BY: Yoganand Shrivastava
कांग्रेस नेता शशि थरूर ने शुक्रवार को अमेरिका द्वारा भारत पर लगाए गए टैरिफ के प्रभाव को लेकर गंभीर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि इस फैसले से भारत के निर्यात और रोजगार दोनों प्रभावित हो रहे हैं।
अमेरिका के टैरिफ का असर
शशि थरूर ने बताया कि अमेरिका ने भारत से आयातित वस्तुओं पर 50% टैरिफ लगाया है। इसमें रूस से तेल खरीदने के लिए अतिरिक्त 25% शुल्क भी शामिल है। उन्होंने कहा कि इससे सूरत के रत्न और आभूषण उद्योग, समुद्री खाद्य उद्योग और विनिर्माण क्षेत्रों में लगभग 1.35 लाख लोगों की नौकरियां समाप्त हो गई हैं।
थरूर ने यह भी सुझाव दिया कि भारत को निर्यात बाजारों में विविधता लानी होगी ताकि इस टैरिफ के दुष्प्रभाव को कम किया जा सके।
ट्रंप को अस्थिर बताया
शशि थरूर ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को अस्थिर बताते हुए कहा,
“ट्रंप बहुत ही अस्थिर व्यक्ति हैं और अमेरिकी शासन प्रणाली राष्ट्रपति को अत्यधिक शक्ति देती है। ट्रंप से पहले 44 या 45 राष्ट्रपति रहे हैं, लेकिन व्हाइट हाउस की ओर से इस तरह का व्यवहार किसी ने कभी नहीं किया।”
उन्होंने बताया कि ट्रंप कूटनीतिक मानकों का पालन नहीं करते और अक्सर विवादित बयान देते हैं। थरूर ने उदाहरण देते हुए कहा कि ट्रंप ने खुलेआम अपने लिए नोबेल शांति पुरस्कार की दावेदारी की और दुनिया के देशों की पीठ थपथपाने की बात कही, जो किसी भी विश्व नेता के लिए असामान्य है।
भारत के विकल्प और आगे की रणनीति
थरूर ने कहा कि टैरिफ के कारण भारत के लिए स्थिति चुनौतीपूर्ण हो गई है। उन्होंने कहा,
“पहले से ही नौकरियां चली गई हैं। रत्न और आभूषण उद्योग में 1.35 लाख लोगों की छंटनी हुई है। शुरुआती 25% टैरिफ और अतिरिक्त 25% जुर्माने के कारण कई उत्पादों का निर्यात मुश्किल हो गया है। भारत के पास अब मजबूती से आगे बढ़ने के अलावा कोई विकल्प नहीं।”
उन्होंने यह भी बताया कि भारत अमेरिकी बाजार तक पहुंच बनाने के लिए लगातार वार्ता कर रहा है और इसे सुनिश्चित करना आवश्यक है।
अतिरिक्त टैरिफ पर तंज
थरूर ने कहा कि अमेरिका द्वारा रूस से तेल खरीदने के लिए लगाया गया अतिरिक्त 25% टैरिफ कोई सामान्य शुल्क नहीं, बल्कि एक प्रकार का प्रतिबंध है। उन्होंने कहा कि यह चीन के लिए लागू नहीं किया गया, जबकि चीन रूस से अधिक तेल और गैस खरीद रहा है। उनका मानना है कि अमेरिका को सभी देशों के लिए समान नीति अपनानी चाहिए।





