BY: Yoganand Shrivastava
देशभर में बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने पटाखों पर बैन को लेकर बड़ा बयान दिया है। अदालत ने कहा कि अगर पटाखों पर प्रतिबंध लगाना है, तो यह केवल दिल्ली-एनसीआर तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि पूरे भारत में लागू होना चाहिए।
मुख्य न्यायाधीश बी. आर. गवई की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि स्वच्छ हवा का अधिकार सिर्फ एनसीआर के लोगों तक सीमित नहीं हो सकता, यह हर नागरिक का अधिकार है। उन्होंने यह भी कहा कि दिल्ली के लिए खास नीति बनाना सही नहीं, क्योंकि देश के अन्य शहरों में भी प्रदूषण का स्तर बेहद चिंताजनक है।
“हर जगह स्वच्छ हवा का अधिकार”
सीजेआई गवई ने सुनवाई के दौरान कहा:
“अगर एनसीआर के लोग स्वच्छ हवा में सांस लेने का हक रखते हैं, तो देश के बाकी हिस्सों के नागरिकों को यह हक क्यों न मिले? नीति पूरे देश के लिए समान होनी चाहिए। सिर्फ दिल्ली के लिए विशेष नीति बनाना उचित नहीं है।”
उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि पिछले साल सर्दियों में अमृतसर में प्रदूषण का स्तर दिल्ली से भी ज्यादा था। इस वजह से पटाखों पर बैन का फैसला पूरे भारत के लिए लागू करने पर विचार होना चाहिए।
दिल्ली-एनसीआर के आदेश के खिलाफ याचिका
यह टिप्पणी सुप्रीम कोर्ट ने उस याचिका पर सुनवाई करते हुए की, जिसमें दिल्ली-एनसीआर में पटाखों की बिक्री, भंडारण, परिवहन और उत्पादन पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने वाले आदेश को चुनौती दी गई थी। अदालत ने इस मामले पर सीएक्यूएम (Commission for Air Quality Management) को नोटिस जारी किया है और दो हफ्ते में जवाब मांगा है।
स्वास्थ्य का अधिकार और प्रदूषण मुक्त वातावरण
सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कहा कि संविधान का अनुच्छेद 21 नागरिकों को जीवन और स्वास्थ्य का अधिकार देता है, जिसमें प्रदूषण-मुक्त वातावरण में जीने का अधिकार भी शामिल है। अदालत का कहना है कि पटाखों पर लगी रोक को तब तक नहीं हटाया जा सकता, जब तक यह साबित न हो जाए कि “ग्रीन पटाखे” भी प्रदूषण का स्तर बेहद कम रखते हैं।
पुनर्विचार की संभावना नहीं
पीठ ने साफ कर दिया कि पिछले छह महीनों में दिए गए आदेशों को देखते हुए इस फैसले पर फिलहाल पुनर्विचार की कोई संभावना नहीं है। अदालत ने कहा कि दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण की स्थिति बेहद गंभीर है और इस समय जनस्वास्थ्य की रक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।





