वक्फ संशोधन बिल 2024: लोकसभा में गरमाई बहस, अमित शाह ने दिया विपक्ष को करारा जवाब

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Waqf Amendment Bill 2024:

नई दिल्ली, 2 अप्रैल 2025: आज लोकसभा में वक्फ (संशोधन) बिल 2024 पर जोरदार बहस देखने को मिली। केंद्र सरकार ने इस विधेयक को पेश किया, जिसका उद्देश्य वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में पारदर्शिता लाना और दुरुपयोग को रोकना है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इस दौरान विपक्ष के विरोध को खारिज करते हुए कहा, “यह संसद का कानून है, इसे सभी को मानना होगा। कोई यह नहीं कह सकता कि हम इसे स्वीकार नहीं करेंगे।”

अमित शाह का विपक्ष पर हमला

अमित शाह ने बहस के दौरान विपक्ष पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि 2001 से 2012 के बीच करीब दो लाख करोड़ रुपये की वक्फ संपत्ति निजी संस्थानों को सौ साल की लीज पर दी गई थी। उन्होंने बेंगलुरु का उदाहरण देते हुए बताया कि वहां हाई कोर्ट को हस्तक्षेप करना पड़ा और 602 एकड़ जमीन को जब्त होने से बचाया गया। शाह ने जोर देकर कहा, “यह पैसा गरीब मुसलमानों का है, न कि धनाढ्यों की चोरी के लिए।”

लालू यादव का जिक्र

शाह ने अपने भाषण में राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) नेता लालू प्रसाद यादव का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा, “लालू जी ने 2013 में कहा था कि वक्फ बोर्ड की जमीनें हड़प ली गई हैं। पटना में डाकबंगले की संपत्ति पर अपार्टमेंट बन गए। उन्होंने कड़ा कानून लाने की मांग की थी। कांग्रेस ने उनकी यह इच्छा पूरी नहीं की, लेकिन पीएम मोदी ने इसे पूरा कर दिखाया।”

बिल के मुख्य प्रावधान

अमित शाह ने बताया कि यह बिल जमीनों की सुरक्षा सुनिश्चित करेगा। अब केवल घोषणा से कोई जमीन वक्फ की संपत्ति नहीं बन सकेगी। पुरातत्व विभाग और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की जमीनों को संरक्षण मिलेगा। साथ ही, आम लोगों की निजी संपत्ति भी सुरक्षित रहेगी। उन्होंने कहा, “हम अपनी संपत्ति दान कर सकते हैं, लेकिन सरकारी जमीन का दान नहीं किया जा सकता।”

विपक्ष का विरोध

विपक्षी दलों ने इस बिल का कड़ा विरोध किया। समाजवादी पार्टी (सपा) की सांसद इकरा हसन ने कहा, “यह बिल मुसलमानों की पहचान मिटाने की साजिश है। इससे मुस्लिम महिलाओं को कोई फायदा नहीं होगा, बल्कि यह केवल एक राजनीतिक नैरेटिव बनाने की कोशिश है।” वहीं, कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने आरोप लगाया कि सरकार मुसलमानों को कानूनी उलझनों में फंसाना चाहती है।

समर्थन में आए सहयोगी दल

एनडीए के सहयोगी दलों टीडीपी और जेडीयू ने बिल का समर्थन किया। जेडीयू सांसद ललन सिंह ने कहा, “यह बिल पसमांदा मुसलमानों के हक में है। यह धन के दुरुपयोग को रोकेगा और पारदर्शिता लाएगा।” टीडीपी सांसद कृष्णा प्रसाद ने कहा कि उनकी पार्टी मुस्लिम समुदाय को देश का अभिन्न अंग मानती है और इस बिल से उनका कल्याण होगा।

बीजेपी का दावा

बीजेपी सांसद अनुराग ठाकुर ने कहा, “वक्फ अत्याचार का अड्डा बन गया था। यह बिल संविधान के साथ खड़े होने की उम्मीद है। देश में एक ही कानून चलेगा, मुगलिया फरमान नहीं।” उन्होंने कांग्रेस पर मुसलमानों को वोट बैंक की तरह इस्तेमाल करने का आरोप भी लगाया।

कानून की अनिवार्यता:
अमित शाह ने कहा कि यह बिल संसद का कानून है और इसे सभी को मानना होगा। उन्होंने विपक्ष के उस दावे पर आपत्ति जताई जिसमें कहा गया था कि अल्पसंख्यक इसे स्वीकार नहीं करेंगे। शाह ने इसे धमकी करार देते हुए कहा, “यह संसद का अधिकार है, कोई यह नहीं कह सकता कि हम इसे नहीं मानेंगे।”

  1. वक्फ संपत्ति की चोरी पर रोक:
    शाह ने बताया कि 2001 से 2012 के बीच लगभग दो लाख करोड़ रुपये की वक्फ संपत्ति को निजी संस्थानों को सौ साल की लीज पर दिया गया। उन्होंने बेंगलुरु का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां 602 एकड़ जमीन को बचाने के लिए हाई कोर्ट को दखल देना पड़ा। उनका कहना था, “यह पैसा गरीब मुसलमानों का है, इसे चोरी करने वालों के लिए नहीं छोड़ा जा सकता।”
  2. कानून को मानना अनिवार्य:
    शाह ने कहा, “यह संसद का कानून है, इसे सभी को स्वीकार करना होगा। कोई यह नहीं कह सकता कि हम इसे नहीं मानेंगे। यह भारत सरकार का कानून है और इसे लागू करना सबकी जिम्मेदारी है।”
  3. वक्फ संपत्ति की लूट पर चोट:
    उन्होंने बताया कि 2001 से 2012 के बीच दो लाख करोड़ रुपये की वक्फ संपत्ति निजी संस्थानों को लंबी लीज पर दी गई। बेंगलुरु में 602 एकड़ जमीन को बचाने के लिए हाई कोर्ट को दखल देना पड़ा। शाह ने कहा, “यह पैसा गरीब मुसलमानों का है, इसे धनाढ्यों की चोरी के लिए नहीं छोड़ा जा सकता।”
  4. वक्फ का मतलब और इतिहास:
    शाह ने वक्फ की व्याख्या करते हुए कहा, “वक्फ एक अरबी शब्द है, जिसका अर्थ है अल्लाह के नाम पर संपत्ति दान करना। यह धार्मिक और सामाजिक कल्याण के लिए होता है। इसका आधुनिक स्वरूप इस्लाम के दूसरे खलीफा उमर के समय शुरू हुआ। यह एक तरह का चैरिटेबल ट्रस्ट है।”
  5. विपक्ष पर हमला:
    उन्होंने विपक्ष पर भ्रम फैलाने का आरोप लगाया और कहा, “विपक्ष वोट बैंक की राजनीति के लिए मुसलमानों को डरा रहा है। इस बिल में ऐसा कुछ नहीं है जो किसी के खिलाफ हो। यह पारदर्शिता के लिए है।”
  6. कांग्रेस की नीतियों की आलोचना:
    शाह ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि 2013 में उनके संशोधन ने हालात बिगाड़े। उन्होंने उदाहरण दिया कि दिल्ली की 123 लुटियंस संपत्तियां और तमिलनाडु के तिरुचेंदुर मंदिर की 400 एकड़ जमीन वक्फ को दे दी गई। उन्होंने इसे गलत ठहराया।
  7. बिल के प्रावधान:
    शाह ने बताया कि अब सिर्फ घोषणा से कोई जमीन वक्फ नहीं बनेगी। पुरातत्व विभाग और एएसआई की जमीनें सुरक्षित होंगी। निजी और सरकारी संपत्ति को वक्फ के दायरे से बाहर रखा जाएगा। उन्होंने कहा, “हम अपनी संपत्ति दान कर सकते हैं, लेकिन सरकारी जमीन का दान नहीं हो सकता।”
  8. पारदर्शिता पर जोर:
    उन्होंने कहा कि ऑडिट और जांच के प्रावधान से पारदर्शिता आएगी। जहां वक्फ की घोषणा होगी, वहां कलेक्टर उसकी सत्यता जांचेगा। शाह ने कहा, “यह जरूरी है कि जमीन सरकारी है या निजी, यह साफ हो।”
  9. लालू यादव का उल्लेख:
    शाह ने लालू प्रसाद यादव का जिक्र करते हुए कहा, “लालू जी ने 2013 में कहा था कि वक्फ की जमीनें हड़प ली गई हैं। पटना में डाकबंगले की जगह अपार्टमेंट बन गए। उन्होंने सख्त कानून की मांग की थी, जिसे मोदी सरकार ने पूरा किया।”
  10. मुसलमानों के हित में बिल:
    शाह ने मुस्लिम समुदाय को आश्वस्त करते हुए कहा, “यह बिल गरीब और पसमांदा मुसलमानों के लिए है। चार साल में लोग समझ जाएंगे कि यह उनके हित में है। यह संपत्ति की लूट रोकने का कदम है।”
  11. उदाहरणों से समझाया:
    उन्होंने हिमाचल और तमिलनाडु जैसे राज्यों का जिक्र किया, जहां वक्फ के नाम पर मस्जिदें बनाने की कोशिश हुई। शाह ने कहा कि ऐसे दुरुपयोग को रोकना जरूरी है।
  12. अमित शाह ने अपने भाषण में इस बात पर बल दिया कि यह बिल संविधान के अनुरूप है और इसका मकसद वक्फ संपत्तियों का सही इस्तेमाल सुनिश्चित करना है। उन्होंने विपक्ष से इसे राजनीतिक रंग न देने की अपील की और कहा कि यह देश के सभी नागरिकों के हित में है।

वक्फ का अर्थ और इतिहास

गृह मंत्री ने वक्फ की परिभाषा को स्पष्ट करते हुए कहा, “वक्फ एक अरबी शब्द है, जिसका मतलब है अल्लाह के नाम पर संपत्ति का दान करना। यह धार्मिक और सामाजिक भलाई के लिए होता है। इसकी शुरुआत इस्लाम के दूसरे खलीफा उमर के समय हुई थी। आज के संदर्भ में इसे एक तरह का धर्मार्थ ट्रस्ट कहा जा सकता है।”

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