पुणे के यवत गांव में सांप्रदायिक तनाव: मूर्तियां तोड़ी गईं, मस्जिद पर हमला, बाहरी लोगों पर सवाल

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पुणे के यवत गांव में सांप्रदायिक तनाव: मूर्तियां तोड़ी गईं, मस्जिद पर हमला, बाहरी लोगों पर सवाल

पुणे के यवत गांव में पिछले महीने से सांप्रदायिक तनाव की स्थिति बनी हुई है। इस विवाद की शुरुआत 26-27 जुलाई की रात हुई, जब एक मुस्लिम युवक पर छत्रपति शिवाजी महाराज की मूर्ति तोड़ने का आरोप लगा। उसी रात पास के गांवों में शिवलिंग और एक संत की मूर्ति को भी नुकसान पहुंचाया गया। इसके बाद भीड़ ने गांव की एक मस्जिद पर हमला किया और उस पर भगवा झंडा लहराया।

क्या यह घटनाएं अचानक हुईं या इसके पीछे कोई साजिश है?


विवाद की जड़: बाहर से आने वाले लोग या स्थानीय कारण?

दैनिक भास्कर की टीम ने मौके पर जाकर दोनों पक्षों, पुलिस और स्थानीय लोगों से बातचीत की। कई ग्रामीणों का कहना है कि विवाद गांव के निवासियों की वजह से नहीं, बल्कि बाहर से आए लोगों की वजह से हुआ।

ग्रामसभा में यह फैसला लिया गया कि बाहर से आने वाले सभी लोगों की जानकारी इकट्ठा की जाएगी, और तभी उन्हें सरकारी सुविधाएं दी जाएंगी।


हिंदू पक्ष के आरोप: मस्जिदों की संख्या बढ़ी और ‘लव जिहाद’

  • गांव में मुस्लिम आबादी लगभग 20% है, लेकिन मस्जिदों की संख्या पिछले 3 सालों में 2 से बढ़कर 7 हो गई है।
  • कुछ ग्रामीणों ने ‘लव जिहाद’ का मुद्दा उठाया और कहा कि मुस्लिम युवक हिंदू लड़कियों से शादी कर रहे हैं।
  • हालांकि, कई लोगों ने यह भी माना कि ये शादियां प्रेम विवाह हो सकती हैं और इसमें कोई जबरदस्ती नहीं है।

मुस्लिम पक्ष की सफाई: आरोपी गांव का नहीं, शराब के नशे में था

मुस्लिम समुदाय के लोगों का कहना है कि मूर्ति तोड़ने वाला युवक ‘आमिर’ शराब के नशे में था और वह स्थानीय नहीं था।

  • उनका कहना है कि गांव में हिंदू-मुस्लिम हमेशा से साथ रहते आए हैं।
  • आरोपी को सजा दी जाए, लेकिन पूरे समुदाय को दोषी न ठहराया जाए।

पोस्ट वायरल होने के बाद बढ़ी हिंसा

मूर्ति तोड़ने के कुछ दिन बाद एक आपत्तिजनक पोस्ट सोशल मीडिया पर वायरल हुई।

  • इसके बाद मस्जिद पर हमला हुआ और कुछ घरों में आग लग गई।
  • आरोपी युवक और उसके रिश्तेदारों के घर भी जला दिए गए।
  • पुलिस ने अब तक 93 लोगों को हिरासत में लिया है, जिनमें अधिकांश हिंदू और कुछ मुस्लिम हैं।

पुलिस का बयान: कोई साजिश नहीं

पुणे के एएसपी गणेश बिरादर के अनुसार:

“अभी तक किसी संगठित साजिश का कोई सबूत नहीं मिला है। घटनाएं आपस में जुड़ी जरूर हैं, लेकिन ये अचानक हुई घटनाएं थीं।”


इतिहास से जुड़ाव: शिवाजी महाराज और यवत

स्थानीय लोग बताते हैं कि शिवाजी महाराज का घोड़ा ‘भीमथणी’ प्रजाति का था, जो यवत क्षेत्र में पाया जाता है। इस वजह से शिवाजी की मूर्ति यहां के लोगों के लिए सम्मान का विषय है।


राजनीतिक प्रतिक्रिया: डिप्टी सीएम अजित पवार पहुंचे यवत

स्थिति बिगड़ने के बाद डिप्टी सीएम अजित पवार ने गांव का दौरा किया। उन्होंने कहा कि आपत्तिजनक पोस्ट करने वाला युवक नांदेड़ का मजदूर है।


यवत गांव की घटनाएं एक बार फिर यह दिखाती हैं कि छोटे विवाद कैसे सांप्रदायिक तनाव में बदल सकते हैं। प्रशासन की सक्रियता और ग्रामसभा द्वारा लिए गए फैसले से उम्मीद है कि भविष्य में ऐसे घटनाओं को रोका जा सके।

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