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Sanchi New Packaging : 45 साल का भरोसा, अब नए अंदाज में सांची; बुंदेलखंड में नई ब्रांड पहचान का अनावरण

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रिपोर्ट- आदर्श दुबे, सागर

Sanchi New Packaging : बुंदेलखंड, 9 सितंबर 2026, चार दशक से ज्यादा समय से मध्यप्रदेश के घर-घर में भरोसे और शुद्धता की पहचान बना ‘सांची’ अब नए अंदाज में अपनी पहचान को आगे बढ़ा रहा है। 45 वर्षों की गौरवशाली विरासत को आधुनिक सोच और नए विजुअल स्वरूप से जोड़ते हुए सांची ने बुंदेलखंड में अपनी नई ब्रांड पहचान और री-डिजाइन की गई पैकेजिंग का अनावरण किया।

होटल दीपाली के सिग्नेचर हॉल में आयोजित इस खास रीब्रांडिंग समारोह में नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड (NDDB), वेस्ट जोन के रीजनल हेड वी. श्रीनिवास मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहे। कार्यक्रम में एमपीसीडीएफ के प्रबंध संचालक जयदेव बिस्वास, बुंदेलखंड दुग्ध संघ के मुख्य कार्यपालन अधिकारी संजय कुमार यादव और मध्यप्रदेश वित्त विभाग की संयुक्त संचालक हेमलता पटेल सहित विभागीय अधिकारी, वितरक और रिटेलर्स शामिल हुए।

सांची की नई पैकेजिंग सिर्फ बाहरी बदलाव नहीं, बल्कि बदलते दौर के साथ उपभोक्ताओं की पसंद, आधुनिकता और ब्रांड की विश्वसनीय विरासत को एक साथ जोड़ने की कोशिश है। यानी विरासत वही, भरोसा वही लेकिन सांची अब नए अंदाज में।

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Sanchi New Packaging : परंपरा से आधुनिकता तक… 45 साल बाद बदली सांची की ब्रांड पहचान, दूध संग्रह भी बढ़ा

नई ब्रांड पहचान के तहत सांची के दूध एवं अन्य दुग्ध उत्पादों की पैकेजिंग में आधुनिक रंगों, एकरूप लेआउट और आकर्षक डिजाइन को शामिल किया गया है। नई पैकेजिंग में मध्यप्रदेश की सांस्कृतिक एवं ग्रामीण विरासत से प्रेरित गोंड कला के तत्वों को भी प्रमुखता दी गई है। नई पहचान का उद्देश्य सांची की 45 वर्षों से अर्जित विश्वसनीयता को बरकरार रखते हुए इसे बदलते बाजार और आधुनिक उपभोक्ताओं की अपेक्षाओं के अनुरूप नई पहचान देना है।

मुख्य अतिथि श्री वी. श्रीनिवास, रीजनल हेड, वेस्ट जोन, NDDB ने कहा, “सांची मध्यप्रदेश की सहकारी डेयरी व्यवस्था की मजबूत पहचान है और पिछले 45 वर्षों में इसने उपभोक्ताओं का विश्वास अर्जित किया है। नई ब्रांड पहचान इस विरासत को आधुनिक बाजार की जरूरतों से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। नई पैकेजिंग में आधुनिक डिजाइन के साथ मध्यप्रदेश की सांस्कृतिक पहचान को भी स्थान दिया गया है। इससे सांची को नई पीढ़ी के उपभोक्ताओं के बीच और मजबूत पहचान बनाने में मदद मिलेगी।”

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एमपीसीडीएफ के प्रबंध संचालक श्री जयदेव बिस्वास ने कहा, “सांची की रीब्रांडिंग केवल पैकेजिंग और डिजाइन में बदलाव नहीं है, बल्कि यह बदलते समय के साथ आगे बढ़ने की हमारी प्रतिबद्धता का प्रतीक है। 45 वर्षों से उपभोक्ताओं का विश्वास हमारी सबसे बड़ी ताकत है। हमारा प्रयास है कि इस भरोसे को बनाए रखते हुए सांची को आधुनिक उपभोक्ता की पसंद और बाजार की नई संभावनाओं के अनुरूप और मजबूत बनाया जाए। नई ब्रांड पहचान से सांची के उत्पादों की बाजार में दृश्यता और बिक्री को बढ़ावा मिलेगा।”

बुंदेलखंड दुग्ध संघ के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री संजय कुमार यादव ने कहा, “बुंदेलखंड दुग्ध संघ के लिए सांची की नई ब्रांड पहचान एक महत्वपूर्ण पहल है। नई पैकेजिंग से सांची के उत्पादों को बाजार में एकरूपता और बेहतर पहचान मिलेगी। हमारा प्रयास है कि उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण एवं विश्वसनीय दुग्ध उत्पाद उपलब्ध कराने के साथ दुग्ध उत्पादक किसानों को भी मजबूत बाजार उपलब्ध कराया जाए। नई ब्रांडिंग से सांची के प्रति उपभोक्ताओं का जुड़ाव और मजबूत होगा तथा उत्पादों की पहुंच बढ़ाने में मदद मिलेगी।”

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मध्यप्रदेश वित्त विभाग की संयुक्त संचालक सुश्री हेमलता पटेल ने कहा, “सांची मध्यप्रदेश की सहकारी भावना और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से गहराई से जुड़ा ब्रांड है। इसकी नई पहचान परंपरा और आधुनिकता के बीच बेहतर संतुलन प्रस्तुत करती है। मुझे विश्वास है कि नया स्वरूप सांची को बदलते बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने के साथ उपभोक्ताओं और दुग्ध उत्पादक किसानों के बीच इसके जुड़ाव को और मजबूत करेगा।”

Sanchi New Packaging : पांच महीनों में दूध संग्रह में करीब 30 प्रतिशत वृद्धि

बुंदेलखंड दुग्ध संघ के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल से अगस्त 2026 के दौरान दूध संग्रह में पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में 29.8 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। अप्रैल-अगस्त 2025 के दौरान जहां इन पांच महीनों का कुल दैनिक औसत संग्रह 2,66,270 किलोग्राम रहा, वहीं अप्रैल-अगस्त 2026 में यह बढ़कर 3,45,623 किलोग्राम हो गया।

आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल 2025 में दूध संग्रह 56,613 किलोग्राम प्रतिदिन था, जो अप्रैल 2026 में बढ़कर 77,077 किलोग्राम हो गया। इसी तरह मई में यह 43,468 किलोग्राम से बढ़कर 63,120 किलोग्राम, जून में 43,092 से बढ़कर 58,944 किलोग्राम, जुलाई में 56,322 से बढ़कर 63,751 किलोग्राम तथा अगस्त में 66,775 से बढ़कर 82,731 किलोग्राम प्रतिदिन हो गया।

दूध संग्रह में लगातार हो रही वृद्धि क्षेत्र में सहकारी डेयरी व्यवस्था के विस्तार तथा दुग्ध उत्पादकों के बढ़ते जुड़ाव का संकेत है। यह वृद्धि सांची के लिए बढ़ते कच्चे माल के आधार और बाजार में अपनी उपस्थिति को और मजबूत करने की संभावनाओं को भी दर्शाती है।

सांची की नई ब्रांड पहचान के तहत दूध की विभिन्न श्रेणियों के साथ दही, पनीर, छाछ, मठ्ठा, चाय तथा अन्य दुग्ध उत्पादों को भी एकरूप और आधुनिक पैकेजिंग प्रदान की गई है। इसका उद्देश्य सांची के विभिन्न उत्पादों को बाजार में आसानी से पहचान योग्य बनाना तथा उपभोक्ताओं के बीच ब्रांड की दृश्यता और आकर्षण को बढ़ाना है।

नई पैकेजिंग में मध्यप्रदेश की कला और ग्रामीण जीवन से जुड़े तत्वों को शामिल किया गया है। गोंड कला से प्रेरित डिजाइन सांची की स्थानीय जड़ों को आधुनिक ब्रांडिंग के साथ जोड़ता है। इस तरह नई पहचान में परंपरा, आधुनिकता, गुणवत्ता और सहकारिता का समन्वय दिखाई देता है।

रीब्रांडिंग का उद्देश्य केवल उत्पादों का स्वरूप बदलना नहीं, बल्कि उपभोक्ताओं के साथ सांची के जुड़ाव को और मजबूत करना तथा आधुनिक बाजार में इसकी प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ाना है। एकरूप पैकेजिंग से उपभोक्ताओं को सांची के विभिन्न उत्पादों की पहचान करने में आसानी होगी और पूरे उत्पाद पोर्टफोलियो के लिए एक मजबूत एवं सुसंगत ब्रांड पहचान विकसित होगी।

सहकारी डेयरी व्यवस्था के केंद्र में दुग्ध उत्पादक किसान हैं। किसानों से दूध का संग्रह, उचित मूल्य और समय पर भुगतान, पशु चिकित्सा सुविधाएं, संतुलित पशु आहार की जानकारी तथा वैज्ञानिक डेयरी प्रबंधन संबंधी प्रशिक्षण जैसी गतिविधियों के माध्यम से दुग्ध उत्पादन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के प्रयास किए जाते हैं।

सांची के दूध एवं दुग्ध उत्पाद निर्धारित खाद्य सुरक्षा एवं गुणवत्ता मानकों के अनुरूप तैयार कर उपभोक्ताओं तक पहुंचाए जाते हैं। नई ब्रांड पहचान के साथ सांची अपनी 45 वर्ष पुरानी विश्वसनीयता को आधुनिक उपभोक्ता अनुभव से जोड़ते हुए नए बाजारों और नई पीढ़ी के उपभोक्ताओं तक पहुंचने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

‘स्वाद, सेहत, सांची’ के मूल संदेश के साथ नई ब्रांड पहचान सांची की समृद्ध विरासत को आधुनिक स्वरूप देने और इसे भविष्य की जरूरतों के अनुरूप मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।

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