BY: Yoganand Shrivastva
इस साल भारत में गर्मी ने लोगों को काफी परेशान किया, वहीं मानसून की बारिश ने पहाड़ी और कुछ मैदानी इलाकों में काफी नुकसान पहुँचाया। अब मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि इन दो मौसम की मार झेलने के बाद, देश में कड़ाके की ठंड पड़ने की संभावना है।
मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि इस बार ला नीना (La Niña) की स्थिति विकसित होने के कारण सर्दियों में तापमान सामान्य से कम रह सकता है। अमेरिका की नेशनल वेदर सर्विस के क्लाइमेट प्रेडिक्शन सेंटर के अनुसार, अक्टूबर से दिसंबर के बीच ला नीना बनने की प्रबल संभावना है।
ला नीना क्या है?
ला नीना प्रशांत महासागर के भूमध्यरेखीय हिस्से में समुद्र सतह के तापमान में गिरावट को कहते हैं। यह स्थिति वैश्विक मौसम पैटर्न को प्रभावित करती है और इसके असर से भारत में इस बार कड़ाके की ठंड पड़ सकती है।
मौसम विभाग की जानकारी
भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने अपने बुलेटिन में बताया कि फिलहाल मौसम सामान्य है, लेकिन मॉनसून के बाद ला नीना की संभावना बढ़ सकती है। आईएमडी के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा,
“हमारे मॉडल अक्टूबर से दिसंबर के बीच ला नीना विकसित होने की 50% से अधिक संभावना दिखा रहे हैं। ला नीना के दौरान भारत में सर्दियां सामान्य से ठंडी रहती हैं। हालांकि ग्लोबल वार्मिंग के कारण गर्मी का प्रभाव कुछ हद तक महसूस हो सकता है, लेकिन ठंडी लहरें अधिक तीव्र हो सकती हैं।”
स्काइमेट का अनुमान
स्काइमेट वेदर के अध्यक्ष जीपी शर्मा ने भी चेतावनी दी है कि प्रशांत महासागर का तापमान पहले ही सामान्य से ठंडा है। उन्होंने बताया,
“अगर तापमान -0.5°C से नीचे तीन तिमाहियों तक बना रहता है, तो इसे ला नीना घोषित किया जाएगा। 2024 के अंत में भी ऐसी ही स्थिति बनी थी, जब नवंबर से जनवरी तक अल्पकालिक ला नीना बना था।”
उनके अनुसार इस बार अमेरिका में अपेक्षाकृत सूखी सर्दियां रह सकती हैं, जबकि भारत में अधिक ठंड और हिमालयी क्षेत्रों में भारी बर्फबारी की संभावना है।
शोध और अध्ययन
आईआईएसईआर मोहाली और नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्पेस रिसर्च, ब्राजील के शोध के अनुसार, ला नीना के दौरान उत्तर भारत में ठंडी लहरें लंबी अवधि तक बनी रहती हैं। शोध में बताया गया है कि ला नीना की स्थिति में निचले स्तर पर बनने वाली चक्रीय हवाएं उत्तरी अक्षांशों से ठंडी हवा खींचकर भारत की ओर लाती हैं।





