मोहन भागवत बोले: भारत को अब ‘‘सोने की चिड़िया’’ नहीं बल्कि ‘‘शेर’’ बनना होगा

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मोहन भागवत बोले: भारत को अब ‘‘सोने की चिड़िया’’ नहीं बल्कि ‘‘शेर’’ बनना होगा

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने रविवार को केरल में शिक्षा और राष्ट्रीय पहचान पर एक महत्वपूर्ण संदेश दिया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि भारत को अब सिर्फ ‘‘सोने की चिड़िया’’ बनने की जगह ‘‘शेर’’ बनना होगा, क्योंकि दुनिया ताकत को मानती है और भारत को वैश्विक शक्ति के रूप में उभरना चाहिए।


भारत को क्यों बनना चाहिए ‘‘शेर’’?

मोहन भागवत ने जोर देकर कहा कि आज के समय में भारत को केवल अतीत की समृद्धि पर गर्व करने के बजाय वर्तमान और भविष्य में अपनी ताकत और सामर्थ्य दिखानी होगी।

  • ताकतवर बनने की जरूरत: दुनिया शक्ति को समझती है, इसलिए भारत को मजबूत होना आवश्यक है।
  • आर्थिक समृद्धि का लक्ष्य: भारत को न केवल सांस्कृतिक बल्कि आर्थिक दृष्टि से भी समृद्ध बनना होगा।
  • ज्ञान और तकनीकी में अग्रणी: भागवत ने कहा कि ज्ञान, तकनीक और विकास का सर्वोत्तम प्रदर्शन भारत में दिखना चाहिए।

‘‘भारत’’ नाम की पहचान को बनाए रखना जरूरी

अपने संबोधन में भागवत ने विशेष रूप से इस बात पर बल दिया कि ‘भारत’ का अनुवाद नहीं होना चाहिए

  • उन्होंने कहा कि ‘‘इंडिया भारत है, लेकिन भारत की पहचान भारत ही है।’’
  • ‘‘भारत’’ एक व्यक्तिवाचक संज्ञा है और इसे किसी भी भाषा में अनुवादित करना गलत होगा।
  • यदि हम अपनी पहचान खो देंगे, तो दुनिया में चाहे कितने भी अच्छे गुण हों, हमें सम्मान और सुरक्षा नहीं मिलेगी।

शिक्षा कैसी होनी चाहिए?

मोहन भागवत ने शिक्षा प्रणाली पर भी गहन विचार प्रस्तुत किए। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल स्कूल जाना नहीं होना चाहिए, बल्कि जीवन जीने की कला सिखाना भी जरूरी है।

  • स्वावलंबन पर जोर: शिक्षा ऐसी होनी चाहिए कि कोई व्यक्ति कहीं भी अपने दम पर जीवित रह सके।
  • त्याग और सेवा की भावना: भारतीय शिक्षा त्याग और दूसरों के लिए जीना सिखाती है।
  • समाज का योगदान: घर और समाज का वातावरण भी शिक्षा का हिस्सा होना चाहिए ताकि अगली पीढ़ी जिम्मेदार और आत्मविश्वासी बने।

कार्यक्रम में मौजूद रहे प्रमुख हस्तियां

यह व्याख्यान शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास द्वारा अमृता इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज में आयोजित किया गया।
इस अवसर पर:

  • केरल के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर
  • विभिन्न शिक्षाविद
  • राज्य के प्रमुख विश्वविद्यालयों के कुलपति
    मौजूद रहे और शिक्षा व समाज के विकास पर विचार साझा किए।

मोहन भागवत का संदेश भारत की पहचान, शिक्षा और शक्ति पर गहरा प्रभाव छोड़ता है। उनका कहना है कि भारत को अब अपनी पहचान ‘‘भारत’’ के रूप में बनाए रखते हुए दुनिया के सामने ताकत और समृद्धि का प्रतीक ‘‘शेर’’ बनकर उभरना चाहिए।

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