पीएम मोदी और डोनाल्ड ट्रंप की समिट: चीन का मुकाबला करने के लिए अदानी ग्रुप का IMEC प्रोजेक्ट
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अमेरिका यात्रा और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ बैठक दुनियाभर में अहम असर डालने वाली है। इस बैठक में रक्षा सहयोग को बढ़ाने, व्यापारिक रिश्तों को मजबूत करने और चीन की बढ़ती आर्थिक और सैन्य ताकत का मुकाबला करने पर चर्चा होने की उम्मीद है। इस समिट का एक मुख्य पहलू भारत का महत्वकांक्षी इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट “इंडिया-मिडल ईस्ट-यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर” (IMEC) होगा, जो चीन की बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) का एक रणनीतिक विकल्प बनने का लक्ष्य रखता है। इस पहल में अदानी ग्रुप का अहम योगदान है, जिनके ऊर्जा, लॉजिस्टिक्स और इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश भारत की विदेश नीति के उद्देश्यों से मेल खाते हैं।
IMEC: चीन की BRI का रणनीतिक विकल्प
इंडिया-मिडल ईस्ट-यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर (IMEC) एक परिवर्तनकारी इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजना है, जो भारत को मध्य-पूर्व और यूरोप से जोड़ने का काम करेगी। यह चीन की BRI से अलग है, जिसे “डेब्ट-ट्रैप डिप्लोमेसी” का आरोप झेलना पड़ा है। IMEC एक पारदर्शी और मार्केट-ड्रिवन पहल है, जो यह सुनिश्चित करती है कि सहभागी देशों के पास अपने इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास पर नियंत्रण रहेगा।
IMEC के प्रमुख उद्देश्य:
- भारत, UAE, सऊदी अरब, इज़राइल और यूरोप को जोड़ने वाली 4,500 किलोमीटर की व्यापारिक सड़क।
- पारंपरिक समुद्री मार्गों की तुलना में यात्रा समय में महत्वपूर्ण कमी।
- नए बंदरगाहों, रेलवे नेटवर्क और ऊर्जा परियोजनाओं का विकास।
IMEC, महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों, जैसे मलक्का स्ट्रेट, होर्मुज स्ट्रेट और बाब एल-मांडब के जोखिमों को भी संबोधित करेगा, जो चीन की बढ़ती उपस्थिति को चुनौती देने का एक प्रयास है।
अदानी ग्रुप का IMEC में अहम योगदान
अदानी ग्रुप, गौतम अदानी के नेतृत्व में, भारत की रणनीतिक जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। इस ग्रुप के पास ऊर्जा, इंफ्रास्ट्रक्चर और लॉजिस्टिक्स के क्षेत्र में व्यापक पोर्टफोलियो है, जो IMEC की सफलता में योगदान दे सकता है। अदानी ग्रुप द्वारा इज़राइल के हाइफा पोर्ट में 70% हिस्सेदारी खरीदना IMEC के लिए एक बड़ा कदम है, जो भारत और इज़राइल के रिश्तों को भी मजबूती देता है।
इसके अलावा, अदानी ग्रुप इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में भी अपनी मौजूदगी बढ़ा रहा है। अदानी का मॉडल, जो चीन के राज्य-नियंत्रित मॉडल से अलग है, अधिक लचीला और बाजार-उन्मुख है। अदानी ग्रुप ने हाल ही में अमेरिकी ऊर्जा क्षेत्र में 10 बिलियन डॉलर का निवेश किया, जिससे 15,000 नई नौकरियां पैदा होंगी। यह कदम भारत-अमेरिका के रिश्तों को मजबूत करने के साथ-साथ वैश्विक आर्थिक स्थिरता में भी योगदान करेगा।

भारत-अमेरिका द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करना
प्रधानमंत्री मोदी की अमेरिका यात्रा उस समय हो रही है जब राष्ट्रपति ट्रंप की विवादास्पद व्यापार नीतियों के कारण कुछ चिंताएं बढ़ी हैं। बावजूद इसके, भारत और अमेरिका के बीच रक्षा सहयोग पिछले दो दशकों में लगातार बढ़ा है, खासकर चीन की बढ़ती ताकत के संदर्भ में।
बैठक के दौरान चर्चा के प्रमुख बिंदु:
- अमेरिकी सैन्य तकनीकी सहयोग: भारत, अमेरिका से जेट इंजन निर्माण, ड्रोन तकनीक और साइबर सुरक्षा प्रणालियों में सहयोग चाहता है।
- संयुक्त सैन्य अभ्यास: मालाबार नौसैनिक अभ्यास जैसे पहलुओं के जरिए दोनों देशों के बीच सैन्य सहयोग बढ़ा है।
- साइबर सुरक्षा सहयोग: बढ़ते साइबर खतरों के मद्देनज़र यह सहयोग महत्वपूर्ण रहेगा।
चीन के प्रभाव का मुकाबला
IMEC पहल और अदानी ग्रुप के निवेश भारत की चीन की बढ़ती शक्ति का मुकाबला करने की रणनीति का हिस्सा हैं। इसके द्वारा भारत वैकल्पिक व्यापार मार्ग तैयार कर रहा है और मध्य-पूर्व और यूरोप के प्रमुख देशों के साथ साझेदारियों को मजबूत कर रहा है। इसके अलावा, अदानी ग्रुप की क्लीन एनर्जी और उन्नत प्रौद्योगिकियों में भागीदारी, भारत को वैश्विक स्तर पर जिम्मेदार और स्थिर विकास के लिए एक अग्रणी खिलाड़ी बनाएगी।
संक्षेप में:
- IMEC: चीन की BRI के मुकाबले भारत का पारदर्शी और स्वदेशी विकल्प।
- अदानी ग्रुप का योगदान: इज़राइल के हाइफा पोर्ट में निवेश, ऊर्जा और इंफ्रास्ट्रक्चर में भागीदारी।
- भारत-अमेरिका संबंध: रक्षा, साइबर सुरक्षा और तकनीकी सहयोग में साझेदारी को बढ़ाना।
- चीन के खिलाफ रणनीति: IMEC और अदानी ग्रुप के निवेश के जरिए भारत की बढ़ती वैश्विक ताकत।




