एक देश एक चुनाव को लेकर मायावती ने किया बीजेपी का समर्थन, सपा सुप्रीमो अखिलेश ने दाग दिए कई सारे सवाल

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एक देश एक चुनाव को लेकर मोदी सरकार की तैयारियां तेज हो गई हैं। मोदी कैबिनेट में इसकी मंजूरी मिल गई। पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की आगुवाई में बनी कमेटी का रिपोर्ट को मंजूरी मिल गई है। प्रधानमंत्री मोदी ने इसका एलान किया है कि इसी कार्यकाल में इसे लागू कर दिया जाएगा। अब इस पर सभी लोग अपना – अपना विचार रख रहे हैं। यूपी से बसपा प्रमुख मायावती ने इसका समर्थन किया तो वहीं सपा सुप्रीमो अखिलेश से बीजेपी सरकार से कई सारे सवाल पूछे हैं।

बसपा प्रमुख मायावती ने किया समर्थन
बसपा प्रमुख मायावती ने ट्वीट किया, ’एक देश, एक चुनाव’ की व्यवस्था के तहत देश में लोकसभा, विधानसभा व स्थानीय निकाय का चुनाव एक साथ कराने वाले प्रस्ताव को केन्द्रीय कैबिनेट द्वारा आज दी गयी मंजूरी पर हमारी पार्टी का स्टैण्ड सकारात्मक है, लेकिन इसका उद्देश्य देश व जनहित में होना ज़रूरी।”
CM योगी ने कही ये बात
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लिखा, ‘एक समृद्ध लोकतंत्र के लिए राजनीतिक स्थिरता अत्यंत महत्वपूर्ण है। आदरणीय प्रधानमंत्री के यशस्वी नेतृत्व में आज केंद्रीय कैबिनेट द्वारा ‘एक राष्ट्र एक चुनाव’ प्रस्ताव को दी गई मंजूरी अभिनंदनीय है। देश में राजनीतिक स्थिरता, सतत विकास और समृद्ध लोकतंत्र की सुनिश्चितता में यह निर्णय ‘मील का पत्थर’ सिद्ध होगा। इस युगांतरकारी निर्णय के लिए उत्तर प्रदेश की जनता की ओर से आदरणीय प्रधानमंत्री जी का हृदय से आभार!”

अखिलेश यादव ने पूछे ये सवाल

यूपी के पूर्व सीएम अखिलेश यादव ने लिखा- लगे हाथ महाराष्ट्र, झारखंड व यूपी के उपचुनाव भी घोषित करवा देते।

  • अगर ‘वन नेशन, वन नेशन’ सिद्धांत के रूप में है तो कृपया स्पष्ट किया जाए कि प्रधान से लेकर प्रधानमंत्री तक के सभी ग्राम, टाउन, नगर निकायों के चुनाव भी साथ ही होंगे या फिर त्योहारों और मौसम के बहाने सरकार की हार-जीत की व्यवस्था बनाने के लिए अपनी सुविधानुसार?
  • ⁠भाजपा जब बीच में किसी राज्य की चयनित सरकार गिरवाएगी तो क्या पूरे देश के चुनाव फिर से होंगे?
  • ⁠किसी राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू होने पर क्या जनता की चुनी सरकार को वापस आने के लिए अगले आम चुनावों तक का इंतज़ार करना पड़ेगा या फिर पूरे देश में फिर से चुनाव होगा?
  • इसको लागू करने के लिए जो सांविधानिक संशोधन करने होंगे उनकी कोई समय सीमा निर्धारित की गयी है या ये भी महिला आरक्षण की तरह भविष्य के ठंडे बस्ते में डालने के लिए उछाला गया एक जुमला भर है?
  • ⁠कहीं ये योजना चुनावों का निजीकरण करके परिणाम बदलने की तो नहीं है? ऐसी आशंका इसलिए जन्म ले रही है क्योंकि कल को सरकार ये कहेगी कि इतने बड़े स्तर पर चुनाव कराने के लिए उसके पास मानवीय व अन्य ज़रूरी संसाधन ही नहीं हैं, इसीलिए हम चुनाव कराने का काम भी (अपने लोगों को) ठेके पर दे रहे हैं।
  • जनता का सुझाव है कि भाजपा सबसे पहले अपनी पार्टी के अंदर ज़िले-नगर, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर इस तरह के चुनावों को एक साथ करके दिखाए फिर पूरे देश की बात करे।
  • ⁠ चलते-चलते जनता यह भी पूछ रही है कि आपके अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव अब तक क्यों नहीं हो पा रहा है, जबकि सुना तो ये है कि वहाँ तो ‘वन पर्सन, वन ओपिनियन’ ही चलती है। कहीं कमज़ोर हो चुकी भाजपा में अब ‘टू पर्सन्स, टू ओपिनियन्स’ का झगड़ा तो नहीं है।

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