दुनियाभर में 1.4 ट्रिलियन डॉलर के नुकसान की आशंका
BY:Vijay Nandan
वॉशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप आज व्हाइट हाउस के रोज गार्डन में एक महत्वपूर्ण घोषणा करने जा रहे हैं। वे ‘रिसीप्रोकल टैरिफ’ (जवाबी शुल्क) लागू करने की योजना बना रहे हैं, जिसे उन्होंने ‘लिबरेशन डे’ (मुक्ति दिवस) का नाम दिया है। इस टैरिफ का उद्देश्य अमेरिका को विदेशी उत्पादों पर निर्भरता से मुक्त करना और उन देशों को जवाब देना है जो अमेरिकी सामानों पर अधिक शुल्क लगाते हैं। यह फैसला लागू होते ही वैश्विक व्यापार पर बड़ा प्रभाव पड़ सकता है, जिससे दुनियाभर की अर्थव्यवस्थाओं में अस्थिरता की आशंका जताई जा रही है।

वैश्विक अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान की आशंका
विशेषज्ञों के अनुसार, इस टैरिफ नीति से दुनिया को लगभग 1.4 ट्रिलियन डॉलर का आर्थिक नुकसान हो सकता है। इंग्लैंड के एस्टन बिजनेस स्कूल की एक रिपोर्ट में यह अनुमान लगाया गया है कि अमेरिका में कीमतों में 5.5% तक की वृद्धि हो सकती है और अमेरिकी जीडीपी 1.3% तक घट सकती है।
अमेरिकी विपक्ष ने किया विरोध
अमेरिकी सीनेट में डेमोक्रेटिक नेता चक शूमर ने इस नीति पर कड़ा विरोध जताया। उन्होंने इसे “नाकाम रणनीति” करार देते हुए कहा कि ट्रंप का यह कदम सिर्फ करोड़पतियों और अरबपतियों को फायदा पहुंचाने के लिए है, जबकि आम लोगों को इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ेगी।
जापान और यूरोपीय संघ की चेतावनी
बैंक ऑफ जापान के गवर्नर काजुओ उएदा ने संसद में कहा कि अमेरिकी टैरिफ नीति के वैश्विक व्यापार पर गंभीर प्रभाव पड़ सकते हैं। उन्होंने कहा, “हर देश इससे अछूता नहीं रहेगा, और इससे जापान की अर्थव्यवस्था भी प्रभावित हो सकती है।”
उधर, यूरोपीय संघ की प्रमुख उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने ट्रंप को चेतावनी देते हुए कहा कि यूरोप इस टकराव की शुरुआत नहीं चाहता, लेकिन जरूरत पड़ने पर जवाबी कदम उठाने के लिए तैयार है।
रूस से तेल खरीदने पर 500% टैरिफ का प्रस्ताव
अमेरिकी सीनेट में 50 सीनेटरों ने एक नया प्रस्ताव रखा है, जिसके तहत रूस से तेल, गैस और यूरेनियम खरीदने वाले देशों पर 500% टैरिफ लगाया जा सकता है। यह प्रस्ताव उन देशों पर दबाव डालने के लिए लाया गया है जो रूस से ऊर्जा उत्पाद खरीदते हैं, खासकर यूक्रेन संकट के बीच।
ऑस्ट्रेलिया और कनाडा की प्रतिक्रिया
ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने ट्रंप की इस नीति पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि उनका देश अपने आर्थिक हितों की रक्षा करेगा और किसी भी व्यापारिक समझौते में नुकसान नहीं होने देगा।
वहीं, कनाडा और मैक्सिको के लिए भी मुश्किलें बढ़ सकती हैं। ट्रंप प्रशासन 25% टैरिफ लगाने की योजना बना रहा है, जिससे इन दोनों देशों की अर्थव्यवस्था प्रभावित हो सकती है।
अमेरिका की ‘प्रोटेक्शनिस्ट’ नीति पर सवाल
ट्रंप प्रशासन की यह नीति ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति को मजबूत करने का प्रयास है, लेकिन इससे वैश्विक व्यापार संतुलन बिगड़ सकता है। अमेरिका के कई बड़े व्यापारिक साझेदार इसका विरोध कर रहे हैं और जवाबी कार्रवाई की तैयारी में हैं।
ट्रंप के टैरिफ का भारत पर असर
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लागू किए जा रहे जवाबी टैरिफ (Reciprocal Tariff) का भारत पर भी महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ सकता है। अमेरिका और भारत के बीच व्यापारिक संबंध मजबूत हैं, लेकिन इस नए टैरिफ नियम से भारतीय निर्यातकों और कंपनियों को झटका लग सकता है।
1. भारतीय निर्यातकों पर प्रभाव
- टेक्सटाइल और गारमेंट इंडस्ट्री: अमेरिका भारतीय वस्त्र और परिधान उद्योग का एक बड़ा बाजार है। अगर ट्रंप प्रशासन भारतीय गारमेंट्स पर अधिक टैरिफ लगाता है, तो भारतीय कंपनियों की प्रतिस्पर्धा कमजोर होगी।
- आईटी और सर्विस सेक्टर: अमेरिका भारतीय आईटी कंपनियों जैसे इन्फोसिस, टीसीएस, विप्रो के लिए सबसे बड़ा बाजार है। अगर आउटसोर्सिंग पर कोई नया कर लगता है, तो इससे भारत की आईटी कंपनियों की कमाई प्रभावित हो सकती है।
- फार्मास्युटिकल इंडस्ट्री: भारत अमेरिका को दवाओं का सबसे बड़ा निर्यातक है। यदि टैरिफ बढ़ता है, तो भारतीय फार्मा कंपनियों को नुकसान होगा और दवाओं की कीमतें बढ़ सकती हैं।
2. व्यापार घाटा बढ़ने की आशंका
भारत अमेरिका को 70 अरब डॉलर से अधिक का सामान निर्यात करता है, जबकि अमेरिका से भारत में आयात 40 अरब डॉलर के करीब है। अगर टैरिफ बढ़ता है, तो भारत के लिए अमेरिका के साथ व्यापार करना महंगा हो जाएगा और व्यापार घाटा बढ़ सकता है।
3. अमेरिकी कंपनियों के निवेश पर असर
- अमेरिकी कंपनियां जैसे कि ऐप्पल, गूगल, माइक्रोसॉफ्ट, अमेज़न भारत में निवेश कर रही हैं। अगर ट्रेड वॉर बढ़ता है, तो इन कंपनियों के भारत में निवेश पर भी असर पड़ सकता है।
- FDI (प्रत्यक्ष विदेशी निवेश) में कमी आ सकती है, जिससे भारत की आर्थिक वृद्धि प्रभावित हो सकती है।
4. अमेरिकी उत्पादों की कीमतें बढ़ेंगी
- अगर अमेरिकी कंपनियों को भी भारत से शुल्क में बढ़ोतरी का सामना करना पड़ता है, तो iPhone, लैपटॉप, कारें, और अन्य इलेक्ट्रॉनिक्स आइटम महंगे हो सकते हैं।
- मेडिकल उपकरणों की कीमतों में भी वृद्धि हो सकती है, क्योंकि भारत अमेरिका से मेडिकल टेक्नोलॉजी और उपकरण आयात करता है।
5. अमेरिका के जवाबी कदम का खतरा
अगर भारत अमेरिकी टैरिफ का जवाबी कार्रवाई में कोई नया शुल्क लगाता है, तो अमेरिका भारतीय उत्पादों को और अधिक टारगेट कर सकता है। यह व्यापारिक तनाव को और बढ़ा सकता है।
डोनाल्ड ट्रंप का यह टैरिफ ऐलान भारत के लिए एक बड़ी चुनौती हो सकता है। इससे निर्यातक कंपनियां, आईटी सेक्टर, फार्मा इंडस्ट्री और विदेशी निवेश प्रभावित हो सकते हैं। भारत सरकार को इस स्थिति से निपटने के लिए संतुलित कूटनीति और व्यापार नीति अपनानी होगी, ताकि भारत-अमेरिका व्यापार संबंध प्रभावित न हों। डोनाल्ड ट्रंप का यह टैरिफ ऐलान वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए एक नई चुनौती बन सकता है। जहां अमेरिका इसे अपने हित में बता रहा है, वहीं अन्य देश इसे व्यापार युद्ध की शुरुआत के रूप में देख रहे हैं। अब देखना यह होगा कि इस फैसले का लंबी अवधि में अमेरिकी और वैश्विक बाजारों पर क्या असर पड़ता है।
ये भी पढ़िए:वक्फ बोर्ड संशोधन बिल: क्या बदलाव, किसे फायदा और क्यों हो रहा विरोध ?