Report: Abhay mishra
Mauganj /रीवा। मऊगंज जिले में गौवंश संरक्षण के नाम पर चल रहे एक संदिग्ध रैकेट का ग्रामीणों ने पर्दाफाश किया है। लौर थाना क्षेत्र के पटपरा तिराहे पर सूझबूझ दिखाते हुए ग्रामीणों ने गौवंश से लदी तीन पिकअप गाड़ियां पकड़ीं, जिनके परिवहन के लिए सरपंचों के लेटर हेड का ‘सुरक्षा कवच’ की तरह इस्तेमाल किया जा रहा था।

क्रूरता की हद: पिकअप में ठूंसे थे 28 बेजुबान
Mauganj लौर पुलिस ने ग्रामीणों की सूचना पर तीन पिकअप वाहनों (MP17 G3621, MP17 ZH 1466, MP 17 G 3462) को जब्त किया है। इन छोटे वाहनों में 28 गौवंशों को इतनी बेरहमी से ठूंसा गया था कि वे हिलने तक की स्थिति में नहीं थे। ग्रामीणों ने जब घेराबंदी कर वाहनों को तलाशा, तो अंदर का नजारा देख दंग रह गए। पुलिस ने इस मामले में मनगवां निवासी महेंद्र गुप्ता, अंकित साकेत और सुरेश साहू को हिरासत में लिया है।

दस्तावेजों का मायाजाल: एक सरपंच को पता ही नहीं, दूसरा मांग रहा गौवंश
Mauganj इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाला मोड़ तब आया जब पकड़े गए आरोपियों ने दस्तावेज पेश किए।
- दस्तावेज 1: मऊगंज की आमोखर पंचायत के सरपंच का पत्र, जिसमें 50 किमी दूर तिवरीगवां पंचायत से 70 गौवंश मांगे गए।
- हकीकत: जब तिवरीगवां सरपंच से संपर्क किया गया, तो उन्होंने ऐसे किसी भी पत्राचार या अनुमति से साफ इनकार कर दिया।
- संदेह: सवाल यह है कि जिस आमोखर गौशाला में पहले से ही क्षमता से अधिक पशु बदहाली में हैं, वहां दूसरे जिले से गौवंश मंगाने की क्या आवश्यकता थी? क्या यह पत्र केवल पुलिस की आंखों में धूल झोंकने के लिए तैयार किया गया था?
सवालों के घेरे में प्रशासन: गौ-सेवा या संगठित गिरोह?
Mauganj मऊगंज जिले में गौशालाओं की स्थिति पहले से ही विधानसभा तक गूँज चुकी है। करोड़ों के भ्रष्टाचार के आरोपों के बीच, रीवा से मऊगंज गौवंश भेजने के इस खेल ने तस्करी की आशंकाओं को जन्म दे दिया है। सूत्र बताते हैं कि यह कागजी खानापूर्ति दरअसल कत्लखाने या अवैध तस्करी के लिए एक संगठित रास्ता तैयार करने की कोशिश थी।





