एसईसीएल प्रबंधन पर उठे सवाल
उमेश डहरिया, कोरबा
गर्मी के दिनों में जब तापमान अपने चरम पर है, तब खदान प्रभावित क्षेत्रों के ग्रामीणों को पीने के पानी के लिए भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। कोरबा क्षेत्र के कई गांवों में स्थिति यह है कि लोगों को न तो पीने का पानी मिल पा रहा है और न ही दैनिक जरूरतों के लिए पर्याप्त जल उपलब्ध है।
एसईसीएल (दक्षिण पूर्व कोलफील्ड्स लिमिटेड) द्वारा खदान प्रभावित ग्रामों में पानी की आपूर्ति के लिए एक ठेकेदार को करोड़ों रुपये का ठेका दिया गया है, जिसका उद्देश्य प्रभावित गांवों में नियमित रूप से टैंकरों के माध्यम से पीने और निस्तारी जल की आपूर्ति करना था। लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग है।
ग्रामीणों का आरोप है कि ठेकेदार द्वारा केवल खानापूर्ति की जा रही है। टैंकर समय पर नहीं पहुंचते, और कई बार तो दिनों-दिन कोई पानी की व्यवस्था नहीं होती। इससे गांवों में पेयजल संकट गहराता जा रहा है और लोग एक-एक बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं।
इस समस्या के कारण ग्रामीणों में भारी आक्रोश व्याप्त है। लोगों का कहना है कि अगर जल्द ही इस संकट का समाधान नहीं किया गया, तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे।
खास बात यह है कि गर्मी के इस मौसम में जहां प्रशासन को अतिरिक्त सतर्कता बरतनी चाहिए, वहीं संबंधित प्रबंधन की लापरवाही ने ग्रामीणों की समस्याओं को और गंभीर बना दिया है।
अब देखना यह है कि एसईसीएल प्रबंधन और प्रशासन इस गंभीर मुद्दे पर क्या कदम उठाते हैं, जिससे कि इन गांवों को राहत मिल सके और लोग कम से कम अपने मूलभूत अधिकार — पीने के पानी — से वंचित न रहें।





