मध्यप्रदेश में खेलों की 70 वर्षों की यात्रा: परंपरा से आधुनिकता तक

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मध्यप्रदेश में खेलों की 70 वर्षों की यात्रा: परंपरा से आधुनिकता तक

BY: MOHIT JAIN

स्वतंत्रता के बाद से लेकर आज तक मध्यप्रदेश ने खेलों की दुनिया में एक लंबी और प्रेरणादायक यात्रा तय की है। जहाँ शुरुआती दौर में खेल केवल शौक और सीमित दायरे तक सीमित थे, वहीं आज यह प्रदेश भारत के खेल मानचित्र पर एक मजबूत पहचान बना चुका है।

इंदौर, भोपाल, ग्वालियर और उज्जैन जैसे शहरों ने न सिर्फ क्रिकेट, हॉकी और मल्लखम्ब को पहचान दिलाई, बल्कि राज्य को खेल प्रतिभा का गढ़ भी बनाया। ग्रामीण मैदानों से लेकर आधुनिक स्पोर्ट्स साइंस सेंटर तक, यह यात्रा परंपरा और आधुनिकता का संगम है।


शुरुआती दशक : क्रिकेट और पारंपरिक खेलों का दौर

  • 1950-1980 के बीच मध्यप्रदेश की पहचान क्रिकेट और मल्लखम्ब जैसे खेलों से जुड़ी।
  • होलकर क्रिकेट टीम ने रणजी ट्रॉफी में लगातार जीत हासिल कर प्रदेश को राष्ट्रीय पहचान दिलाई।
  • ग्वालियर और उज्जैन ने मल्लखम्ब को नई पहचान दी, जिसे बाद में राज्य खेल का दर्जा भी मिला।

हॉकी की नर्सरी : भोपाल की शान

भोपाल को लंबे समय से “हॉकी की नर्सरी” कहा जाता है।

  • ध्यानचंद के बेटे अशोक कुमार, ज़फर इक़बाल, असलम शेरखान और समीर दाद जैसे खिलाड़ियों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नाम कमाया।
  • महिला हॉकी अकादमी ग्वालियर (2006) और पुरुष हॉकी अकादमी भोपाल (2007) ने नई पीढ़ी को तैयार किया।
  • इटारसी के विवेक सागर प्रसाद ने टोक्यो-2020 और पेरिस-2024 ओलंपिक में भारत को कांस्य पदक दिलाने में अहम भूमिका निभाई।

खेल अधोसंरचना : परंपरा से आधुनिकता की ओर

मध्यप्रदेश सरकार ने खेलों को बढ़ावा देने के लिए आधुनिक सुविधाओं और अकादमियों की स्थापना की।

  • मल्लखम्ब को 2013 में राज्य खेल घोषित किया गया।
  • खिलाड़ियों को सम्मानित करने के लिए विक्रम अवॉर्ड जैसी परंपराएं शुरू हुईं।
  • भोपाल की शूटिंग अकादमी ऑफ एक्सलेंस (2007) अत्याधुनिक शूटिंग रेंज से सुसज्जित है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खिलाड़ियों को तैयार कर रही है।

वॉटर स्पोर्ट्स : बड़े तालाब से मिली नई पहचान

  • भोपाल के बड़े तालाब में वॉटर स्पोर्ट्स अकादमी ऑफ एक्सलेंस स्थापित की गई।
  • यहाँ कयाकिंग-केनोइंग, रोइंग और सेलिंग की ट्रेनिंग दी जाती है।
  • पैरा-कयाकिंग/केनोइंग में प्राची यादव ने एशियन पैरा गेम्स में भारत का नाम रोशन किया।

राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय उपलब्धियाँ

  • खेलो इंडिया यूथ गेम्स 2025 में मध्यप्रदेश शीर्ष पाँच राज्यों में शामिल रहा।
  • शूटर ऐश्वर्य प्रताप सिंह तोमर ने एशियाई चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीता।
  • प्रदेश में आज 18 उत्कृष्टता अकादमियाँ, 22 हॉकी टर्फ और 15 से अधिक एथलेटिक ट्रैक सक्रिय हैं।

आधुनिक खेल विज्ञान : नई दिशा

खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तैयार करने के लिए स्पोर्ट्स साइंस सेंटर और हाई परफॉर्मेंस ट्रेनिंग अकादमी की शुरुआत की गई।

  • यहाँ खिलाड़ियों को फिजियोथेरेपी, बायो-मैकेनिक्स, न्यूट्रिशन और साइकोलॉजिकल काउंसलिंग जैसी सुविधाएँ दी जाती हैं।
  • अत्याधुनिक जिम, रिकवरी पूल और वीडियो एनालिटिक्स लैब खिलाड़ियों को वैज्ञानिक प्रशिक्षण उपलब्ध करा रहे हैं।

भविष्य की ओर कदम

  • भोपाल के नाथू बरखेड़ा में बहुखेल अंतर्राष्ट्रीय परिसर और स्पोर्ट्स साइंस यूनिवर्सिटी की योजना पर काम जारी है।
  • राज्य ने 2028 नेशनल गेम्स की मेजबानी के लिए बोली लगाई है।
  • जल-पर्यटन और एशियन रोइंग चैंपियनशिप जैसी घोषणाएँ खेलों को नई ऊँचाई देंगी।

खिलाड़ियों को मिला सम्मान

मध्यप्रदेश सरकार की नीति रही है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को पुरस्कार राशि और सरकारी सेवाओं में नियुक्ति दी जाए।

  • हॉकी खिलाड़ी विवेक सागर प्रसाद को एक करोड़ रुपये की राशि और पुलिस सेवा में डीएसपी पद दिया गया।
  • विक्रम अवॉर्ड विजेता खिलाड़ियों को भी शासकीय सेवा में नियुक्ति दी जाती है।

पिछले 70 वर्षों की यात्रा यह दर्शाती है कि मध्यप्रदेश ने खेलों को सिर्फ प्रतिस्पर्धा का माध्यम नहीं माना, बल्कि उन्हें संस्कृति, परंपरा और विज्ञान का संगम बना दिया। आज प्रदेश न सिर्फ भारत के खेल मानचित्र पर बल्कि वैश्विक खेल जगत में भी अपनी मजबूत पहचान रखता है।

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