शहबाज शरीफ का दिखावटी शांति संदेश, अमेरिका से गुफ्तगू के पीछे छिपे पाकिस्तान के दोहरे मंसूबे?

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BY: Yoganand Shrivastva

इस्लामाबाद/वॉशिंगटन: इजरायल और ईरान के बीच सैन्य तनाव में आई हालिया शांति के बाद, अमेरिका और पाकिस्तान के शीर्ष नेताओं के बीच एक अहम बातचीत हुई। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने शुक्रवार को टेलीफोन पर बात करते हुए क्षेत्रीय स्थिरता और सहयोग बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताई।


क्षेत्र में शांति के लिए अमेरिका-पाकिस्तान का साझा संकल्प

बातचीत की जानकारी देते हुए अमेरिकी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता टैमी ब्रूस ने बताया कि दोनों नेताओं ने मध्य पूर्व में शांति बहाली की दिशा में मिलकर काम करने की आवश्यकता पर सहमति जताई। उन्होंने इजरायल और ईरान के बीच लंबे समय से चल रहे संघर्ष के समाधान की दिशा में स्थायी और टिकाऊ कूटनीतिक प्रयासों की वकालत की।


शहबाज शरीफ बोले – ‘पाकिस्तान निभाएगा रचनात्मक भूमिका’

पाकिस्तानी प्रधानमंत्री कार्यालय से जारी बयान में कहा गया है कि पीएम शरीफ ने जोर देकर कहा कि “पाकिस्तान क्षेत्र में शांति स्थापित करने में अपनी रचनात्मक भूमिका निभाता रहेगा।” उन्होंने अमेरिका के साथ व्यापारिक और रणनीतिक रिश्तों को और मजबूत करने की भी बात कही।


डोनाल्ड ट्रंप की तारीफ, संघर्षविराम का श्रेय

शरीफ ने इस बातचीत के दौरान अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व की प्रशंसा करते हुए कहा कि उनकी साहसी नीतियों और निर्णायक निर्णयों की वजह से ईरान-इजरायल संघर्षविराम संभव हो पाया। साथ ही उन्होंने भारत-पाक संघर्ष विराम को भी अमेरिका की मध्यस्थता का नतीजा बताया।


पाक सेना प्रमुख और ट्रंप की मुलाकात बनी चर्चा का विषय

इससे पहले हाल ही में अमेरिका यात्रा पर आए पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर ने डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात की थी। इस मीटिंग में ईरान की स्थिति और उसके परमाणु कार्यक्रमों पर चर्चा हुई थी। ट्रंप ने जनरल मुनीर से कहा था कि “पाकिस्तान, ईरान को बाकी दुनिया से बेहतर समझता है।”

गौरतलब है कि पाकिस्तान की अमेरिका स्थित दूतावास में ईरान के राजनयिक हितों का भी प्रतिनिधित्व किया जाता है, क्योंकि तेहरान और वॉशिंगटन के बीच कोई औपचारिक कूटनीतिक संबंध नहीं हैं।


अमेरिका ने किया था ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमला

ट्रंप और मुनीर की मुलाकात के तुरंत बाद अमेरिका ने ईरान के संभावित परमाणु ठिकानों पर हवाई हमला किया था। इसके जवाब में ईरान ने भी कतर स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डे को निशाना बनाते हुए मिसाइलें दागीं। इन घटनाओं ने पूरे क्षेत्र में तनाव की लहर पैदा कर दी थी।


पाकिस्तान की कूटनीति और ट्रंप को नोबेल के लिए नामांकन

पाकिस्तान सरकार ने इस पूरे घटनाक्रम के दौरान अमेरिका और इजरायल के आक्रामक रुख की निंदा की थी और ट्रंप को मध्यस्थता में निभाई भूमिका के लिए नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामित किया है।


इजरायल-ईरान तनाव की पृष्ठभूमि

इजरायल का मानना है कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम के जरिये हथियार विकसित कर रहा है, जो क्षेत्रीय और वैश्विक शांति के लिए खतरा है। हालांकि ईरान खुद को परमाणु अप्रसार संधि (NPT) का पक्षकार बताता है, जबकि इजरायल ने इस संधि पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं। इजरायल की चिंता है कि ईरान को यदि रोका नहीं गया, तो वह भविष्य में परमाणु बम बना सकता है।

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