BY: Yoganand Shrivastva
भारत में 94 साल बाद जातिगत जनगणना होने जा रही है, और इसके ऐलान के साथ ही विपक्षी दलों में श्रेय लेने की होड़ मच गई है। बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में यह ऐतिहासिक फैसला लिया गया कि केंद्र सरकार पूरे देश में जातिगत जनगणना कराएगी।
इस फैसले के बाद दिल्ली से लेकर बिहार तक राजनीतिक पोस्टर वॉर शुरू हो गया है। विपक्ष के कई दल इस निर्णय का श्रेय अपने नेताओं को दे रहे हैं।
कौन ले रहा है जातिगत जनगणना का श्रेय?
- कांग्रेस पार्टी इसे राहुल गांधी की बड़ी जीत बता रही है। पटना में लगे पोस्टरों में राहुल गांधी को धन्यवाद देते हुए लिखा गया –
“सरकार किसी की हो, सिस्टम गांधी का ही चलेगा।” - वहीं राजद (राष्ट्रीय जनता दल) ने भी अपनी मौजूदगी दर्ज कराई है। पटना की सड़कों पर लगे पोस्टरों में लालू प्रसाद यादव और तेजस्वी यादव को जाति जनगणना के लिए धन्यवाद दिया गया है।
- दिल्ली की सड़कों पर भी कांग्रेस नेताओं ने पोस्टर लगाए हैं जिनमें लिखा है –
“झुकती है दुनिया, झुकाने वाला चाहिए।”
धर्मेंद्र प्रधान का पलटवार
केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने विपक्ष पर तीखा प्रहार करते हुए कहा:
“फैसले के बाद कुछ लोग भड़क उठे और कहने लगे कि सरकार उनकी है, लेकिन सिस्टम उनका है। 1951 में सरकार और सिस्टम किसके हाथ में था? अगर बाबा साहब अंबेडकर, महात्मा गांधी और संविधान सभा की भूमिका नहीं होती, तो देश में आज आरक्षण भी न होता। नेहरू जाति आधारित आरक्षण के विरोधी थे। मंडल आयोग की रिपोर्ट को 10 साल तक रोके रखने वाली कांग्रेस अब इसका क्रेडिट लेना चाहती है? राजीव गांधी भी ओबीसी आरक्षण के खिलाफ थे। कांग्रेस ने हमेशा वंचितों, दलितों और आदिवासियों के साथ छल किया है।”
जाति जनगणना की घोषणा
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इस फैसले की जानकारी देते हुए कहा:
“केंद्र सरकार ने पूरे देश में जातिगत जनगणना कराने का निर्णय लिया है। यह आज़ाद भारत में पहली बार है जब केंद्र की ओर से जातियों की गिनती करवाई जाएगी।”
उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए यह भी जोड़ा कि:
“कांग्रेस ने जाति जनगणना के मुद्दे को सिर्फ अपने राजनीतिक फायदे के लिए इस्तेमाल किया है।”
जहां एक ओर मोदी सरकार जातिगत जनगणना के ऐतिहासिक फैसले के साथ सामाजिक न्याय की दिशा में कदम बढ़ा रही है, वहीं दूसरी ओर विपक्षी दल इस फैसले का राजनीतिक श्रेय लेने की होड़ में लगे हैं। पटना और दिल्ली की सड़कों पर लगे पोस्टर इसकी गवाही दे रहे हैं कि आने वाले चुनावों में यह मुद्दा एक बड़ा राजनीतिक हथियार बनने जा रहा है।





