प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 15वें भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए जापान पहुंचे हैं। यह दो दिवसीय यात्रा भारत-जापान संबंधों को और मजबूत बनाने के उद्देश्य से की जा रही है। इस दौरान रक्षा, प्रौद्योगिकी और व्यापार क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर विशेष जोर दिया जाएगा।
पीएम मोदी का जापान आगमन और स्वागत
- भारतीय समयानुसार सुबह 5:40 बजे पीएम मोदी जापान के हानेडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पहुंचे।
- उन्हें भव्य स्वागत किया गया।
- प्रधानमंत्री का उद्देश्य भारत-जापान व्यापार और निवेश संबंधों को और सुदृढ़ करना है।
पीएम मोदी का शेड्यूल – 29 अगस्त 2025
- सुबह 10:30 – 10:50: महत्वपूर्ण बिजनेस कार्यक्रम।
- सुबह 11:30 – दोपहर 1:10: जापान के प्रमुख गणमान्य व्यक्तियों से मुलाकात।
- दोपहर 1:15 – 1:20: शोरिनज़ान दारुमा जी मंदिर में मुख्य पुजारी द्वारा दारुमा गुड़िया भेंट।
- दोपहर 2:30 – शाम 5:15: भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन।
शिखर सम्मेलन का उद्देश्य और प्रमुख एजेंडे
- दोनों देशों के बीच रक्षा, तकनीक और अन्य क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाना।
- जापान द्वारा भारत में निवेश को दोगुना करने की संभावना।
- कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), सेमीकंडक्टर और उभरती प्रौद्योगिकियों में साझेदारी को बढ़ावा।
- सांस्कृतिक और सभ्यतागत रिश्तों को मजबूत करना।
पीएम मोदी की चीन यात्रा
जापान यात्रा के बाद, पीएम मोदी 31 अगस्त और 1 सितंबर को शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के शिखर सम्मेलन में शामिल होने चीन के तियानजिन शहर जाएंगे।
- चीन यात्रा का उद्देश्य पूर्वी लद्दाख में सीमा विवाद के बाद उत्पन्न तनाव को कम करना।
- इस दौरान पीएम मोदी की शी चिनफिंग, व्लादिमीर पुतिन और अन्य शीर्ष नेताओं से महत्वपूर्ण बैठक होने की संभावना।
- द्विपक्षीय संबंधों को सामान्य करने और क्षेत्रीय शांति को बढ़ावा देने पर चर्चा।
भारत-जापान और भारत-चीन संबंधों का महत्व
- जापान के साथ व्यापार, निवेश और तकनीकी सहयोग बढ़ाना।
- चीन के साथ राजनयिक संबंधों को सामान्य करना।
- क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर शांति, सुरक्षा और विकास को प्रोत्साहन देना।
पीएम मोदी ने इस यात्रा के पहले कहा, “मुझे पूरा विश्वास है कि मेरी जापान और चीन की यात्राएं न केवल भारत के राष्ट्रीय हितों को मजबूत करेंगी, बल्कि वैश्विक शांति और विकास में भी अहम भूमिका निभाएंगी।”
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जापान और चीन यात्रा रणनीतिक और आर्थिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है। दोनों देशों के साथ सहयोग और संवाद बढ़ाने की कोशिश से भारत का वैश्विक नेतृत्व और आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।