ग्वालियर का चमत्कारी गणेश मंदिर: 350 साल पुरानी है प्रतिमा, सिर्फ राजस्थानी लड्डुओं से लगता है भोग

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ग्वालियर का चमत्कारी गणेश मंदिर: 350 साल पुरानी है प्रतिमा, सिर्फ राजस्थानी लड्डुओं से लगता है भोग

BY: MOHIT JAIN

देशभर में गणेशोत्सव की शुरुआत के साथ ही ग्वालियर के अर्जी वाले गणेश मंदिर में भक्तों का तांता लगना शुरू हो गया है। यह मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है बल्कि अपनी परंपराओं और चमत्कारिक कथा के लिए भी मशहूर है।

फूलबाग गुरुद्वारे के सामने MLB रोड पर स्थित यह प्रतिमा लगभग 350 साल पुरानी मानी जाती है।


प्रतिमा की अद्भुत कथा

माना जाता है कि पहले यहां लोग वर्षों तक एक बड़े पत्थर की पूजा करते थे।

  • साल 1980 में इस पत्थर से एक चमत्कार हुआ।
  • पत्थर ने अपना चोला त्याग दिया, जिसका वजन करीब एक क्विंटल निकला।
  • तभी से भगवान गणेश की यह दिव्य प्रतिमा अपने वर्तमान स्वरूप में प्रकट हुई।
  • प्रतिमा के दोनों ओर रिद्धि और सिद्धि की मूर्तियां भी स्थापित हैं।

सिर्फ राजस्थानी लड्डुओं से लगता है भोग

इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता है कि यहां गणेशजी को केवल राजस्थान से मंगाए गए मोटी बूंदी के लड्डू का ही भोग लगाया जाता है।

भक्त मानते हैं कि अगर कोई व्यक्ति यहां आकर लगातार 7 या 11 बुधवार श्रद्धा से अर्जी लगाता है, तो उसकी मनोकामना अवश्य पूरी होती है।


11 दिनों तक भव्य श्रृंगार

गणेश चतुर्थी से शुरू होने वाले 11 दिनों तक मंदिर में विशेष आयोजन होंगे।

  • भगवान गणेश को प्रतिदिन अलग-अलग विशेष पोशाकों से सजाया जाएगा।
  • मंदिर परिसर और आसपास की गलियां “गणपति बप्पा मोरया” के जयकारों से गूंज उठेंगी।
  • बुधवार को यहां भक्तों की इतनी भीड़ होती है कि सड़क पर घंटों तक जाम लगना आम बात है।

मंदिर कई नाम से प्रसिद्ध

अर्जी वाले गणेश मंदिर को लोग अलग-अलग नामों से भी जानते हैं:

  • अर्जी वाले गणेश
  • कांच वाले गणेश
  • कुंवारों के गणेश

इसकी ख्याति इतनी दूर-दूर तक फैली है कि यहां हर दिन सैकड़ों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं।


ग्वालियर का अर्जी वाले गणेश मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है बल्कि यह परंपराओं और चमत्कारों से जुड़ा एक ऐसा धाम है, जहां श्रद्धा से की गई प्रार्थना अवश्य पूर्ण होती है। गणेशोत्सव के दौरान यहां का वातावरण भक्तिमय उत्साह और परंपरागत श्रृंगार के कारण अद्भुत हो जाता है।

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