Sagar : 18 महीने का दावा, 4 साल बाद भी अधूरा ₹7.77 करोड़ का पठा जलाशय; बूंद-बूंद पानी को तरसते ग्रामीणों ने दी उग्र आंदोलन की चेतावनी

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रिपोर्टर-आदर्श दुबे

Sagar : मध्य प्रदेश के सागर जिले के अंतर्गत आने वाले ग्राम पठा खुर्द के ग्रामीण पिछले कई दशकों से पानी की भारी किल्लत से जूझ रहे हैं। ग्रामीणों की प्यास बुझाने और सिंचाई संकट को दूर करने के लिए करोड़ों की लागत से स्वीकृत हुआ ‘पठा जलाशय’ (तालाब) ठेकेदार की कथित लापरवाही और कछुआ गति के कारण आज तक अधूरा पड़ा है। जिस तालाब को 18 महीने में बनकर तैयार होना था, उसे चार वर्ष से अधिक का समय बीत जाने के बाद भी पूरा नहीं किया जा सका है। पानी के अभाव में दम तोड़ते मवेशियों और सूखी खेती को देख अब ग्रामीणों का सब्र टूट गया है। आक्रोशित ग्रामीणों ने एकत्रित होकर चेतावनी दी है कि यदि काम जल्द पूरा नहीं हुआ, तो वे उग्र आंदोलन और चक्काजाम करने को मजबूर होंगे।

Sagar केंद्रीय मंत्री ने किया था भूमिपूजन, ठेकेदार का 18 महीने का वादा हुआ फेल

इस सिंचाई परियोजना की शुरुआत बड़े दावों के साथ हुई थी, लेकिन धरातल पर नतीजा सिफर रहा:

  • करोड़ों का प्रोजेक्ट: नवंबर 2022 में तत्कालीन केंद्रीय मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने 7 करोड़ 77 लाख रुपये की भारी-भरकम लागत से बनने वाले इस पठा जलाशय का पूरे विधि-विधान से भूमिपूजन किया था।
  • दावे की खुली पोल: भूमिपूजन के दौरान जब केंद्रीय मंत्री ने समय-सीमा पूछी, तो मुख्य ठेकेदार सतीश पांडे ने डंके की चोट पर आश्वासन दिया था कि 18 महीने के भीतर तालाब पूरी तरह बनकर तैयार हो जाएगा।
  • 4 साल बाद भी अधर में: आज वर्ष 2026 में भी यह काम अधूरा है। ग्रामीणों का आरोप है कि नेताओं और विधायकों के सामने हाथ-पैर जोड़कर उन्होंने यह योजना स्वीकृत कराई थी, लेकिन ठेकेदार की मनमानी ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया।

Sagar “पेमेंट नहीं तो काम नहीं”: पेटी कांट्रेक्टर का तर्क, इंजीनियरों ने ब्लॉक किए नंबर

बंद पड़ी हैं मशीनें: मौके पर काम देख रहे पेटी ठेकेदार (Sub-contractor) पवन सेन का कहना है कि ऊपर से मुख्य विभाग द्वारा समय पर भुगतान (पेमेंट) नहीं किया जा रहा है, जिसके चलते काम की गति तेज नहीं हो पा रही है। वर्तमान में मौके पर सिर्फ 4 से 5 मजदूर पिचिंग का काम कर रहे हैं और ठेकेदार की मशीनें बंद पड़ी हैं।

Sagar संवादहीनता से बढ़ा गुस्सा:

ग्रामीणों का आरोप है कि जब वे काम की प्रगति जानने या अपनी समस्या बताने के लिए जिम्मेदार लोगों को फोन करते हैं, तो ठेकेदार फोन उठाना बंद कर देते हैं। हद तो यह है कि परियोजना से जुड़े इंजीनियरों ने परेशान ग्रामीणों के फोन नंबर तक ब्लैकलिस्ट में डाल दिए हैं।

Sagar मवेशी मर रहे प्यासे, ₹500 में टैंकर खरीदने को मजबूर ग्रामीण

परियोजना में हो रही देरी का सीधा खामियाजा स्थानीय जनता और बेजुबान पशुओं को भुगतना पड़ रहा है:

संकट का स्वरूपग्रामीणों की जमीनी हकीकत और दर्द
कृषि ठपजलाशय न बनने से क्षेत्र में सिंचाई की कोई व्यवस्था नहीं है, जिससे किसान खेती नहीं कर पा रहे हैं।
मवेशियों की मौतभीषण गर्मी में पानी न मिलने के कारण कई मवेशी और आवारा पशु प्यासे ही दम तोड़ रहे हैं।
आर्थिक बोझपीने और दैनिक खर्च के पानी के लिए ग्रामीणों को दूर-दराज के इलाकों से 500 रुपये प्रति टैंकर की दर से निजी पानी खरीदने पर मजबूर होना पड़ रहा है।

Sagar प्रशासन को अल्टीमेटम: उग्र आंदोलन और चक्काजाम की तैयारी

Sagar पठा खुर्द के ग्रामीणों ने बताया कि वे इस कछुआ गति के खिलाफ क्षेत्र के मंत्रियों, स्थानीय विधायक, सांसद सहित जिला कलेक्टर और एसडीएम (SDM) से कई बार लिखित शिकायत कर चुके हैं, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि इस वर्ष भी तालाब का काम पूरा नहीं हुआ, तो उन्हें अगले दो साल और पानी के लिए दर-दर भटकना पड़ेगा। कलेक्ट्रेट और तहसील के चक्कर काटकर थक चुके ग्रामीणों ने अब दो टूक लहजे में जिला प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि जलाशय का निर्माण युद्ध स्तर पर शुरू नहीं कराया गया, तो वे सड़कों पर उतरकर उग्र आंदोलन और चक्काजाम करेंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी।

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