BY: Yoganand Shrivastva
इंदौर | इंदौर में आवारा कुत्तों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। हालात ये हैं कि हर महीने औसतन 10 हजार लोग डॉग बाइट का शिकार बन रहे हैं। यानी रोज़ाना करीब 134 लोग कुत्तों के हमले से घायल हो रहे हैं। हाल ही में एक पागल कुत्ते ने बीएसएफ के 6 जवानों पर हमला किया, जिनमें से दो की हालत गंभीर हो गई।
हुकुमचंद पॉलीक्लिनिक का चौंकाने वाला डेटा
शहर के एमटीएच परिसर स्थित हुकुमचंद पॉलीक्लिनिक (लाल अस्पताल) के आंकड़ों के अनुसार, जनवरी से जुलाई 2025 के बीच 28,142 लोग कुत्तों के काटने से घायल हुए। यह आंकड़ा सिर्फ एक अस्पताल का है, इसमें 28 वैक्सीन सेंटर और 350 से ज्यादा प्राइवेट अस्पतालों का रिकॉर्ड शामिल नहीं है।
2023 में जहां औसतन 3,600 लोग हर महीने कुत्तों का शिकार बनते थे, वहीं 2025 तक यह संख्या बढ़कर 10 हजार तक पहुंच गई। यानी सिर्फ दो साल में डॉग बाइट के मामलों में कई गुना तेजी से वृद्धि हुई है।
9 साल में दोगुना खतरा
शहर में डॉग बाइट केसों का इतिहास देखें तो स्थिति और भी गंभीर लगती है। 2016 में पूरे साल में 20,455 लोग आवारा कुत्तों के हमलों से पीड़ित हुए थे। वहीं, 2025 में सिर्फ 7 महीनों में ही यह आंकड़ा 28 हजार पार कर चुका है। इसका मतलब है कि 9 साल में मामलों की संख्या लगभग दोगुनी हो गई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इंदौर की कॉलोनियों और चौराहों पर देर रात या सुबह जल्दी निकलना और ज्यादा खतरनाक हो गया है। हर साल इन मामलों में औसतन 20% की बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है।
वैक्सीन पर बढ़ा दबाव
हर हमले के बाद लोग एंटी-रेबीज़ वैक्सीन के लिए हुकुमचंद पॉलीक्लिनिक या अन्य सेंटर्स पर पहुंचते हैं। बढ़ते मामलों की वजह से वैक्सीन की मांग भी लगातार बढ़ रही है और स्वास्थ्य विभाग पर दबाव बना हुआ है।





