बिहार में कौन बनेगा मुख्यमंत्री कौन? नीतीश या नया चेहरा, जानें पूरा विश्लेषण
Vijay Nandan (वरिष्ठ पत्रकार और डिजिटल एडिटर)
पटना: बिहार विधानसभा चुनाव में मतगणना चल रही है, लेकिन रुझानों में एनडीए की बंपर बढ़त ने सत्ता की तस्वीर लगभग साफ कर दी है। सवाल ये है कि इस बार मुख्यमंत्री की कुर्सी पर कौन बैठेगा? हालांकि चुनाव के दौरान नीतीश कुमार का चेहरा आगे था लेकिन दबी जुबान और संकेतों में बीजेपी की तरफ से मुख्यमंत्री पद को अलग कुछ संकेत भी दिए गए थे, तो क्या एक बार फिर नीतीश कुमार किंग बनेंगे या बीजेपी किसी नए चेहरे को आगे करेगी?
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के ताज़ा रुझानों में एनडीए ने भारी बढ़त बना ली है और सत्ता में वापसी लगभग तय मानी जा रही है। लेकिन चुनाव जीतने जितना ही बड़ा सवाल अब यह है कि आखिर मुख्यमंत्री की कुर्सी पर कौन बैठेगा?
क्या यह जिम्मेदारी एक बार फिर नीतीश कुमार को मिलेगी, जो देश के सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहने वाले नेताओं में शामिल होने जा रहे हैं? या फिर भाजपा 2025 के चुनाव में मिले जनादेश के बाद नया चेहरा पेश कर राजनीतिक समीकरण बदल देगी?
आइए, रुझानों, सीटों, राजनीतिक संकेतों और एनडीए की अंदरूनी राजनीति के आधार पर इस सवाल का गहराई से विश्लेषण करते हैं।

NDA की बंपर बढ़त, सरकार बनने का स्पष्ट संकेत
अब तक के रुझान बताते हैं कि एनडीए ने महागठबंधन पर बड़ी बढ़त बना ली है। बीजेपी और जेडीयू का संयुक्त प्रदर्शन इस बार अपेक्षा से ज्यादा मजबूत दिख रहा है। पिछले चुनाव की तुलना में कई विधानसभा सीटों पर एनडीए ने अपनी स्थिति और मजबूत की है।
इस चुनाव में प्रधानमंत्री मोदी का प्रचार,
बीजेपी की दमदार सोशल इंजीनियरिंग,
जेडीयू का ग्राउंड नेटवर्क,
और तेजस्वी यादव के नेतृत्व पर सवाल,
एनडीए को मजबूती देते हैं।
मुख्यमंत्री कौन? 3 बड़े संभावित चेहरे
नीतीश कुमार 9 बार मुख्यमंत्री रह चुके हैं। यदि वे फिर शपथ लेते हैं तो यह उनका 10वां कार्यकाल होगा। लेकिन क्या एनडीए उनसे आगे किसी नए नाम पर दांव लगा सकता है। आइए विकल्पों पर नजर डालते हैं..
- नीतीश कुमार, सबसे मजबूत दावेदार
एनडीए की रणनीति ऐसी ही रही है कि अगर जेडीयू की सीटें वाजिब संख्या में आती हैं और गठबंधन मजबूत रहता है, तो मुख्यमंत्री की कुर्सी उन्हें ही सौंपी जाती है।
कारण: बिहार की राजनीति में स्थिर और स्वीकार्य चेहरा
ओबीसी–अति पिछड़ा वर्ग में पकड़
बिहार प्रशासन और शासन में अनुभवी
मोदी–नीतीश की संयुक्त अपील का असर
रुझानों को देखकर कहा जा सकता है कि बीजेपी नीतीश को दरकिनार करने का जोखिम नहीं उठाएगी।

- बीजेपी का नया चेहरा, विकल्प तैयार लेकिन तुरंत नहीं
बीजेपी ने इस चुनाव में कई बड़े चेहरे खड़े किए हैं
सम्राट चौधरी (डिप्टी CM)
मंगल पांडे
नितिन नवीन
गिरिराज सिंह
रवि शंकार प्रसाद
बीजेपी के पास भविष्य के लिए विकल्प मौजूद हैं, लेकिन अभी सीएम चेहरा बदलने से जेडीयू में नाराज़गी हो सकती है।
गठबंधन की अस्थिरता, और सत्ता समीकरणों में गड़बड़ी का खतरा है। इसी कारण पार्टी फिलहाल नीतीश को आगे रख सकती है।
- समझौता फॉर्मूला, 2.5 साल का मॉडल
कुछ राजनीतिक जानकारों के अनुसार, यदि बीजेपी ज्यादा सीटें जीतती है और जेडीयू का प्रदर्शन पिछले चुनाव से कमजोर रहता है, तो “डेढ़–डेढ़ साल मॉडल” या “2.5 साल का सीएम बारी-बारी फॉर्मूला” लागू हो सकता है। यानी पहला कार्यकाल, नीतीश कुमार, दूसरा कार्यकाल, बीजेपी का चेहरा, यह फॉर्मूला एनडीए के भीतर सामंजस्य बनाए रखेगा।
रुझान क्या संकेत देते हैं? एनडीए की बढ़त का पैटर्न बताता है कि जनता ने महागठबंधन के वादों, नेतृत्व संकट, और जातीय ध्रुवीकरण से ऊपर उठकर स्थिरता और शासन को प्राथमिकता दी है। यह बिल्कुल वही परिस्थितियाँ हैं जिनमें नीतीश कुमार का अनुभव और प्रशासनिक छवि निर्णयात्मक बन जाती है।





