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Sukma: लाल आतंक का खात्मा, 33 लाख के इनामी सहित 10 नक्सलियों ने हथियारों के साथ किया समर्पण

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रिपोर्ट- मनीष सिंह

Sukma: सुकमा पुलिस को नक्सल मोर्चे पर एक और बड़ी सफलता मिली है। शनिवार को कुल 10 वांटेड नक्सलियों ने पुलिस और सुरक्षा बलों के सामने आत्मसमर्पण किया। इनमें 33 लाख रुपये का कुल इनामी राशि घोषित नक्सली शामिल हैं। सभी ने भारी मात्रा में हथियारों के साथ आत्मसमर्पण किया है।

Sukma: भारी हथियार बरामद, पुलिस को बड़ी उपलब्धि

समर्पण करने वाले नक्सलियों के पास से निम्न हथियार मिले:

  • 1 AK-47 राइफल
  • 2 SLR राइफल
  • SLR BGL अटैचमेंट
  • 9 mm गन
  • BGL लॉन्चर

हथियारों की यह मात्रा और उनका ग्रेड बताता है कि पकड़े गए नक्सली संगठन के सक्रिय और खतरनाक कैडर से जुड़े थे।

  • मुख्य नक्सली जो हुए आत्मसमर्पण
  • गंगा कुंजाम (ACM) – ₹ 8 लाख इनामी, AK-47 के साथ
  • लेकम रामा (PCCM) – ₹ 5 लाख इनामी
  • ताती सोनी (PPCM) – SLR के साथ

इन तीनों के साथ कुल 10 इनामी नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया।

नक्सल मोर्चे पर पुलिस का बढ़ता दबाव

लगातार चल रहे ऑपरेशन प्रहार, सुरक्षा बलों की चौकसी और विकास कार्यों की पहुंच बढ़ने से नक्सली संगठनों पर दबाव बढ़ा है। पुलिस इस समर्पण को क्षेत्र में शांति स्थापित करने की महत्वपूर्ण उपलब्धि मान रही है। सुकमा पुलिस के अनुसार, आत्मसमर्पण करने वाले सभी नक्सलियों को शासन की पुनर्वास योजनाओं के तहत सुविधाएं प्रदान की जाएंगी और जांच प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। यह बड़ी कार्रवाई सुकमा जिले में नक्सल प्रभाव को और कमजोर करने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

छत्तीसगढ़ में जनवरी 2025 से अब तक नक्सली सरेंडर की स्थिति

जनवरी 2025 से अब तक छत्तीसगढ़ में नक्सल मोर्चे पर सुरक्षा बलों और सरकार की संयुक्त रणनीति का प्रभाव लगातार दिखा है। इस अवधि में कई जिलों बीजापुर, दंतेवाड़ा, नारायणपुर, कांकेर, सुकमा और राजनांदगांव—में नक्सलियों ने मुख्यधारा में लौटने का रास्ता चुना है। लगभग 180 से अधिक नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया, जिनमें कई प्रभावशाली और वांछित कमांडर शामिल रहे।

सरेंडर करने वालों में प्रमुख रूप से डीवीसीएम और एरिया कमांडर स्तर के नक्सली शामिल हैं, जिन्होंने लंबे समय तक संगठन में सक्रिय भूमिका निभाई थी। इन कमांडरों में माओवादी सेंट्रल कमेटी से जुड़े वरिष्ठ कैडर, विभिन्न डिविजनल कमेटियों के सदस्य और कई लाखों के इनामी नक्सली भी थे।

जनवरी से मार्च 2025 के बीच सुरक्षा बलों की लगातार कार्रवाई और विश्वसनीय पुनर्वास नीति के कारण सर्वाधिक सरेंडर देखने को मिले। कई नक्सलियों ने बताया कि जंगल में लगातार बढ़ती कठिनाइयों, संगठन में अविश्वास और विकास की मुख्यधारा से जुड़ने की इच्छा के कारण उन्होंने हथियार छोड़े।

सरकार की पुनर्वास योजना के तहत सभी सरेंडर किए हुए नक्सलियों को सुरक्षा, आर्थिक सहायता और रोजगार के अवसर प्रदान किए जा रहे हैं। यह सिलसिला प्रदेश में शांति और विकास की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

संपादकीय नजरिया: नक्सली सरेंडर, समाज और सरकार में विश्वास की वापसी

छत्तीसगढ़ में हालिया महीनों में जिस तेज़ी से नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है, वह दो समानांतर रणनीतियों की सफलता का संकेत है। पहला सुरक्षा बलों की सटीक कार्रवाई और दूसरा सरकार की पुनर्वास नीति का सकारात्मक प्रभाव है। एक ओर सुरक्षा बलों ने नक्सली ठिकानों पर लगातार प्रहार करके उनके नेटवर्क को कमजोर किया, संसाधन और नेतृत्व संरचना को झकझोरा। वहीं दूसरी ओर पुनर्वास नीति ने यह भरोसा जगाया कि मुख्यधारा में लौटने वालों को सम्मानजनक और सुरक्षित जीवन मिलेगा। इन दोनों प्रयासों के संयोजन ने नक्सली कैडर के बीच असुरक्षा और मोहभंग पैदा किया। संगठन के भीतर अविश्वास, लगातार दबाव और कठोर जीवनशैली ने भी आत्मसमर्पण को तेज़ किया है। आज बड़ी संख्या में नक्सलियों का सरेंडर केवल सुरक्षा जीत नहीं, बल्कि समाज और शासन के प्रति विश्वास की वापसी का संकेत है। यह बदलाव आने वाले समय में छत्तीसगढ़ के शांतिपूर्ण भविष्य की मजबूत नींव साबित हो सकता है।

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