Report: Ram Yadav
Vidisha Contract Health Workers Strike मध्यप्रदेश के विदिशा जिले में अपनी एक सूत्रीय मुख्य मांग यानी नियमितीकरण (Regularization) को लेकर संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों का विरोध प्रदर्शन लगातार उग्र होता जा रहा है। अपनी विभिन्न लंबित मांगों और अधिकारियों की वादाखिलाफ़ी के खिलाफ लामबंद हुए कर्मचारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल आज तीसरे दिन भी जारी रही। स्वास्थ्य अमले के इस तरह सामूहिक अवकाश और हड़ताल पर चले जाने से जिले की प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य सेवाओं पर अब सीधा असर पड़ना शुरू हो गया है, जिससे मरीजों की परेशानियां बढ़ने लगी हैं।
Vidisha Contract Health Workers Strike ‘सरकार और मंत्री हमारे पक्ष में, लेकिन अधिकारी अड़ा रहे रोड़ा’

हड़ताल पर डटे संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों ने प्रशासनिक व्यवस्था और विभागीय अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। धरने पर बैठे प्रदर्शनकारी कर्मचारियों ने बताया कि विगत कुछ वर्षों में सरकार द्वारा दो से तीन बार उनके हित में नीतियां और ड्राफ्ट तैयार किए गए हैं। सूबे के मुखिया और विभागीय मंत्री भी सैद्धांतिक रूप से संविदा कर्मियों को नियमित करने के पक्ष में हैं, लेकिन मंत्रालय और संचालनालय स्तर पर बैठे आला अधिकारी वर्ग इस नीति को धरातल पर फलीभूत (लागू) नहीं होने दे रहे हैं। नौकरशाही के इसी अड़ियल रवैये के कारण हजारों कर्मचारियों का भविष्य अधर में लटका हुआ है।
Vidisha Contract Health Workers Strike जिला अध्यक्ष की दो टूक: इस बार खोखले दावों से नहीं मानेंगे
संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी संघ के जिला अध्यक्ष ने आंदोलन को लेकर संगठन का रुख पूरी तरह स्पष्ट कर दिया है। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा, “विगत कई सालों से हमें केवल आश्वासनों का झुनझुना थमाया जा रहा है। हर बार हड़ताल के बाद कमेटी बनाने या जल्द आदेश जारी करने की बात कहकर आंदोलन स्थगित करा दिया जाता है। लेकिन इस बार आर-पार की लड़ाई है। जब तक सरकार हमारी मांग की पूर्ति का आधिकारिक आदेश जारी नहीं करती, तब तक यह हड़ताल किसी भी कीमत पर खत्म नहीं होगी।”

Vidisha Contract Health Workers Strike चरमरा सकती हैं विदिशा की स्वास्थ्य सेवाएं
गौरतलब है कि टीकाकरण, मातृ-शिशु स्वास्थ्य, ओपीडी (OPD) प्रबंधन और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के अंतर्गत चलने वाली तमाम महत्वपूर्ण योजनाओं की रीढ़ ये संविदा कर्मचारी ही हैं। हड़ताल के तीसरे दिन भी जारी रहने से ग्रामीण अंचलों के अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित होने लगी हैं। यदि सरकार और संगठन के बीच जल्द ही कोई सकारात्मक बातचीत नहीं होती है, तो आने वाले दिनों में जिले की चिकित्सा व्यवस्था पूरी तरह चरमरा सकती है।





