Exports SEBI Investigation : गोल्ड किंग राजेश मेहता पर सेबी का बड़ा एक्शन ,’सोने का सौदागर’… फ्रॉड कंपनियों से महाफर्जीवाड़ा !
Exports SEBI Investigation : 15 लाख करोड़ की झूठी कमाई, निवेशकों से धोखा, देश से गद्दारी, हम बात कर रहे हैं राजेश एक्सपोर्ट लिमिटेड की जिसका बेहिसाब रेवेन्यू सवालों में हैं। गोल्ड किंग पर सेबी का शिकंजा है जिसने 15.15 लाख करोड़ का बड़ा खेल किया है। शेयरधारक की शिकायत से परतें खुली और दो साल जांच चली जिसके बाद अब ‘सोने का सौदागर’ सेबी की जांच में एक्सपोज हुआ है। देशभर में निवेशकों को बड़े मुनाफे का सपना दिखाने वाली कंपनी गोल्ड किंग राजेश एक्सपोर्ट अब जांच एजेंसियों के रडार पर है। कंपनी पर कथित तौर पर फर्जी कारोबार और झूठे राजस्व आंकड़े दिखाकर निवेशकों को गुमराह करने के आरोप लगे हैं। जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि कंपनी ने वास्तविक कारोबार से कहीं अधिक कमाई दर्शाकर बाजार और निवेशकों के बीच अपनी साख बनाने की कोशिश तो नहीं की। आरोप है कि गोल्ड किंग राजेश ने भारी-भरकम टर्नओवर और मुनाफे के दावे किए, जबकि जमीनी स्तर पर कारोबार की वास्तविकता कुछ और हो सकती है। यदि जांच में वित्तीय अनियमितताएं और दस्तावेजों में हेरफेर साबित होता है, तो कंपनी के प्रमोटरों और जिम्मेदार अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई हो सकती है। अब दुनिया की सबसे बड़ी गोल्ड रिफाइनरी की मालिक कंपनी में बड़ा गोलमाल है और कई सारे सवाल.. इस कंपनी में LIC के अलावा विदेशी निवेशकों की भी कंपनी में बड़ी हिस्सेदारी है। पूरे मामले से शेयरधारकों और वित्तीय बाजार में हड़कंप मचा हुआ है।लोगों को अपनी गाढ़ी कमाई के डूबने का डर सता रहा है। लेकिन जांच अभी जारी है। इसी मुद्दे पर हम चर्चा करेंगे, लेकिन पहले ये रिपोर्ट देख लेते हैं।।।।
Exports SEBI Investigation : सेवी ने दिग्गज ज्वेलरी एक्सपोर्टर कंपनी राजेश एक्सपोर्ट्स लिमिटेड और उसके प्रमोटर चेयरमैन राजेश मेहता पर बड़ी कार्रवाई करते हुए 15.15 लाख करोड़ के राजस्व में हेराफेरी का सनसनीखेज खुलासा किया है। सेबी के 109 पन्नों के आधिकारिक आदेश के मुताबिक दावा किया गया है कि वित्त वर्ष 2021 से 25 के बीच कंपनी ने करीब 15.15 लाख करोड़ रुपये के राजस्व को गलत तरीके से प्रस्तुत किया, जिससे निवेशकों को गुमराह किया गया। सेबी की जांच में सामने आया कि कंपनी के कुल राजस्व का 97 % से 99 % हिस्सा विदेशी सहायक कंपनियों से दिखाया गया था। लेकिन जब नियामक ने इन दावों के समर्थन में दस्तावेज, बिक्री रिकॉर्ड, ग्राहक विवरण और लेनदेन संबंधी जानकारी मांगी, तो पर्याप्त प्रमाण उपलब्ध नहीं कराए जा सके। सेबी का आरोप है कि जिन विदेशी सहयोगी कंपनियों के जरिए लाखों करोड़ रुपये का कारोबार दिखाया गया, उनके वास्तविक ऑडिटेड आंकड़े इन दावों से मेल नहीं खाते। इसी आधार पर नियामक ने इसे संभावित राजस्व गलत जानकारी देना माना है। सेबी ने अंतरिम आदेश जारी करते हुए राजेश मेहता को कंपनी के शेयरों में खरीद-बिक्री और लेनदेन से रोक दिया है। जांच अभी जारी है और अंतिम फैसला आना बाकी है। उधर, मनीकंट्रोल की एक रिपोर्ट के अनुसार राजेश एक्सपोर्ट्स के चेयरमैन व एमडी, राजेश मेहता ने सेबी के आरोपों को खारिज किया है। कंपनी का कहना है कि उसके राजस्व के आंकड़े सही हैं और सेबी के साथ कम्युनिकेशन गैप और दस्तावेजों की व्याख्या को लेकर भ्रम की स्थिति बनी है। कंपनी ने दावा किया है कि वह अतिरिक्त दस्तावेज उपलब्ध करा रही है और अंतिम जांच में उसका पक्ष स्पष्ट हो जाएगा।
Exports SEBI Investigation : दरअसल यह विवाद 11 मार्च, 2024 को सेबी को मिले एक शेयर होल्डर्स की शिकायत से शुरू हुआ। शिकायत में असामान्य तरीके से बड़ी मात्रा में बकाया राशि पर सवाल उठाया गया, जो कथित तौर पर दो साल से अधिक समय से पेंडिंग थी। शिकायत के बाद सेबी ने जांच शुरू की, अक्टूबर 2024 में, नियामक ने एक जांच टीम नियुक्त की और टीम ने कंपनी के खातों की जांच करने, समूह द्वारा किए गए वित्तीय खुलासों को वेरिफाई करने फोरेंसिक ऑडिटर बीडीओ को नियुक्त किया।
Exports SEBI Investigation : इन आरोपों ने शेयर बाजार में हलचल मचा दी है, जिससे कॉर्पोरेट खुलासे, निगरानी और निवेशक संरक्षण के बारे में नई चिंताएं पैदा हो गई हैं। सेबी की कार्रवाई होते ही राजेश एक्सपोर्ट के शेयरों में गिरावट देखने को मिली है। राजेश एक्सपोर्ट के शेयर लोअर सर्किट पर आ गए और 5 फीसदी टूटकर 103.92 रुपये पर कारोबार कर रहा है। आपको बता दें कि राजेश एक्सपोर्ट का मार्केट कैप 3090 करोड़ रुपये है और कंपनी में एलआईसी की कुल हिस्सेदारी 10.80 फीसदी है। ऐसे में कंपनी में भारतीय जीवन बीमा निगम के निवेश की वैल्यू 300 करोड़ रुपये से ज्यादा है। राजेश एक्सपोर्ट्स का स्टॉक शेयर बाजार के ‘Z’ ग्रुप में शामिल है। इस श्रेणी में वे कंपनियां आती हैं जो एक्सचेंज के कुछ नियमों का पालन नहीं कर पातीं या जिनके खिलाफ निवेशकों की शिकायतें लंबित रहती हैं। राजेश एक्सपोर्ट्स की किसके पास कितनी हिस्सेदारी ? डालते हैं एक नजर…
Exports SEBI Investigation : हाल के वर्षों में, कंपनी ने निवेशकों की संपत्ति को केवल नुकसान ही पहुंचाया है। NSE के आंकड़े बातते हैं कि राजेश एक्सपोर्ट्स के शेयर की कीमत 2026 में अब तक 42%, एक साल में 49%, तीन साल में 82% और पांच साल में 81% गिर गई है। बहरहाल अब यदि सेबी के आरोप सही साबित होते हैं, तो यह मामला भारत के कॉरपोरेट इतिहास में कथित वित्तीय झूठी जानकारी देने वाला देश का एक और बड़ा फ्रॉड होगा। जिससे शेयर में भारी गिरावट, निवेशकों को बड़ा नुकसान, बैंक और कर्जदाताओं पर असर के साथ ही कानूनी, वित्तीय और बाजार संबंधी गंभीर परिणाम होंगे। लेकिन जांच अभी जारी है, ऐसे में देखना होगा कि जांच में क्या निकलकर सामने आता है। और इस मामले में भारत सरकार की जांच ऐजेसियों का क्या रुख रहता है।।
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