Gilgit Baltistan: गिलगित-बाल्टिस्तान में प्रस्तावित चुनावों को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच एक बार फिर राजनीतिक और कूटनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। भारत ने पाकिस्तान द्वारा इस क्षेत्र में चुनाव कराने की योजना पर कड़ा विरोध दर्ज कराया है। इसके बाद पाकिस्तान ने भारत की आपत्तियों को अस्वीकार करते हुए अपनी स्थिति दोहराई है।
इस घटनाक्रम के बाद दोनों देशों के बीच इस संवेदनशील क्षेत्र को लेकर बहस फिर चर्चा में आ गई है।
Gilgit Baltistan: पाकिस्तान ने भारत की आपत्तियों को बताया निराधार
पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय की ओर से जारी प्रतिक्रिया में कहा गया कि गिलगित-बाल्टिस्तान से जुड़े मुद्दे पर भारत की टिप्पणियां तथ्यों पर आधारित नहीं हैं। पाकिस्तान का कहना है कि वह इस क्षेत्र में चुनावी प्रक्रिया को लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा मानता है।
पाकिस्तानी अधिकारियों ने यह भी आरोप लगाया कि भारत इस विषय पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय को प्रभावित करने की कोशिश कर रहा है। साथ ही उन्होंने कश्मीर मुद्दे पर अपने पुराने रुख को दोहराते हुए कहा कि इसका समाधान संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों के अनुरूप होना चाहिए।
Gilgit Baltistan: कश्मीर मुद्दे पर फिर दोहराया अपना पक्ष
पाकिस्तान ने अपने बयान में जम्मू-कश्मीर से जुड़े विभिन्न मुद्दों का भी उल्लेख किया। इस दौरान उसने कश्मीर के राजनीतिक भविष्य और वहां की स्थिति को लेकर अपने पुराने दावों को दोहराया।
पाकिस्तानी पक्ष ने एक बार फिर अगस्त 2019 में हुए संवैधानिक बदलावों का जिक्र करते हुए कहा कि वह उन निर्णयों से सहमत नहीं है और इस विषय पर अपना विरोध जारी रखेगा।
Gilgit Baltistan: गिलगित-बाल्टिस्तान में चुनाव की तैयारी
पाकिस्तान के नियंत्रण वाले गिलगित-बाल्टिस्तान क्षेत्र में विधानसभा चुनाव कराने की तैयारी की गई है। स्थानीय विधानसभा की सीटों के लिए मतदान आयोजित किए जाने की योजना है।
रिपोर्टों के अनुसार, विभिन्न राजनीतिक दलों ने क्षेत्र में चुनाव प्रचार अभियान चलाया है और मतदाताओं तक पहुंचने की कोशिश की है। यह क्षेत्र लंबे समय से राजनीतिक और रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है।
Gilgit Baltistan: भारत ने दर्ज कराया कड़ा विरोध
भारत के विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में स्पष्ट कहा है कि गिलगित-बाल्टिस्तान भारत का अभिन्न हिस्सा है और पाकिस्तान का इस क्षेत्र पर नियंत्रण अवैध है। भारत का कहना है कि ऐसे किसी भी चुनाव या प्रशासनिक गतिविधि से क्षेत्र की वास्तविक स्थिति नहीं बदल सकती।
भारतीय पक्ष ने यह भी कहा कि पाकिस्तान को उन क्षेत्रों में किसी प्रकार की राजनीतिक प्रक्रिया आयोजित करने का अधिकार नहीं है, जिन पर उसका कब्जा भारत के अनुसार वैध नहीं माना जाता।
Gilgit Baltistan: पहले भी उठा चुका है भारत यह मुद्दा
यह पहली बार नहीं है जब भारत ने गिलगित-बाल्टिस्तान में चुनावी गतिविधियों का विरोध किया हो। इससे पहले भी पाकिस्तान द्वारा इस क्षेत्र में कराए गए चुनावों और प्रशासनिक बदलावों पर भारत आपत्ति दर्ज कराता रहा है।
नई दिल्ली का लगातार यह रुख रहा है कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख से जुड़े सभी क्षेत्र भारत का अविभाज्य हिस्सा हैं और इन पर किसी अन्य देश का दावा स्वीकार्य नहीं है।
Gilgit Baltistan: गिलगित-बाल्टिस्तान क्यों है महत्वपूर्ण?
गिलगित-बाल्टिस्तान हिमालयी क्षेत्र में स्थित एक रणनीतिक इलाका है, जो भौगोलिक और सामरिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। यह क्षेत्र भारत, पाकिस्तान, चीन और मध्य एशिया के संपर्क क्षेत्र के करीब स्थित है।
यही वजह है कि इस इलाके से जुड़ा कोई भी राजनीतिक या प्रशासनिक कदम अक्सर क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन जाता है।
Gilgit Baltistan: दोनों देशों के रुख में अब भी कायम है मतभेद
गिलगित-बाल्टिस्तान को लेकर भारत और पाकिस्तान के दृष्टिकोण में लंबे समय से मतभेद बने हुए हैं। जहां भारत इसे अपने क्षेत्र का हिस्सा मानता है, वहीं पाकिस्तान इस क्षेत्र में प्रशासनिक और राजनीतिक गतिविधियां संचालित करता रहा है।
ताजा बयानबाजी के बाद एक बार फिर यह मुद्दा दोनों देशों के बीच कूटनीतिक बहस का केंद्र बन गया है और आने वाले दिनों में इस पर और प्रतिक्रियाएं देखने को मिल सकती हैं।





