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ताइवान का बड़ा फैसला: $100 अरब के ट्रम्प सौदे में अमेरिका को नहीं मिलेगी उन्नत तकनीक

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ताइवान सरकार का बयान

ताइवान की सरकार ने वादा किया है कि उसकी सबसे उन्नत सेमीकंडक्टर तकनीक को अमेरिका में स्थानांतरित नहीं किया जाएगा। यह बयान ताइवान सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग कंपनी (टीएसएमसी) और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के बीच $100 अरब (लगभग 79 अरब पाउंड) के सौदे के बाद आया है। सरकार ने कहा कि इस सौदे को अभी सरकारी मूल्यांकन से गुजरना होगा, जिसमें देश और निवेशकों के हितों को ध्यान में रखा जाएगा।

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सौदे की घोषणा और विवाद

सोमवार को डोनाल्ड ट्रम्प और टीएसएमसी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सीसी वेई ने इस सौदे की घोषणा की, जिसके बाद ताइवान में विवाद और असमंजस की स्थिति पैदा हो गई। टीएसएमसी ने कहा कि वह अपनी मौजूदा अमेरिकी निवेश को $100 अरब तक बढ़ाएगी और अमेरिका में पांच नई अत्याधुनिक सुविधाओं का निर्माण करेगी। ट्रम्प ने दावा किया कि यह सौदा 25% उद्योग-व्यापी टैरिफ से बचने में मदद करेगा, जो अमेरिका में विनिर्माण को बढ़ावा देने और व्यापार में अमेरिकी प्रभुत्व स्थापित करने के प्रयासों का हिस्सा है। वेई ने कहा कि इस सौदे से टीएसएमसी अमेरिकी धरती पर सबसे उन्नत चिप का उत्पादन करेगी।

तकनीक को ताइवान में रखने का आश्वासन

हालांकि, सरकार के अधिकारियों ने इस दावे पर सवाल उठाए और आश्वासन दिया कि अत्याधुनिक तकनीक ताइवान में ही रहेगी। राष्ट्रपति कार्यालय की प्रवक्ता करेन कुओ ने कहा कि सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि टीएसएमसी अपनी सबसे उन्नत विनिर्माण प्रक्रियाओं को ताइवान में बनाए रखे। अर्थशास्त्र मंत्री कुओ जyh-हुई ने मंगलवार को कहा, “अगले साल 2 नैनोमीटर और 1.6 नैनोमीटर चिप्स अमेरिका में नहीं बनाई जाएंगी।” हालांकि, इन प्रतिबंधों की विशिष्ट जानकारी अभी स्पष्ट नहीं है।

राष्ट्रीय सुरक्षा पर चिंता

टीएसएमसी दुनिया के लगभग सभी सबसे उन्नत सेमीकंडक्टर बनाती है और इसे ताइवान का “सिलिकन शील्ड” कहा जाता है। यह तकनीक ताइवान को चीन के आक्रमण से बचाने में अमेरिका और उसके सहयोगियों के लिए प्रोत्साहन का काम करती है। विपक्षी नेताओं ने चेतावनी दी है कि यह सौदा ताइवान की रक्षा को कमजोर कर सकता है। तमकांग विश्वविद्यालय के प्रोफेसर जेम्स यिफान चेन ने कहा, “ताइवान की तकनीक को हटाने से उसका ‘सिलिकन शील्ड’ कमजोर होगा। बिना सेमीकंडक्टर उद्योग के ताइवान की स्थिति यूक्रेन जैसी हो सकती है, जिसके पास परमाणु हथियार नहीं हैं।”

विपक्ष का विरोध

कुomintang (केएमटी) पार्टी के विधायक फू कुन-ची ने सवाल उठाया, “अगर टीएसएमसी अमेरिकी कंपनी बन गई और देश की रक्षा करने वाला ‘पवित्र पर्वत’ चला गया, तो ताइवान की राष्ट्रीय सुरक्षा कहां होगी?” एक अन्य विधायक को जू-चुन ने कहा कि टीएसएमसी जितना अधिक अमेरिका में उत्पादन करेगी, ताइवान का भू-राजनीतिक महत्व उतना ही कम होगा और अमेरिका के पास ताइवान की मदद करने का प्रोत्साहन भी घटेगा।

ट्रम्प का दृष्टिकोण

ट्रम्प ने कहा कि ताइवान पर आक्रमण “विनाशकारी” होगा, लेकिन इस निवेश से अमेरिकी हितों पर प्रभाव कम होगा। उन्होंने कहा, “यह सौदा हमें इस बेहद महत्वपूर्ण व्यवसाय में अमेरिका में बड़ी हिस्सेदारी देगा।” ट्रम्प के दूसरे कार्यकाल में अमेरिकी विदेश नीति में बड़े बदलाव देखे गए हैं, जिसमें यूक्रेन का समर्थन खत्म करना भी शामिल है।

ताइवान की रणनीति

ताइवान सरकार ट्रम्प प्रशासन के टैरिफ से बचने के लिए प्रयास कर रही है। उसने वाशिंगटन में सरकारी प्रतिनिधिमंडल भेजे हैं, रक्षा खर्च बढ़ाने और अमेरिका के साथ व्यापार अधिशेष को कम करने का वादा किया है। हालांकि, मंत्री कुओ ने इन सुझावों को खारिज करते हुए कहा कि टीएसएमसी का वैश्विक विस्तार टैरिफ से संबंधित नहीं है, बल्कि यह कंपनी के विकास का हिस्सा है।

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