घटना का संक्षिप्त विवरण
रायपुर पुलिस ने हाल ही में हिस्ट्रीशीटर भाइयों — वीरेंद्र और रोहित तोमर — के खिलाफ चल रहे कार्रवाई के तहत उनकी जैगुआर कार जब्त की है। इस लग्जरी वाहन की असलियत सामने तब आई, जब भिलाई निवासी मनोज कुमार वर्मा मौके पर पहुंचे और बताया कि वे पांच साल पहले भाइयों को ₹3 लाख उधार दिए थे और गाड़ी गिरवी रखी थी। उन्होंने यह भी बताया कि उन्होंने समय पर ₹8 लाख चुका दिए, फिर भी तोमर बंधु वाहन लौटाने से इंकार कर रहे थे।
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जांच से सामने आया दावा
- मनोज वर्मा के मुताबिक, यह गिरवी की गाड़ी थी, जो उन्होंने उधार देने के बदले के तौर पर छोड़ी थी।
- उन्होंने पूरा ब्याज सहित ₹8 लाख चुका दिया था, लेकिन तोमर बंधुओं ने फिर भी कार वापस नहीं की।
- इस खुलासे से कहानी में न्यायिक और फुटल्फिलमेंट दोनो का मिश्रण उभरता है — एक ओर गिरवी गाड़ी की बात, दूसरी ओर पुलिस की कानूनी जब्ती।
पुलिस कार्रवाई जारी
- इससे पहले रायपुर पुलिस ने तोमर भाइयों के भाठागांव स्थित आलीशान हवेली समेत ₹37 लाख कैश, हथियार, 70 तोला सोना, बीएमडब्ल्यू, ब्रेज़ा और थार सहित कई लगी लग्जरी कारें जब्त की।
- दोनों इतिहासशीटर अभी फ़रार हैं और पुलिस ने उनकी संपत्ति कुर्क करने की तैयारी शुरू कर दी है।
कानूनी पहलुओं की तहकीकात
| बिंदु | विवरण |
|---|---|
| गिरवी स्थिति | गिरवी रखी कार पर उधारकर्ता का दावा — लेकिन पुलिस जब्ती पर सवाल |
| स्वामित्व का सत्यापन | मनोज वर्मा के दस्तावेजों की जांच जरूरी — गिरवी रसीद, उधारी का रिकॉर्ड आदि |
| कानूनी स्थिति | गिरवी संपत्ति की जब्ती से पहले कोर्ट आदेश आवश्यक होता है — क्या पुलिस ने प्रक्रियाओं का पालन किया? |
| तोमर भाइयों की भूमिका | गिरवी की गाड़ी होने के बावजूद अगर पुलिस ने आतंकवाद या अपराध प्रवृत्ति के चलते जब्त किया तो केस की गूढ़ता बढ़ सकती है। |
अब आगे क्या होगा
- गिरवी रखने वाले दस्तावेजों की पुष्टि: मनोज वर्मा से गई हुई कागजातों की प्रमाणीकरण जांच।
- पुलिसिया स्पष्टता: जांच रिपोर्ट में साफाफ़ी हो कि एजेंसी ने किन आधारों पर गाड़ी जब्त की — गिरवी या अन्य संदिग्ध गतिविधि।
- तोमर भाइयों द्वारा जवाब: अगर वे पकड़े गए या कोर्ट में पेश होते हैं तो उनकी प्रतिक्रिया और आरजी की भूमिका महत्वपूर्ण होगी।
- कानूनी कार्रवाई: जुर्माने या जब्ती कानूनों के आधार पर दोबारा विचारणीय हो सकता है।





