BY: MOHIT JAIN
अमेरिका और चीन के बीच व्यापार तनाव फिर चरम पर है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को घोषणा की कि चीन की सभी वस्तुओं पर 100 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगाया जाएगा। यह नए टैरिफ मौजूदा टैरिफ के ऊपर अलग से लगाए जाएंगे।
ट्रंप ने कहा कि यह टैरिफ 1 नवंबर, 2025 से लागू होंगे। उन्होंने चेताया कि अगर चीन कोई आक्रामक कदम उठाता है तो ये टैरिफ 1 नवंबर से पहले भी लागू किए जा सकते हैं।
महत्वपूर्ण सॉफ्टवेयर के निर्यात पर प्रतिबंध

अमेरिका ने यह भी कहा कि उसी दिन से चीन को महत्वपूर्ण सॉफ्टवेयर के निर्यात पर भी प्रतिबंध लगाया जाएगा। यह कदम चीन द्वारा अमेरिकी इंडस्ट्री के लिए आवश्यक दुर्लभ खनिजों के निर्यात पर रोक लगाने के जवाब में लिया गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स, ईवी (इलेक्ट्रिक व्हीकल) और अन्य तकनीकी सेक्टरों पर बुरा असर पड़ेगा।
व्यापारिक तनाव से वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव
ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लिखा कि चीन बेहद आक्रामक व्यापार नीतियां अपना रहा है और अमेरिका भी उसी भाषा में जवाब देगा। इस नई घोषणा के चलते अमेरिका और चीन के बीच व्यापारिक तनाव और बढ़ गया है, जिससे वैश्विक मार्केट अस्थिर होने की संभावना है।
विशेषज्ञों ने चेताया है कि इस टैरिफ और प्रतिबंध का असर सिर्फ चीन और अमेरिका पर ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के व्यापारिक माहौल पर पड़ेगा।
ट्रंप की एशियाई यात्रा और चीन से संबंध
अमेरिकी राष्ट्रपति आगामी दिनों में दक्षिण कोरिया का दौरा करेंगे। ट्रंप ने कहा कि उन्हें फिलहाल चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग से मिलने का कोई कारण नहीं दिखता।
उन्होंने ‘ट्रुथ सोशल’ पर पोस्ट किया कि अमेरिका में आने वाले चीनी उत्पादों पर टैरिफ बढ़ाने और अन्य कदमों पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है।
अमेरिका और चीन के बीच व्यापार युद्ध नए स्तर पर पहुंच गया है। 1 नवंबर से लागू होने वाले 100% अतिरिक्त टैरिफ और सॉफ्टवेयर एक्सपोर्ट पर बैन से दोनों देशों की अर्थव्यवस्था और वैश्विक बाजार प्रभावित होंगे। चीन द्वारा आक्रामक कदम उठाए जाने पर स्थिति और बिगड़ सकती है।





