BY: MOHIT JAIN
जैन धर्म में पर्युषण पर्व 10 दिवसीय महत्वपूर्ण त्योहार के रूप में मनाया जाता है। यह पर्व आत्म-चिंतन, तप, त्याग और क्षमा का प्रतीक है। पर्युषण महापर्व आज 28 सितंबर 2025 से शुरू हो गए हैं।
इस दौरान जैन अनुयायी अपने जीवन की समीक्षा करते हैं, बुरे कर्मों का त्याग करते हैं और धार्मिक ग्रंथों का अध्ययन करते हैं।
पर्युषण पर्व क्या है?
पर्युषण का मुख्य उद्देश्य है आत्मिक शुद्धि और पापों से मुक्ति।
- लोग इस पर्व में ईर्ष्या, अहंकार और विवाद से दूर रहते हैं।
- ध्यान और उपवास का पालन करते हैं।
- धार्मिक ग्रंथों का अध्ययन कर ‘जिनेन्द्र भगवान’ के बताए मार्ग पर चलने का प्रयास करते हैं।
- क्षमा मांगना और दूसरों के प्रति दया दिखाना प्रमुख पहलू हैं।
श्वेतांबर और दिगंबर में अंतर
जैन धर्म में दो मुख्य संप्रदाय हैं: श्वेतांबर और दिगंबर।
संप्रदाय | पर्युषण की अवधि | पर्व का नाम |
---|---|---|
श्वेतांबर | 21 अगस्त – 28 अगस्त | अष्टान्हिका (8 दिन) |
दिगंबर | 28 अगस्त – 6 सितंबर | दसलक्षण (10 दिन) |
- श्वेतांबर 8 दिन तक उपवास और धार्मिक अनुष्ठान करते हैं।
- दिगंबर 10 दिन तक दसलक्षण पालन करते हैं।
दसलक्षण क्या है ?
दसलक्षण धर्म दस मुख्य गुण हैं जिन्हें पर्युषण पर्व में अपनाया जाता है:
- उत्तम क्षमा धर्म – दूसरों को माफ करना
- उत्तम मार्दव धर्म – नम्रता
- उत्तम आजर्व धर्म – अहिंसा
- उत्तम शौच धर्म – शुद्धता
- उत्तम सत्य धर्म – सत्य बोलना
- उत्तम संयम धर्म – इंद्रियों पर नियंत्रण
- उत्तम तप धर्म – तपस्या और संयम
- उत्तम त्याग धर्म – अनावश्यक वस्तुओं का त्याग
- उत्तम आकिंचन धर्म – आसक्ति छोड़ना
- उत्तम ब्रहचर्य धर्म – संयम और आध्यात्मिकता
ये दस गुण जीवन को शुद्ध और धर्मपरायण बनाने में मदद करते हैं।
पर्युषण पर्व का महत्व
- यह समय विकारों का त्याग और आत्म-चिंतन करने का है।
- अनुयायी उन लोगों से क्षमा मांगते हैं जिनके साथ उन्होंने गलत किया।
- इन दिनों अनुयायी ऐसा कोई काम या कठोर वचन नहीं करते और कहते जिससे किसी का दिल दुखे।
- इन दिनों बाहर का भोजन पूरी तरह से वर्जित और घर का शुद्ध भोजन ही ग्रहण करते हैं।
- यह पर्व सत्य और अहिंसा के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।
पर्युषण पर्व में क्या करें?
- धार्मिक ग्रंथों का पढ़ना और अध्ययन करना
- उपवास और साधना का पालन
- दूसरों से क्षमा मांगना और क्षमा देना
- जीवन में ईर्ष्या, अहंकार और विवाद से दूर रहना
पर्युषण पर्व न केवल धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि यह आत्म-संयम और नैतिकता को अपनाने का भी संदेश देता है। इस पर्व में आप अपने अंदर की बुराईयों को छोड़कर शांति, दया और आत्म-शुद्धि की ओर बढ़ सकते हैं।