में कहा गया कि आदिवासी समाज की धार्मिक पहचान को किसी अन्य धर्म के साथ जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए।
2027 की जनगणना में सरना धर्म की पहचान दर्ज कराने की बात
Sarna Religion बैठक के दौरान वक्ताओं ने 2011 की जनगणना का उल्लेख करते हुए कहा कि बड़ी संख्या में आदिवासियों ने अपनी धार्मिक पहचान सरना धर्म के रूप में दर्ज कराई थी। समाज के लोगों ने कहा कि 2027 की जनगणना में भी बड़ी संख्या में आदिवासी सरना धर्म को अपनी धार्मिक पहचान के तौर पर दर्ज कराएंगे।

माझी पारगना माहाल ने केंद्र सरकार से मांग की कि 2027 की जनगणना से पहले सरना धर्म के लिए अलग धर्म कोड की मांग को मान्यता दी जाए। बैठक में यह भी कहा गया कि आदिवासी समाज की धार्मिक मान्यताओं और सरना धर्म को लेकर किसी भी व्यक्ति को अनर्गल बयानबाजी से बचना चाहिए।
बयानबाजी जारी रहने पर कार्रवाई की चेतावनी
Sarna Religion समाज के लोगों ने कहा कि सरना धर्म के खिलाफ आने वाले बयानों को आदिवासी समाज गंभीरता से लेगा। बैठक में चेतावनी दी गई कि यदि इस तरह की बयानबाजी आगे भी जारी रही तो पारंपरिक सामाजिक व्यवस्था के तहत उचित कार्रवाई की जाएगी।
बैठक में हरिपदो मुर्मू, दसमत हांसदा, पुन्ता मुर्मू, लखन मार्डी, देश पारानिक बाबा दुर्गा चरण मुर्मू, नवीन मुर्मू, सुनील सोरेन, गोपाल हांसदा, सुखराम किस्कू, रेंटा मुर्मू, लेदेम मुर्मू, कारू मुर्मू, शंकर हेंब्रोम, विश्वनाथ मार्डी, सालखू सोरेन, जीतू मुर्मू, बिपिन चंद्र मुर्मू, सुशील मुर्मू, वीर सिंह बास्के और सुनील मुर्मू सहित बड़ी संख्या में समाज के लोग मौजूद रहे
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