BY: Yoganand Shrivastva
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मध्य प्रदेश के वन मंत्री विजय शाह ने कर्नल सोफिया कुरैशी के खिलाफ आपत्तिजनक बयान दिया, जिसके बाद विवाद गरमाने लगा है। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया था। इस आदेश को चुनौती देते हुए विजय शाह ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया, लेकिन उन्हें वहां भी राहत नहीं मिली। सुप्रीम कोर्ट ने उनकी याचिका को खारिज करते हुए सख्त फटकार लगाई। इस मामले में अगली सुनवाई कल होनी है।
विवाद की शुरुआत: मंत्री विजय शाह का बयान
- विजय शाह ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान देश को ब्रीफ करने वाली कर्नल सोफिया कुरैशी को आतंकवाद से जोड़ते हुए विवादित टिप्पणी की।
- उन्होंने कहा था कि कर्नल सोफिया उन आतंकवादियों की ‘बहन’ हैं जिन्होंने पहलगाम में निर्दोष लोगों की हत्या की।
- इसके साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी पर भी निशाना साधा और कहा कि उन्होंने आतंकवादियों की बहन को सेना में भेजा है।
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट का सख्त फैसला और FIR दर्ज
- कर्नल सोफिया के खिलाफ की गई इस टिप्पणी पर हाई कोर्ट ने तुरंत एक्शन लिया और विजय शाह के खिलाफ FIR दर्ज करने का आदेश दिया।
- इंदौर पुलिस ने 14 मई की रात विजय शाह के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धाराओं 152, 196(1)(B) और 197(1)(C) के तहत मामला दर्ज किया।
- यह धाराएं सार्वजनिक शांति भंग करने और सरकारी कार्य में बाधा पहुंचाने से संबंधित हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने नहीं दी राहत, फटकार लगाई
- विजय शाह ने हाई कोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी।
- चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया की बेंच ने कहा कि इस तरह की टिप्पणियां इस समय उचित नहीं हैं।
- सीजेआई ने स्पष्ट किया कि उच्च पद पर बैठे व्यक्ति से ऐसे बयान की उम्मीद नहीं की जा सकती, खासकर जब देश संवेदनशील स्थिति से गुजर रहा हो।
- सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के FIR के आदेश पर रोक लगाने से साफ इनकार कर दिया।
मंत्री विजय शाह का माफी पत्र
- विवाद बढ़ने के बाद विजय शाह ने एक वीडियो जारी कर सार्वजनिक रूप से माफी मांगी।
- उन्होंने कर्नल सोफिया कुरैशी को अपनी बहन बताया और उनके साहस और बलिदान की प्रशंसा की।
- उन्होंने कहा, “अगर मेरे बयान से किसी की भावनाएं आहत हुई हैं तो मैं दिल से शर्मिंदा हूं और माफी चाहता हूं।”
देश और समाज की भावनाओं का सम्मान जरूरी
यह विवाद इस बात की याद दिलाता है कि नेताओं को जिम्मेदारी से बोलना चाहिए, खासकर जब वे ऐसे महत्वपूर्ण और संवेदनशील मुद्दों पर बात कर रहे हों।
- देश की सुरक्षा और सेना के सम्मान को सबसे ऊपर रखना चाहिए।
- सार्वजनिक मंचों पर इस तरह के विवादित बयान न केवल सेना के मनोबल को प्रभावित करते हैं, बल्कि समाज में भी गलतफहमियां बढ़ाते हैं।





