नागपुर: ये मुलाकात इतिहास के पन्नों में होगी दर्ज, ये हैं राजनीतिक और सांस्कृतिक मायने !

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Nagpur: This meeting will be recorded in the pages of history

BY: Vijay Nandan

नागपुर: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 30 मार्च को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के मुख्यालय जाएंगे। यह यात्रा हिंदू नव वर्ष के पहले दिन होगी और यह किसी भी प्रधानमंत्री की RSS मुख्यालय की पहली यात्रा होगी। इस ऐतिहासिक यात्रा के दौरान मोदी RSS प्रमुख मोहन भागवत से भी मुलाकात करेंगे।

मोदी की RSS मुख्यालय यात्रा का महत्व

प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा भारतीय राजनीति में एक महत्वपूर्ण पल साबित होगी। RSS भारतीय जनता पार्टी (BJP) का विचारधारात्मक मार्गदर्शक है, और मोदी का यह दौरा सरकार और RSS के बीच मजबूत संबंधों को दर्शाता है। यह यात्रा न केवल राजनीतिक बल्कि सांस्कृतिक रूप से भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह हिंदू नव वर्ष के दिन हो रही है।

मोदी की यात्रा का कार्यक्रम

मोदी 30 मार्च को नागपुर में माधव नेत्रालय आई इंस्टीट्यूट एंड रिसर्च सेंटर के नए भवन का शिलान्यास करेंगे। यह संस्थान RSS से जुड़ा हुआ है। इस कार्यक्रम में RSS प्रमुख मोहन भागवत, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी भी शामिल होंगे। नए भवन में 250 बेड, 14 ओपीडी और 14 मॉड्यूलर ऑपरेशन थिएटर होंगे।

शेड्यूल….

  1. माधव नेत्रालय इवेंट:
    • क्या होगा? 250 बेड, 14 ऑपरेशन थिएटर वाले नए हॉस्पिटल का शिलान्यास।
    • कौन होगा शामिल? मोदी, मोहन भागवत, CM फडणवीस, नितिन गडकरी।
    • खास बात: 2024 चुनाव के बाद मोदी-भागवत की पहली सार्वजनिक मुलाकात
  2. RSS हेडक्वार्टर दौरा:
    • लोकेशन: नागपुर का रेशम बाग इलाका
    • चर्चा के टॉपिक्स: BJP का नया अध्यक्ष, 2025 की रणनीति, संघ-सरकार तालमेल।

मोदी और भागवत की मुलाकात

मोदी और भागवत इस कार्यक्रम में एक साथ मंच साझा करेंगे। यह 2014 के बाद से तीसरी बार होगा जब दोनों नेता एक साथ मंच पर होंगे। इसके अलावा, मोदी RSS मुख्यालय में भागवत से मुलाकात कर सकते हैं। यह मुलाकात BJP के नए अध्यक्ष की नियुक्ति सहित कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा का मौका होगा।

मोदी पर RSS का प्रभाव

प्रधानमंत्री मोदी ने अक्सर RSS के अपने जीवन पर प्रभाव के बारे में बात की है। हाल ही में लेक्स फ्रिडमैन के पॉडकास्ट में मोदी ने कहा कि RSS ने उन्हें जीवन का उद्देश्य समझने में मदद की। उन्होंने कहा, “RSS आपको जीवन के उद्देश्य की ओर एक स्पष्ट दिशा देता है। देश सब कुछ है, और लोगों की सेवा करना ईश्वर की सेवा करने के समान है।”

मोदी आठ साल की उम्र में RSS से जुड़े थे और 1971 में 21 साल की उम्र में गुजरात में RSS के पूर्णकालिक कार्यकर्ता बन गए।

पीएम की संघ कार्यालय पहली यात्रा

  • मोदी की RSS मुख्यालय यात्रा किसी भी प्रधानमंत्री की पहली यात्रा होगी।
  • यह यात्रा हिंदू नव वर्ष के दिन होगी, जो इसे सांस्कृतिक रूप से भी महत्वपूर्ण बनाती है।
  • मोदी और भागवत की मुलाकात BJP के नए अध्यक्ष की नियुक्ति सहित कई मुद्दों पर चर्चा का मौका होगी।
  • मोदी ने RSS के अपने जीवन पर गहरे प्रभाव को स्वीकार किया है।

यह यात्रा न केवल राजनीतिक बल्कि सांस्कृतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है, और यह सरकार और RSS के बीच मजबूत संबंधों को दर्शाती है।



क्यों है यह दौरा चर्चा में?

  • राजनीतिक समीकरण: JP नड्डा के बाद BJP अध्यक्ष पद को लेकर RSS से सलाह-मशविरा।
  • सांस्कृतिक संदेश: हिंदू नववर्ष पर RSS से जुड़कर “सांस्कृतिक राष्ट्रवाद” को बढ़ावा।
  • मोदी का RSS कनेक्शन: 8 साल की उम्र से संघ के स्वयंसेवक, 1971 में पूर्णकालिक प्रचारक बने। (“RSS ने मुझे राष्ट्र सेवा का मंत्र दिया” – मोदी, लेक्स फ्राइडमैन पॉडकास्ट में)
  • यह दौरा मोदी की ‘देशभक्ति नीतियों’ को RSS के समर्थन से जोड़ने का अवसर है।
  • RSS के साथ मजबूत तालमेल से BJP की ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ योजना को बल मिल सकता है।

नागपुर दौरे का राजनीतिक गणित

पहलूविवरण
तिथि30 मार्च 2025 (गुड़ी पड़वा)
मुख्य एजेंडाRSS के साथ भविष्य की रणनीति पर चर्चा
राजनीतिक लाभसंघ-बीजेपी एकता का प्रदर्शन, 2025 विधानसभा चुनाव की तैयारी
चुनौतीविपक्षी दलों द्वारा “संघ हस्तक्षेप” का मुद्दा उठाने की आशंका

जानिए क्या है RSS-HQ का महत्व?

  • स्थापना: 1925 में डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने की।
  • विशेषता: रेशम बाग में स्थित यह मुख्यालय RSS की सभी गतिविधियों का केंद्र।
  • इतिहास: अब तक किसी PM ने नहीं किया था दौरा, मोदी बनेंगे पहले!
  • लोकल रिएक्शन:
  • नागपुर के रहवासी: “गर्व महसूस हो रहा है कि हमारे शहर को यह ऐतिहासिक मौका मिला।”
  • राजनीतिक विश्लेषक: “मोदी का यह कदम 2025 के बिहार-उत्तर प्रदेश चुनावों को ध्यान में रखकर है।”

मोदी का यह दौरा न सिर्फ़ राजनीति बल्कि भारतीय संस्कृति और राष्ट्रवाद के नए अध्याय की शुरुआत हो सकता है। आरएसएस मुख्यालय का पहला PM दौरा इतिहास के पन्नों में दर्ज होने वाला है!

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