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Machalpur News: गड्ढे नहीं भरे, डेढ़ किमी में लगा दिए 19 स्पीड ब्रेकर! 19 लाख के खर्च पर उठे सवाल

Machalpur News

Report: Pradeep bansal

Machalpur News माचलपुर में सड़क व्यवस्था को लेकर नगर परिषद की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में है। सड़क के गड्ढे अब भी जस के तस हैं, लेकिन करीब डेढ़ किलोमीटर के हिस्से में लगभग 19 स्पीड ब्रेकर लगाए जाने की बात सामने आई है। नगर क्षेत्र के साथ स्टेट हाईवे और प्रधानमंत्री सड़क पर रिफ्लेक्टर व स्पीड ब्रेकर लगाने में करीब 19 लाख रुपये खर्च होने की जानकारी के बाद अब काम की जरूरत, प्रक्रिया और अनुमति को लेकर सवाल उठ रहे हैं। कांग्रेस ने मामले में भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए जांच की मांग की है।

गड्ढों वाली सड़क पर ब्रेकरों की भरमार

Machalpur News स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क पर कई जगह बड़े-बड़े गड्ढे मौजूद हैं। ऐसे में लोगों का सवाल है कि प्राथमिकता सड़क के गड्ढे भरने की होनी चाहिए थी या जगह-जगह स्पीड ब्रेकर लगाने की। करीब डेढ़ किलोमीटर में 19 स्पीड ब्रेकर लगाए जाने से वाहन चालकों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

लोगों का कहना है कि सड़क की मूल समस्या दूर किए बिना ब्रेकरों की संख्या बढ़ाना यातायात व्यवस्था का स्थायी समाधान नहीं है। उनका कहना है कि पहले सड़क की हालत सुधारने पर ध्यान दिया जाना चाहिए था।

स्पीड ब्रेकर की अनुमति पर नगर परिषद और एमपीआरडीसी आमने-सामने

Machalpur News स्टेट हाईवे और एमपीआरडीसी के अधीन सड़क पर स्पीड ब्रेकर लगाने की अनुमति को लेकर भी स्थिति स्पष्ट नहीं है। नगर परिषद के सीएमओ देवेंद्र वत्स का कहना है कि नगरीय सीमा के भीतर नगर परिषद स्पीड ब्रेकर लगा सकती है।

Machalpur News वहीं, एमपीआरडीसी के डीएम ईश्वर चांदेली के मुताबिक, विभाग से इस काम के लिए किसी तरह की अनुमति नहीं ली गई है। उन्होंने कहा कि एमपीआरडीसी की सड़क पर इतने अधिक स्पीड ब्रेकर लगाना उचित नहीं है। मामले की जानकारी मिलने के बाद वे इस संबंध में अधिकारियों से चर्चा करेंगे।

19 लाख के खर्च का हिसाब सार्वजनिक करने की मांग

Machalpur News एमपीआरडीसी के बयान के बाद सवाल उठ रहा है कि यदि सड़क विभाग के अधीन है और संबंधित विभाग से अनुमति नहीं ली गई, तो वहां काम किस आदेश, प्रस्ताव या स्वीकृति के आधार पर कराया गया। कांग्रेस ने नगर परिषद की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए खर्च और पूरी प्रक्रिया की जांच की मांग की है।

मामले में यह स्पष्ट करने की मांग की जा रही है कि करीब 19 लाख रुपये किस मद से खर्च किए गए, कार्य का प्रस्ताव किसने तैयार किया, कार्यादेश किसने जारी किया, कितने स्पीड ब्रेकर और रिफ्लेक्टर लगाए गए, उनकी प्रति यूनिट लागत क्या रही और क्या तकनीकी स्वीकृति ली गई थी।

अब स्थानीय लोगों का सीधा सवाल है—जब ब्रेकर लग गए हैं तो सड़क के गड्ढे आखिर कब भरे जाएंगे? सड़क सुरक्षा के लिए जरूरत के मुताबिक रिफ्लेक्टर और स्पीड ब्रेकर जरूरी हो सकते हैं, लेकिन गड्ढों से जर्जर सड़क पर बड़ी संख्या में ब्रेकर लगाने से प्राथमिकता और खर्च दोनों पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

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