प्रसिद्ध बाघ संरक्षक, लेखक और पर्यावरण प्रेमी वल्मीकि थापर का शनिवार सुबह दिल्ली में निधन हो गया। उन्होंने भारत में बाघ संरक्षण की दिशा को हमेशा के लिए बदल दिया।
कौन थे वल्मीकि थापर?
वल्मीकि थापर भारत के प्रमुख वन्यजीव संरक्षणवादियों में से एक थे। उन्होंने 1970 के दशक के मध्य से बाघों के संरक्षण के लिए काम करना शुरू किया और केंद्र व राज्य सरकारों की 150 से अधिक समितियों में सेवा दी।
- 32 किताबें लिखीं, जिनमें 4 अफ्रीका पर आधारित थीं
- प्रसिद्ध पुस्तकें: Living With Tigers, The Secret Life of Tigers
- राजस्थान में विशेष रूप से सक्रिय रहे, लेकिन महाराष्ट्र के ताडोबा-अंधारी टाइगर रिज़र्व जैसे अन्य अभयारण्यों को पुनर्जीवित करने में भी भूमिका निभाई
बाघ संरक्षण की नई सोच लाए
Sanctuary Nature Foundation के अनुसार, थापर केवल बाघों के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे संरक्षण ढांचे को बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते थे।
- वे मानते थे कि “सभी पर्यटन खराब नहीं होता”
- वे सामुदायिक भागीदारी, वैज्ञानिकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, वन अधिकारियों, पत्रकारों और राजनीतिक नेताओं को जोड़कर संरक्षण को आगे बढ़ाने के पक्षधर थे
- उनका उद्देश्य था: वन्यजीव संरक्षण और ग्रामीण विकास का संतुलन बनाना
नेताओं और पर्यावरणविदों की प्रतिक्रियाएं
जयराम रमेश (पूर्व पर्यावरण मंत्री)
“वल्मीकि थापर का जाना बाघों की दुनिया के लिए अपूरणीय क्षति है। उनके साथ मेरी लगभग रोज बातचीत होती थी, और वे हमेशा बाघों की भलाई के लिए नई सलाह और सुझाव देते थे।”
उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान रणथंभौर उनकी प्रतिबद्धता और जुनून का प्रमाण है।
कुसुब्त शर्मा (Snow Leopard Trust के साइंटिफिक डायरेक्टर)
“1993 में एक स्कूली छात्र के रूप में मैं उनकी प्रस्तुति देखकर प्रेरित हुआ। उन्होंने मुझसे कहा: ‘तुम क्या कर रहे हो अभी? अपने दोस्तों को जोड़ो और मुख्यमंत्री को पत्र लिखो कि वह बाघों को बचाने के लिए कुछ करें।’”
“उन्होंने ही मुझे 2008 में मेरा पहला पर्यावरण संरक्षण पुरस्कार दिलवाया। उनका मार्गदर्शन हमेशा मेरे साथ रहेगा।”
नेहा सिन्हा (पर्यावरण जीवविज्ञानी)
“वल्मीकि एक निर्भीक योद्धा थे, जिन्होंने भारतीय बाघों के संरक्षण को वैश्विक मंच तक पहुंचाया। वे बाघों के व्यवहार के गहरे छात्र भी थे, और उनके लेखन से हमें बाघों की दुनिया को समझने का नया नजरिया मिला।”
थापर की विरासत
वल्मीकि थापर ने सिर्फ बाघों के संरक्षण की वकालत नहीं की, बल्कि एक पूरा आंदोलन खड़ा किया जो आज भी जीवित है। उनकी प्रेरणा से असंख्य युवा पर्यावरणविद और छात्र इस क्षेत्र में आए।
उनकी प्रमुख विरासतों में शामिल हैं:
- भारत में टाइगर टूरिज्म को नकारात्मक छवि से निकालकर सतत पर्यटन की अवधारणा देना
- टाइगर रिज़र्व के संरक्षण में स्थानीय समुदायों की भागीदारी सुनिश्चित करना
- बाघों पर आधारित साहित्य का विशाल संग्रह तैयार करना
- युवा संरक्षणवादियों को मार्गदर्शन और मंच प्रदान करना
वल्मीकि थापर से जुड़े कुछ प्रमुख तथ्य:
- जन्म वर्ष: 1952
- पेशा: लेखक, फिल्म निर्माता, वन्यजीव संरक्षक
- कुल पुस्तकें: 32+
- सक्रिय क्षेत्र: राजस्थान (विशेष रूप से रणथंभौर), महाराष्ट्र
- प्रसिद्ध टीवी डॉक्यूमेंट्री: Land of the Tiger (BBC)
निष्कर्ष: एक आवाज जो अब भी गूंज रही है
वल्मीकि थापर अब हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी सोच, कार्य और प्रेरणा भारत के पर्यावरण संरक्षण आंदोलन की रीढ़ बन चुकी है। वे उन विरले लोगों में से एक थे जिन्होंने न केवल बाघों की बात की, बल्कि उन्हें बचाने के लिए ठोस कदम उठाए।
उनका जीवन हमें यह याद दिलाता है कि जब हम प्रकृति के लिए आवाज उठाते हैं, तो एक अकेला इंसान भी बदलाव की लहर पैदा कर सकता है।