BY: Yoganand Shrivastva
रतलाम (मध्य प्रदेश): सरकारी अस्पतालों की लापरवाही और असंवेदनशीलता का एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है। एक गर्भवती महिला को अस्पताल में भर्ती करने से इनकार कर दिया गया, जिसके बाद उसका पति उसे ठेले पर अस्पताल तक ले जाने को मजबूर हुआ। लेकिन रास्ते में ही महिला ने बच्चे को जन्म दे दिया, डिलीवरी पूरी नहीं हो पाई और नवजात की मौत हो गई।
कैसे हुआ यह दर्दनाक हादसा?
यह घटना 23 मार्च की है। सैलाना के कालिका माता मंदिर रोड निवासी कृष्णा ग्वाला अपनी गर्भवती पत्नी नीतू को सुबह 9 बजे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले गया था। वहां मौजूद नर्स चेतना चारेल ने यह कहकर वापस भेज दिया कि डिलीवरी में अभी दो-तीन दिन का समय है।
रात 1 बजे जब नीतू को तेज प्रसव पीड़ा हुई तो कृष्णा उसे फिर अस्पताल लेकर पहुंचा। इस बार नर्स गायत्री पाटीदार ड्यूटी पर थी। उसने महिला की जांच के बाद कहा कि डिलीवरी में अभी 15 घंटे लगेंगे और भर्ती करने से मना कर दिया।
रास्ते में हुई डिलीवरी, नवजात की मौत
घर लौटने के बाद करीब एक घंटे बाद नीतू को असहनीय दर्द हुआ। कोई साधन न होने की वजह से कृष्णा पत्नी को ठेले पर लिटाकर अस्पताल की तरफ दौड़ा। लेकिन रास्ते में ही डिलीवरी हो गई। जब वह रात 3 बजे अस्पताल पहुंचा, तब तक बच्चा जीवित नहीं था।
ड्यूटी पर मौजूद नर्स ने किसी तरह बची हुई डिलीवरी पूरी की, लेकिन नवजात मृत पाया गया। घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है, जिसमें कृष्णा अपनी पत्नी को ठेले पर अस्पताल ले जाता नजर आ रहा है।
अस्पताल प्रशासन पर गंभीर आरोप
कृष्णा ग्वाला ने इस लापरवाही के खिलाफ एसडीएम मनीष जैन को शिकायत दी है। एसडीएम ने मामले की जांच कर उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
स्वास्थ्य सुविधाओं पर बड़ा सवाल
यह घटना हमारे स्वास्थ्य तंत्र की असंवेदनशीलता को उजागर करती है। सवाल उठता है कि अगर अस्पताल ने सही समय पर महिला को भर्ती कर लिया होता तो क्या बच्चे की जान बचाई जा सकती थी?
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