पोल्लाची केस का फैसला: सभी 9 आरोपियों को आजीवन कारावास, पीड़िताओं को मिला न्याय

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पोल्लाची केस

पोल्लाची केस के मुख्य बिंदु

  • सभी 9 आरोपियों को गैंगरेप और बार-बार बलात्कार के आरोप में आजीवन कारावास
  • मामले में कालेमेल, यौन शोषण और वीडियो रिकॉर्डिंग का हथियार इस्तेमाल किया गया।
  • 400 से अधिक डिजिटल सबूत और पीड़िताओं के बयानों ने दोषसिद्धि में अहम भूमिका निभाई।
  • केस की जांच पोल्लाची पुलिस से शुरू होकर CB-CID और CBI तक पहुंची।

पोल्लाची यौन उत्पीड़न मामला: पूरी जानकारी

1. फैसला और सजा

13 मई, 2025 को कोयंबटूर की सेशन्स कोर्ट ने 2019 पोल्लाची यौन उत्पीड़न मामले के सभी 9 आरोपियों को दोषी ठहराया। जज आर. नंदिनी देवी ने भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 376D (गैंगरेप), 376(2)(n) (बार-बार बलात्कार) और आपराधिक साजिश के तहत आजीवन कारावास की सजा सुनाई।

दोषी ठहराए गए आरोपी:

  • सबरीराजन (उर्फ ऋषवंत)
  • थिरुनवुकरासु
  • टी. वसंत कुमार
  • एम. सतिश
  • आर. मणि (उर्फ मणिवन्नन)
  • पी. बाबू
  • हैरोन पॉल
  • अरुलनाथम
  • अरुण कुमार

2. मामले की पृष्ठभूमि

2019 में सामने आया पोल्लाची केस एक शोषण रैकेट था जिसमें 8 से अधिक महिलाओं (एक कॉलेज छात्रा सहित) को निशाना बनाया गया। आरोपियों ने:

  • वीडियो बनाकर पीड़िताओं को धमकाया और शोषण किया
  • पैसे और यौन अनुग्रह के लिए ब्लैकमेल किया।
  • 2016 से 2018 तक यह सिलसिला चला, जिसके बाद गिरफ्तारियां हुईं।

3. जांच और कानूनी प्रक्रिया

  • पहले पोल्लाची पुलिस ने जांच की, बाद में CB-CID और CBI को केस सौंपा गया।
  • 200+ दस्तावेज और 400+ डिजिटल सबूत (फोरेंसिक जांचित वीडियो सहित) पेश किए गए।
  • सभी गवाहों ने सच बोला—पीड़िताओं की पहचान गवाह सुरक्षा अधिनियम के तहत गोपनीय रखी गई।

4. पीड़िताओं का संघर्ष

दोषसिद्धि के बावजूद, कार्यकर्ता चिंताएं जताते हैं:

  • केवल 8 पीड़िताओं ने ही शिकायत दर्ज कराई—अधिकांश ने सामाजिक कलंक के डर से चुप्पी साधी।
  • तमिलनाडु महिला संगठन ने मुआवजा, काउंसलिंग और सरकारी नौकरियों की मांग की।

5. राजनीतिक और सामाजिक प्रभाव

  • AIADMK सरकार पर FIR देरी से दर्ज करने और केस दबाने के आरोप लगे।
  • यह केस भारत में यौन हिंसा के मामलों में न्याय की एक परीक्षा माना गया।

यह फैसला भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?

पोल्लाची केस का फैसला यौन हिंसा और ब्लैकमेल मामलों में एक मिसाल बन गया है। लेकिन यह भी उजागर करता है:
✔ महिला सुरक्षा कानूनों को और सख्त बनाने की जरूरत।
✔ पीड़िताओं को त्वरित न्याय और सहायता प्रदान करने की आवश्यकता।
✔ समाज में जागरूकता बढ़ाने की मांग।

अंतिम विचार: न्याय की दिशा में एक कदम

पोल्लाची फैसला न्याय की एक बड़ी जीत है, लेकिन भारत को कानूनी प्रक्रियाओं और सामाजिक सोच में सुधार की जरूरत है। इस खबर को शेयर करें ताकि और लोग जागरूक हों—न्याय में देरी, न्याय से इनकार नहीं होना चाहिए।

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