नए वित्त वर्ष की शुरुआत के साथ ही बैंकिंग सेक्टर में कई बड़े बदलाव हुए हैं। इन बदलावों का असर आम लोगों, वेतनभोगियों और बिजनेस करने वालों पर पड़ेगा। इनमें यूपीआई के नए नियम और बैंक खातों में न्यूनतम बैलेंस से जुड़े अपडेट शामिल हैं। आइए विस्तार से जानते हैं क्या है ये नए नियम और आप पर इनका क्या असर होगा।
यूपीआई के नियम में बदलाव
नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने यूपीआई को और सुरक्षित बनाने के लिए नए नियम लागू किए हैं। इनमें सबसे बड़ा बदलाव निष्क्रिय मोबाइल नंबरों को लेकर है।
- अगर आपका कोई पुराना मोबाइल नंबर बंद हो चुका है और वह यूपीआई से जुड़ा हुआ है, तो अब उसका इस्तेमाल नहीं कर पाएंगे।
- NPCI ने बैंकों और थर्ड-पार्टी यूपीआई ऐप्स (जैसे Google Pay, PhonePe) को ऐसे नंबर हटाने के निर्देश दिए हैं।
- अगर आपका कोई नंबर लंबे समय से इस्तेमाल नहीं हुआ है, तो उससे जुड़ा यूपीआई अकाउंट बंद हो सकता है।
क्या करें?
अगर आपका कोई पुराना नंबर यूपीआई से जुड़ा है और अब वह बंद है, तो जल्दी से उसे अपने बैंक या पेमेंट ऐप में अपडेट करवाएं।

क्या यूपीआई पर न्यूनतम बैलेंस का नियम लागू हुआ है?
नहीं, NPCI ने यूपीआई के लिए कोई न्यूनतम बैलेंस का नियम नहीं बनाया है। हालांकि, यूपीआई ट्रांजेक्शन की लिमिट (जैसे 1 लाख रुपये प्रतिदिन) और सुरक्षा नियमों में बदलाव हुए हैं।
बैंक खातों में न्यूनतम बैलेंस के नए नियम
कई बड़े बैंकों ने 1 अप्रैल 2025 से अपने न्यूनतम बैलेंस के नियम बदले हैं। अगर आप इतना बैलेंस नहीं रखते हैं, तो आप पर जुर्माना लगेगा।
1. भारतीय स्टेट बैंक (SBI)
- मेट्रो शहरों में बचत खाते का न्यूनतम बैलेंस: 3000 रुपये
- शहरी क्षेत्रों में: 2000 रुपये
- ग्रामीण इलाकों में: 1000 रुपये
- अगर बैलेंस नहीं रखा, तो 50-100 रुपये तक का जुर्माना लग सकता है।
2. पंजाब नेशनल बैंक (PNB)
- न्यूनतम बैलेंस: 1000-2000 रुपये
- जुर्माना: 50 रुपये से शुरू
3. केनरा बैंक
- न्यूनतम बैलेंस: 1000 रुपये से शुरू
- जुर्माना खाते के प्रकार पर निर्भर करेगा।
क्या करें?
अगर आपका खाता इन बैंकों में है, तो जांच लें कि आपने न्यूनतम बैलेंस रखा है या नहीं। अगर नहीं, तो जल्दी पैसे जमा करवाएं, नहीं तो जुर्माना देना पड़ेगा।